Home /News /knowledge /

क्या कभी थे सूर्य के भी वलय, वो कैसे खत्म हो गए

क्या कभी थे सूर्य के भी वलय, वो कैसे खत्म हो गए

एक समय पर सूर्य (Sun) का भी शनि ग्रह की तरह धूल और गैस का छल्ला हुआ करता था.  (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

एक समय पर सूर्य (Sun) का भी शनि ग्रह की तरह धूल और गैस का छल्ला हुआ करता था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

हमारे सूर्य (Sun)के पास एक समय धूल और गैस के बहुत सारे छल्ले हुआ करते थे जैसे आज शनि ग्रह के पास का एक छल्ला है. नए अध्ययन में बताया गया है कि इन छल्लों ने सौरमंडल के निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाई थी और ग्रहों के आकार का निर्धारण भी उन छल्लों की वजह से हुआ. यहां तक कि उन्हीं की वजह से पृथ्वी का आकार सीमित रहा और वह आवासीय ग्रह बन सकी.

अधिक पढ़ें ...

    हमारा सौरमंडल (Solar System) अपने निर्माण के समय से ही बहुत बड़े बड़े बदलावों से गुजरा है. इसके आसपास ग्रहों (Planets) का भी निर्माण हुआ यह सब कैसे हुआ इस कई तरह की व्याख्याएं की जा चुकी हैं. लेकिन अधिकांश शोध मानते हैं कि ग्रहों का निर्माण सूर्य के पास धूल और गैस से ही हुआ था. नए अध्ययन में दावा किया गया है कि सूर्य के पास इस तरह की एक नहीं बल्कि कई छल्ले या रिंग (Rings of Sun) थीं. इतना ही नहीं इन्हीं छल्लों की सौरमंडरल के निर्माण में अहम भूमिका थी यहां कि हमारी अपनी पृथ्वी के आकार निर्धारण भी उसी से तय हुआ था.

    शनि की तरह छल्ले
    नेचर एस्ट्रोनॉमी जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में बताया गया है कि सूर्य के पास शनि ग्रह की तरह धूल और गैस के छल्ले हुआ करते थे. इससे सौरमंडल के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. इससे पृथ्वी के जीवन के अनुकूल ग्रह के बनना भी निर्धारित हुआ था और पृथ्वी एक बहुत बड़े ग्रह में विकसित नहीं हो सकी थी.

    पृथ्वी का आकार
    राइस यूनिवर्सिटी के खगोल भौतिकविदों ने इस अध्ययन इस  बारे में जानकारी दी. यूनिवर्सिटी के खोगलभौतकवद आंद्रे इजडोरो ने बताया कि शुरुआती सूर्य की धूल और गैस के छल्लों की ही वजह से पृथ्वी का आकार ज्यादा नहीं बढ़ सका और वह एक बड़ा ग्रह बन कर सुपर अर्थ नहीं बन सकी.

    क्या होते हैं सुपरअर्थ
    सुपर अर्थ वे पथरीले ग्रह होते हैं जो काफी तरह से पृथ्वी के जैसे होते हैं बस उनका आकर पृथ्वी की तुलना में बहुत बड़ा होता है. हमारी मिल्की वे गैलेक्सी में ही इस तरह के ग्रह सूर्य के जैसे  करीब तीस प्रतिशत तारों का चक्कर लगाते हैं. इस तरह के ग्रह अध्ययन के लिहाज से बहुत उपयुक्त होते हैं क्यों यहां जीवन की संभावना अन्य ग्रहों की तुलना में ज्यादा होती है.

    space, Solar System, Sun, Earth, Saturn, Rings of Sun, Super Earth,

    इन छल्लों ने सौरमंडल (Solar System) के ग्रहों का आकार तक निर्धारित कर लिया था. (फाइल फोटो)

    कम दबाव वाले क्षेत्र
    राइस यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने उन्नत कम्प्यूटर मॉडिलंग के जरिए हमारे सौरमंडल के निर्माण का सिम्यूलेशन कर पाया कि शुरुआती सूर्य ने कम से कम तीन कम दबाव वाले प्रेशर बम्प्स बनाए थे. इस तरह की संरचना आज भी कई तारों में देखने को मिलती है. ये तश्तरीनुमा छल्लों ने ही ऐसे पदार्थों को पृथ्वी तक पहुंचने रोका जो उसे सुपर अर्थ बना सकते थे.

    यह भी पढ़ें: ब्रह्माण्ड में कैसे बन गए लोहे से भारी तत्व, भारतीय खगोलविदों ने खोजा रहस्य

    हमारे सौरमंडल में सुपर अर्थ क्यों नहीं
    हैरानी की बात है कि है ब्रह्माण्ड में जहां सूर्य जैसे तारों के पास सुपर अर्थ जैसे बड़े ग्रह मिलना कोई मुश्किल बात नहीं है, वहां हमारे सौरमंडल में एक भी सुपरअर्थ ग्रह नहीं है. इजीडोरो ने बताया कि उनकी टीम ने प्रस्तावित किया है कि दबाव के हिस्सों से अलग अलग तश्तरीनुमा पदार्थों के भंडार बन गए थे जो आपस में जुड़े हुए नहीं थे.

    space, Solar System, Sun, Earth, Saturn, Rings of Sun, Super Earth,

    इन्हीं की वजह से हमारे सौरमंडल में एक भी सुपर अर्थ श्रेणी का ग्रह (Planet) नहीं है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    नहीं मिल सकी सामग्री
    शोधकर्ताओं का कहना है की इन्हीं की वजह से सौरमंडल के आंतरिक और बाहरी हिस्से में उन पदार्थों की मात्रा निर्धारित हुए जिससे ग्रहों का निर्माण हुए और इसी वजह इन ग्रहों के पास सीमित पदार्थ उपलब्ध रह सके. सिम्यूलेशन से पता चला कि इन दबाव वाली गांठों के निर्माण का समय सुपर अर्थ जैसे ग्रहों के बनने का समय था और इसी वजह से ग्रहों के बनते समय उनके पास ज्यादा सामग्री नहीं पहुंच सकी.

    यह भी पढ़ें: चंद्रमा पर स्पेस स्टेशन बनाना क्यों है बहुत मुश्किल काम

    शोधकर्ताओं के प्रतिमान हमारे सौरमंडल के निर्माण के बारे में नई जानकारी देने वाले साबित हो हे है. इस प्रतिमान ने हमारे सौरमंडल के प्रमुख हिस्सों को सटीक रूप से बनाया  जो पिछले प्रतिमानों में नहीं दिख रहे थे. अब जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप से और भी ऐसी जानकारी दे सकेंगे जिससे इस तरह के प्रतिमान ज्यादा बेहतर और सटीक नतीजे दे सकेंगे.

    Tags: Earth, Solar system, Sun

    विज्ञापन

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें
    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर