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क्या है Summit of Democracy, ताइवान को लेकर क्यों सुर्खियों में है ये

क्या है Summit of Democracy, ताइवान को लेकर क्यों सुर्खियों में है ये

ताइवान (Taiwan) को लोकतंत्र पर सम्मेलन में बुलाने पर चीन ने एतराज जताया है. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

ताइवान (Taiwan) को लोकतंत्र पर सम्मेलन में बुलाने पर चीन ने एतराज जताया है. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

अमेरिका (US) ने लोकतंत्र के लिए सम्मेलन (Summit on Democracy) के लिए 110 देशों को आमंत्रित किया है. इसमें दुनिया में लोकतंत्र के सामने इस समय की चुनौतियों समस्याओं और अवसरों पर चर्चा की जाएगी और उनके लिए सामूहिक रूप से उठाए जाने वाले कदमों पर विचार कर एक एजेंडा तैयार करने का प्रयास किया जाएगा. लेकिन इन देशों की सूची में ताइवान का नाम होने से चीन नाराज हो गया है.

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    अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन (Joe Biden) ने दिसंबर में होने वाले लोकतंत्र पर सम्मेलन (Summit on Demcracy)  के लिए 110 देशों को आमंत्रित किया है. यह सम्मेलन वर्चअल प्लेटफॉर्म पर होने जा रही है. लेकिन यह सम्मेलन भी से विवादों में आ गया है. इस सम्मेलन में जहां अमेरिका ने भारत के साथ  इराक और पाकिस्तान जैसे देशों तक आमंत्रित किया  है. लेकिन इस पर हायतौबा ताइवान (Taiwan) को आमंत्रित करने से हो गई है. चीन ने इस पर नाराजगी जताया है. ऐसे में यह जानना भी जरूरी है कि लोकतंत्र के लिए हो रहे इस सम्मेलन का क्या महत्व है.

    अमेरिका ने जारी की है सूची
    इस सम्मेलन चीन में कम्युनिस्ट शासन व्यवस्था होने के कारण उसे आमंत्रित नहीं किया गया है. जबकि ताइवान को इसके देशों की सूची में शामिल किया गया है. . इतना ही नहीं इस सूची में अमेरिका की तरह नाटो देश का सदस्य तुर्की का नाम भी गायब है. 110 देशों की यह सूची अमेरिका के राज्य विभाग, जिसे अमेरिका का विदेश मंत्रालय मना जाता है, ने अपनी वेबसाइट पर जारी की है.

    क्या है यह सम्मेलन
    अगले महीने 9-10 दिसंबर तक अमेरिकी राष्ट्रपति इस आभासी सम्मेलन में दुनियाके सरकारी, निजी क्षेत्रों के नेताओं की मेजबानी करेंगे. इस सम्मेलन में लोकतंत्र के सामने वर्तमान में आ रही चुनौतियों और अवसरों की चर्चा की जाएगी. यह सम्मेलन अपने देश और दुनिया में लोकतंत्र और मानव अधिकारों की रक्षा के लिए निजी और सामूहिक रूप से संकल्प, सुधार और जरूरी कदम उठाने का ऐलान करने का मंच प्रदान करेगा.

    क्या कहा अमेरिकी विदेश विभाग ने
    अमेरिका की विदेश मंत्रालय की साइट पर जारी किए गए इस सम्मेलन के पेज पर कहा गया है कि बाइडेन प्रशासन पहले दिन से ही अमेरिका और पूरी दुनिया में लोकतंत्र को नया रूप देने के प्रयास में लगा हुआ है. जो वर्तमान समय में अप्रत्याशित चुनौतियों से निपटने के लिए बहुत जरूरी है. बाइडन ने अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस पर कहा था कि कोई भी लोकतंत्र संपूर्ण और अंतिम नहीं है.”

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    लोकतंत्र पर सम्मेलन (Summit on Demcracy) का उद्देश्य लोकतंत्र का नवीनीकरण करना है. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

    एक अवसर देखा जा रहा है इसमें
    बाइडन पहले लोकतांत्रिक सम्मलेन की मेजबानी करेंगे. इसमें दुनिया के लोकतंत्रों द्वारा झेले जा रहे खतरों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों से ऐजेंडा तैयार किया जाएगा. अमेरिका के लिहाज से इस सम्मेलन वैश्विक लोकतंत्र के नवीनीकरण के लिए जरूरी काम करने वालो को सुनने समझने के एक अवसर होगा.

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    ताइवान को लेकर चीन की नाराजगी
    इस सूची में ताइवान का नाम होने से चीन ने अपनी नाराजगी जाहिर की है. चीन ने ताइवान के इस सम्मेलन में भागीदारी करने वाले देशों की सूची में ताइवान को शामिल करना अमेरिकी एक गलती बताया है. ताइवान में लोकतांत्रिक स्वशासन है, लेकिन बीजिंग का दावा है कि वह चीन का प्रांत है.

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    जो बाइडेन (Joe Biden) ने 110 देशों को इस आभासी सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया है. (फाइल फोटो)

    बाइडेन के लिए एक परीक्षा
    इस सम्मेलन के बारे में कहा जा रहा है यह बाइडेन के उस संकल्प की परीक्षा है जिसमें उन्होंने कहा था कि वे अमेरिका को उस स्थिति में वापस ला देंगे जिसमें अमेरिका चीन और रूस जैसी अधिकारवादी ताकतों के चुनौती देने के लिए दुनिया का नेतृत्व प्रदान कर सकेगा. दोनों ही देशों को इस सम्मेलन में शामिल नहीं किया गया है.

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    चीन का नजरिया
    चीन ने अमेरिका से आग्रह किया है  कि  वह एक चीन वाले सिद्धांत पर कायम रहे. अमेरिका चीन की एक चीन एक राष्ट्र की नीति को तो मानता है, लेकिन उसने ताइवान को चीन के  हिस्से के तौर पर मान्यता नहीं दी है. चीन का मानना है कि ताइवान को आमंत्रित करना उसे चीन के अलग हिस्से के तौर पर देखे जाने का  प्रयास है.

    Tags: Democracy, Research, Taiwan, USA, World

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