क्या वाकई नुकसानदेह हैं पिछले तीन साल में निकली सबसे बड़ी सौर ज्वाला

पिछले रविवार को ही निकली यह सौर ज्वाला (Solar Flare) मध्यम श्रेणी की थी.

पिछले रविवार को ही निकली यह सौर ज्वाला (Solar Flare) मध्यम श्रेणी की थी.

सूर्य (Sun) से हाल ही में पिछले तीन साल की सबसे बड़ी सौर ज्वाला (Solar Flare) निकली थी जो पृथ्वी (Earth) से बहुत नुकसानदायक तो नहीं लगी, लेकिन उसके बारे सही जानकारी आने में समय लगेगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 6, 2020, 8:07 PM IST
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पिछले एक साल से सूर्य (Sun) अपने नए सौर चक्र (Solar Cycle) में है. यह सौर चक्र 25 सौरचक्र है जो पिछले 24वे  चक्र की तरह ही काफी हद तक सूर्य को शांत रखने वाला मौसम है. हाल ही में सूर्य की सतह पर अचानक विस्फोट (Eruption) हुआ है जिससे सौर ज्वाला (Solar Flare) निकली है. यह एक चमकदार इलेक्ट्रोमैग्नेटिक ऊर्जा (Electromagnetic Energy)   प्रस्फोट एम  श्रेणी (M Class) का विस्फोट नापा गया है. बताया जा रहा है कि पिछले तीन सालों में यह सबसे शक्तिशाली विस्फोट हुआ था.

कितनी तीव्र थी यह ज्वाला

पिछले महीने के अंत में हुए इस विस्फोट में निकली ज्वाला को खगोलविदों ने एम4.4 का आंका है. सौर तूफान को नापने के लिए खगलोविद उन्हें तीन श्रेणियों में नापते हैं. एम श्रेणी की तूफान मध्यम आकार के विस्फोट को दर्शाता है, सी श्रेणी का छोटे तूफान और एक्स श्रेणी का तूफान बड़े विस्फोट को दर्शाता है.  इस पैमान में एक से लेकर 9 तक की संख्याएं ज्वालाओं की तीव्रता बताती हैं.

इस ज्वाला के साथ यह घटना भी
जहां तक वर्तमान विस्फोट की बात है तो यह एम4.4 ज्वाला के साथ ही सूर्य की कोरोना से उत्सर्जन (Coronal Mass Ejection) भी हुआ था ये कोरोना उत्सर्जन प्रायः सूर्य की बाहरी परत जिसे कोरोना कहते हैं से निकलने वाली सौर ज्वाला के साथ ही निकलते हैं  जिनसे विशाल मात्रा में प्लाज्मा और मैग्नेटिक फील्ड का प्रभाव भी निकलता है.

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सूर्य (Sun) सतह पर हर 11 साल में मौसम (Weather) बदलता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


सौरचक्र की शुरुआत



सौर ज्वाला से नए सौर चक्र की शुरुआत होती है जो पिछले साल दिसंबर के महीने में शुरू हुआ था.  लेकिन पिछले सप्ताह की सौर ज्वाला के साथ सौर गतिविधि का नया चरण शुरू हुआ. जबकि इससे पहले का सौर चक्र साल 2008 से लेकर साल 2019 तक चला था. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि  यह सौरचक्र काफी हद तक शांत ही रहने वाला है.

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पृथ्वी पर असर

हर 11 साल के सौर चक्र पर नजर रखना खगोल विज्ञान के लिहाज से ही नहीं बल्कि पृथ्वी पर जीवन के लिहाज से भी बहुत जरूरी है क्योंकि इसका असर पृथ्वी पर भी होता है. सूर्य की सतह पर होने वाली घटनों से हानिकारक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक विकिरण निकलते हैं. ये अचानक निकलने वाले ऊर्जा विकिरम तीव्र भी हो सकते हैं जिनसे रेडियो ब्लैकआउट और अन्य तकनीकी नुकसान हो सकते हैं.

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इस ज्वाला (Flare) ने पृथ्वी (Earth) पर उम्मीद से ज्यादा नुकसान पहुंचाए हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


और रेडियो ब्लैकआउट का असर

वैसे तो एक्स श्रेणी की सौर ज्वालाएं रेडियो ब्लैकआउट करने की क्षमता रखती है, लेकिन एम श्रेणी की ज्वालाएं जो पिछले महीने की 29 तारीख को निकली थीं हमारे ग्रह को केवल मामूली नुकसान पहुंचा सकती हैं. इस विस्फोट के साथ एक्स रे, पराबैंगनी विकिरणों नेदक्षिणी अटलांटिक महासगार में एक शॉर्टवेव ब्लैकआउट किया. इस नुकास की जानकारी खगोलविद टोनी फिलिप्स ने दी.

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वैसे तो यह ज्वाला पृथ्वी से एम श्रेणी की ज्वाला ही दिखाई दे रही है, लेकिन वास्तव में यह एक ताकतवर ज्वाला है और यह सूर्य के थोड़े पीछे की तरफ से हुई घटना से बनी है. फिलिप्स का कहना है कि इस विस्फोट पर सूर्य का ही आंशिक ग्रहण लग गया था, लकिन यह एक्स श्रेणी की घटना हो सकती है. अंतरिक्ष यानों को यह ज्वाला ज्यादा बेहतर दिखाई दी होगी. इसलिए हमें इसके बारे में बाद में सही तरह से जानकारी मिल सकेगी.
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