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मौत से पहले पूरी दुनिया के लिए एक लिफाफे में ‘सस्पेंस’ छोड़ गए ओमान के सुल्तान

ओमान के सुल्तान काबूस बिन सईद का निधन हो गया

ओमान के सुल्तान काबूस बिन सईद का निधन हो गया

काबूस बिन सईद (Sultan Qaboos bin Said) संसार छोड़कर चले गए लेकिन वो पूरी दुनिया के लिए एक 'सस्पेंस' छोड़ गए हैं. ओमान (Oman) के लोग अपने सुल्तान की मौत पर शोक की लहर के बीच भी सस्पेंस में डूबे हैं.

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    ओमान (Oman) के सुल्तान काबूस बिन सईद (Sultan Qaboos bin Said) का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. शनिवार को उन्होंने आखिरी सांस ली. पूरे अरब जगत में वो सबसे लंबे वक्त तक शासन करने वाले सुल्तान रहे हैं. ओमान पर उन्होंने करीब 50 वर्षों तक राज किया. अपने शासनकाल में उन्होंने ओमान को मॉर्डन देश के तौर पर विकसित किया. उनके राज में ओमान ने जबरदस्त तरक्की की. इसलिए काबूस बिन सईद को मॉर्डन ओमान का निर्माता कहा जाता है. ओमान में काबूस बिन सईद के निधन पर शोक की लहर है.

    काबूस बिन सईद संसार छोड़कर चले गए लेकिन वो पूरी दुनिया के लिए एक 'सस्पेंस' छोड़ गए हैं. ओमान के लोग अपने सुल्तान की मौत पर शोक की लहर के बीच भी सस्पेंस में डूबे हैं. सस्पेंस की वजह है वो लिफाफा, जो काबूस बिन सईद अपने निधन से पहले छोड़कर गए हैं. उसी लिफाफे में बंद है ओमान की किस्मत. अब ओमान के लोग इंतजार कर रहे हैं कि वो लिफाफा खुले तो ओमान के भविष्य का पता चले.

    क्या लिखा है सुल्तान ने उस लिफाफे में
    सुल्तान काबूस बिन सईद की कोई संतान नहीं है. उन्होंने शादी तो की थी लेकिन उन्हें कोई औलाद नहीं हुई. उनके निधन से काफी पहले ही उनके उत्तराधिकारी को लेकर सवाल उठ रहे थे. सुल्तान ने अपने उत्तराधिकारी की घोषणा आखिरी वक्त तक नहीं की.

    सुल्तान काबूस बिन सईद कैंसर से जूझ रहे थे. उन्होंने यूरोप जाकर अपना इलाज करवाया लेकिन कैंसर जैसी भयावह बीमारी से वो लड़ नहीं पाए. उन्हें पता था कि मौत उनके बिल्कुल करीब है लेकिन फिर भी उन्होंने देश को अपने उत्तराधिकारी का नाम नहीं बताया. उत्तराधिकारी के नाम पर वो लिफाफा छोड़ गए हैं.

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    काबूस बिन सईद ने 50 वर्षों तक ओमान पर राज किया


    सुल्तान के लिफाफे में लिखा है ओमान के उत्तराधिकारी का नाम
    सुल्तान काबूस बिन सईद ने ओमान को अपने उत्तराधिकारी का नाम तो नहीं बताया लेकिन उसका नाम लिफाफे में लिखकर छोड़ गए. वो चाहते तो अपने जिंदा रहते हुए ओमान को उसका सुल्तान सौंप सकते थे. लेकिन उन्होंने इसके लिए एक अजीबोगरीब तरीका चुना. किसी गेम की तरह उन्होंने ओमान के उत्तराधिकारी का नाम लिफाफे में लिखकर छोड़ गए. उन्होंने निर्देश दिया था कि उनके निधन के बाद ही लिफाफा खोला जाए.

    मस्कट के राजमहल में वो लिफाफा रखा हुआ है. अब वो लिफाफा खुलेगा तभी ओमान को उसके उत्तराधिकारी के बारे में पता चलेगा. बताया जाता है कि एक दूसरा लिफाफा भी है. उसे ओमान के दक्षिणी इलाके सलालाह के राजमहल में रखा गया है. उसमें भी सुल्तान ने अपने उत्तराधिकारी का नाम रख छोड़ा है.

    कहा जा रहा है कि अगर किसी वजह से पहला लिफाफा नहीं मिलता है तो दूसरे लिफाफे के जरिए ओमान को उसका सुल्तान मिलेगा. एक दूसरी रिपोर्ट के मुताबिक दूसरे लिफाफे में सुल्तान ने दूसरा नाम लिखा है. उन्होंने ऐसा इसलिए किया है कि अगर पहले नाम पर सबकी रजामंदी नहीं हो पाती है तो दूसरे उत्तराधिकारी के नाम पर विचार कर उसे सुल्तान बनाया जाएगा

    कब खोला जाएगा सुल्तान का छोड़ा गया लिफाफा
    ओमान के कानून के मुताबिक सुल्तान के निधन के बाद सबसे पहले ओमान का राजपरिवार उत्तराधिकारी को लेकर बैठक करेगा. अगर बैठक में किसी नाम पर सबकी सहमति बन जाती है तो उसे ही ओमान का सुल्तान घोषित कर दिया जाएगा. लेकिन सहमति नहीं बन पाने की स्थिति में सुल्तान के निधन के तीन दिन बाद लिफाफे को खोला जाएगा. लिफाफे में सुल्तान ने जिसका भी नाम लिख रखा है, उसे ओमान का सुल्तान घोषित कर दिया जाएगा. मॉर्डन ओमान में सुल्तान चुनने का ये तरीका अजीब लग सकता है. लेकिन हकीकत यही है.

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    पीएम मोदी के साथ ओमान के दिवंगत सुल्तान काबूस बिन सईद


    14 पीढ़ियों से चल रहा है एक ही परिवार का शासन
    ओमान में अल बू सैद वंश का शासन रहा है. इस परिवार के लोग 14 पीढ़ियों से ओमान पर राज कर रहे हैं. लेकिन हैरानी की बात है कि सुल्तान चुनने को कोई तय फॉर्मूला नहीं है. काबूस बिन सईद 1970 में ओमान के सुल्तान बने. उनके सुल्तान बनने की कहानी भी उतनी ही दिलचस्प है. ओमान की सल्तनत उन्हें विरासत में नहीं मिली बल्कि उन्हें अपने ही पिता से इसे छीननी पड़ी.

    काबूस बिन सईद ने अपने ही पिता का तख्तापलट किया
    1970 से पहले ओमान पर काबूस बिन सईद के पिता सुल्तान सैद बिन तैमूर का शासन था. वो बीमार और मानसिक तौर पर कमजोर हो चुके थे. लेकिन फिर भी राजगद्दी छोड़ने को तैयार नहीं थे. ओमान उस वक्त काफी पिछड़ा था. उस दौर में ब्रिटेन ने काबूस बिन सईद के उत्तराधिकार का समर्थन किया. सुल्तान सैद बिन तैमूर से राजगद्दी छोड़ने के लिए कहा गया.

    इस बात पर वो इतना गुस्सा हो गए कि उन्होंने अपनी पिस्तौल निकाल ली. कहा जाता है कि गलती से पिस्तौल निकालते वक्त गोली चल गई और उनका पैर जख्मी हो गया. वो इलाज करवाने के लिए लंदन चले गए. दो साल बाद वहीं उनका निधन हो गया.

    1970 में पूरे ओमान में थे सिर्फ 3 स्कूल
    काबूस बिन सईद ने जिस वक्त सत्ता संभाली, ओमान काफी पिछड़ा राष्ट्र था. पूरे ओमान में सिर्फ 3 स्कूल थे. बस कुछ किलोमीटर तक सड़कें बनी थी. काबूस बिन सईद ने ओमान का कायापलट कर दिया. 1970 के पहले वहां के ज्यादातर लोग खेती किया करते थे. काबूस बिन सईद ने ओमान के तेल और गैस के भंडारों से कमाई की और ओमान का कायापलट कर दिया.

    ओमान की आबादी करीब 33 लाख है. खाड़ी के इलाके के ये बेहतरीन देशों में शामिल है. ओमान ने शिक्षा से लेकर सामाजिक कार्यों में जोरदार प्रदर्शन किया है. ओमान की अर्थव्यवस्था मजबूत है और देश में अमीरों की भरमार है.

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