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जानिए H1-B वीजा ने अमेरिका को दी हैं कौन सी मशहूर हस्तियां, जिस पर लगा है बैन

जानिए H1-B वीजा ने अमेरिका को दी हैं कौन सी मशहूर हस्तियां, जिस पर लगा है बैन

H1 B वीजा की वजह से अमेरिका को कई बड़ी हस्तियां मिली हैं.  (प्रतीकात्मक तस्वीर)

H1 B वीजा की वजह से अमेरिका को कई बड़ी हस्तियां मिली हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

अमेरिका (US) की कई बड़ी कंपनियों के प्रमुख H1B जैसे वीजा से ही मिले हैं जिसमें गूगल के सुंदर पिचई (Sunder Pichai) और माइक्रोसॉफ्ट के सत्या नडेला (Satya Nadella) भी शामिल हैं.

नई दिल्ली:  हाल ही में अमेरिका (USA) ने कोरोना संकंट के चलते H1-B वीजा पर पाबंदियां लगाई हैं. यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने कोरोना संकट (Corona Crisis) के चलते अपने देश में बढ़ती बेरोजगारी के चलते उठाया है. लेकिन इसी H1-B वीजा ने अमेरिका को कई बड़ी मशहूर हस्तियां दी हैं.

अस्थाई तौर पर रद्द कर दिया गया है H1-B
अमेरिका में काम की तलाश में जाना लोगों का सपना रहा है. वहां के काम करने का माहौल लोगों को आकर्षित करता रहा है. इसी लिए वहां के आव्रजन और वीजा (Immigration and Visa) के नियम पर दुनिया भर को लोगों की नजर रहती है. नए नियमों के तहत अमेरिका अब मेरिट आधारित आव्रजन की व्यवस्था अपना रहा है. जिसके तहत H1-B को इस साल के अंत तक अस्थाई तौर पर रद्द कर दिया गया है लेकिन अमेरिका को भारत ने कई मशहूर हस्तियां दी हैं.

गुगल के प्रमुख सुंदर पिचई
दुनिया के सबसे बड़ी आईटी कंपनियों में शुमार गूगल के वर्तमान प्रमुख सुंदर पिचई भी भारतीय मूल के व्यक्ति हैं जो H1-B वीजा से अमेरिकी नागरिक बने हैं. इससे पहले पिचई एक आईआईटी खड़गपुर के छात्र वीजा को लेकर, कैलीफोर्निया की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में गए थे. मैकेन्जी कंपनी में काम करने के दौरान उन्होंने H1-B वीजा का आवेदन किया था.

H1 B वीजा के नियमों में बदलाव से अमेरिका को भी नुकसान होगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


माइक्रोसॉफ्ट के सत्या नडेला
इसी तरह माइक्रोसॉफ्ट की प्रमुख सत्या नडेला भी H1-B वीजा के तहत ही अमेरिका पहुंचे और वहां के नागरिक बने. पहले नडेला को ग्रीन कार्ड मिला हुआ था, लेकिन उन्होंने उसे छोड़ दिया और H1-B वीजा ले लिया जिससे उनकी पत्नी भी अमेरिका आ सके. उस समय आव्रजन (Immigration)  के नियम अमेरिकी विदेशियों के लिए बहुत कठिन थे, इस वजह से ग्रीनकार्ड धारियों के पति/पत्नियों को एक लंबी और अनिश्चित प्रक्रिया से गुजरना होता था. इसी वजह से नडेला ने 1994 में अपना ग्रीन कार्ड छोड़ा और H1-B वीजा ले लिया. उस समय साल 1990 में बने वीजा नियम चल रहे थे.

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इंद्रा नूई भी आईं थी H1 वीजा लेकर
पेप्सी कंपनी की प्रमुख इंद्रा नूई चेन्नई से अमेरिका H1-B वीजा लेकर बोस्टन कन्सल्टिंग ग्रुप से साल 1980 में जुड़ी थीं.  उस समय वह H1 वीजा कहलाया करता था. H1-B वीजा उसके 10 साल बाद लागू हुआ था. H1 वीजा को दो हिस्सों में बांट दिया गया H1-A वीजा जो नर्सों के लिए था और H1-B वीजा जो अन्य विशेषज्ञता वाले व्यवसायों के लिए था.

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस साल के अंत तक H1-B वीजा पर बैन लगाया है.(फाइल फोटो)


और ये दो हस्तियां भी
इसके अलावा हैदराबाद में जन्में शांतनु नारायण भी अमेरिका पहुंचे और उन्होंने एडोब जैसी कंपनी के प्रमुख का पद संभाला. वे अस्थायी वीजा लेकर उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका गए थे. मास्टरकार्ड के सीईओ अजयपाल सिंह बग्घा भी भारत में पले बढ़े थे और अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद कुछ समय भारत में काम भी किया  2002 मं उन्होंने अमेरिकी रीटेल बैंक कंपनी में भी काम किया था. लेकिन वे फिर दुनिया में कई जगह काम करने बाद फिर अस्थायी वीजा के साथ मास्टकार्ड कंपनी के साथ जुड़े.

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तो अब क्या
नए नियमों के तहत बड़ी संख्या में कुशल कर्मचारी (Skilled Workers) प्रभावित होंगे  नए नियम के तहत अब केवल ऊंची तनख्वाह वाले कुशल कर्मचारियों को ही प्राथमिकता दी जाएगी. इसका असर कई तरह के लोगों पर होगा जिसमें सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स को खासा नुकसान होगा. लेकिन तकनीकी क्षेत्र के अलावा स्वास्थ्य सेवाओं और मीडिया के क्षेत्र में भी भारतीयों को नुकसान होगा क्योंकि इन क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग H1-B वीजा का उपयोग कर अमेरिका जाया करते थे.

Tags: Google, Microsoft, Research, US, Visas, World

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