चुनाव के दौरान देश में सबसे ज्यादा पॉवरफुल होंगे यह शख्स, PM पर भी कार्रवाई का अधिकार

अपने प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान सुनील अरोड़ा त्वरित फैसला लेने और मजबूत इरादों के लिए जाने जाते थे. जानिए, कैसी उनकी शख्‍सियत.

News18Hindi
Updated: March 10, 2019, 5:15 PM IST
चुनाव के दौरान देश में सबसे ज्यादा पॉवरफुल होंगे यह शख्स, PM पर भी कार्रवाई का अधिकार
मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा
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Updated: March 10, 2019, 5:15 PM IST
17वीं लोकसभा के गठन के लिए लोकसभा चुनाव 2019 की तारीखों का ऐलान हो चुका है. मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने 10 मार्च (रविवार) को इसकी घोषणा की. चुनावों की घोषणा के साथ ही देशभर में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है. अब चुनाव की पूरी प्रक्रिया समाप्त होने तक मुख्य चुनाव आयुक्त देश के सबसे ताकतवर शख्स हो जाएंगे. आगामी चुनावी उधेड़बुन में मुख्य चुनाव आयुक्त ही वह शख्स है जो देश के प्रधानमंत्री पर भी कार्रवाई कर सकता है. इस वक्त इस पद पर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सुनील अरोड़ा आसीन हैं. आइए जानते हैं सुनील अरोड़ा की शख्सियत के बारे में.

तत्काल फैसलों के लिए जाने जाते हैं सुनील अरोड़ा


वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सुनील अरोड़ा ने 2 दिसंबर, 2018 को चुनाव आयोग का मुख्य निर्वाचन आयुक्त का पद संभाला था. उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत की जगह संभाली थी. सुनील अरोड़ा भारतीय प्रशासनिक सेवा में अस्सी के बैच के ये रिटायर्ड अधिकारी इससे पहले कई अहम विभागों जैसे वित्त, टैक्सटाइल और योजना आयोग के लिए भी काम कर चुके हैं.

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फाइल फोटो।


अपने प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान सुनील अरोड़ा त्वरित फैसला लेने और मजबूत इरादों के लिए जाने जाते थे.

बेहद आम बच्चों सा रहा बचपन
सुनील अरोड़ा का जन्म 13 अप्रैल 1956 को पंजाब के होशियारपुर में हुआ था. शुरुआती शिक्षा होशियारपुर के विद्या मंदिर स्कूल और दयानंद मॉडल स्कूल से हुई, जिसके बाद डीएवी और वहां से डीएवी कॉलेज होशियापुर से सुनील ने ग्रेजुएशन की. इसके बाद पंजाब यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी से एमए करने के बाद वे यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी पढ़ाने लगे.
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मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा


1980 में राजस्थान कैडर से आईएएस सुनील का पारिवारिक माहौल पढ़ाई-लिखाई से ही संबंधित रहा. उनके पिता इंडियन रेलवे में काम करते, जबकि मां होशियारपुर के ही डीएवी कॉलेज में पढ़ाती थीं. इसका असर बच्चों पर भी पड़ा. सुनील के अलावा दोनों भाई भी महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर हैं.

प्रशासनिक अनुभव की कोई सानी नहीं
जब पिछले साल आखिरी महीने में नये मुख्य चुनाव अधिकारी की नियुक्ति हुई तब ऐसी चर्चाएं हुई कि उनकी नियु‌क्ति बेहद संवेदनशील समय में हो रही है. क्योंकि आने वाले साल लोकसभा चुनाव होने थे. अब जब वही परिस्थिति सिर पर हैं तो ऐसा माना जा रहा है कि सुनील अरोड़ा अपने पद व उसकी गरिमा का बखूबी पालन करेंगे. क्योंकि इसके पीछे उनका लंबा प्रशासनिक अनुभव है.

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सुनील अरोड़ा के पास सरकारी कामकाज का लंबा अनुभव है. आईएएस की नौकरी के दौरान राजस्थान के धौलपुर, अलवर, नागौर और जोधपुर जैसे जिलों में तैनात रह चुके अरोड़ा 1993-1998 के दौरान मुख्यमंत्री के सचिव पद पर थे. इसके अलावा 2005 से 2008 तक वे मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव भी रहे.

मुख्य चुनाव आयुक्त बनने से पहले संभाल चुके हैं महत्वपूर्ण पद
गहरी प्रशासनिक समझ रखने वाले इस अधिकारी को समय-समय पर महत्वपूर्ण पद मिलते रहे. सुनील ने राज्य के सूचना एवं जनसंपर्क, उद्योग एवं निवेश विभागों में भी अपनी सेवाएं दी हैं. उन्होंने नागरिक विमानन मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर भी अपनी सेवाएं दी हैं. वह पांच साल तक इंडियन एयरलाइंस के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक भी रह चुके हैं.

सुनील अरोड़ा यूं तो अप्रैल 2016 में रिटायर हो गए थे, लेकिन उनकी दूरदर्शिता और चुनावी मामलों पर पकड़ को देखते हुए उन्हें पोस्ट-रिटायरमेंट भी लगातार जोड़ा रखा गया. 60 पार का ये अफसर अब बतौर मुख्य चुनाव आयुक्त आगामी बेहद अहम आम चुनावों में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रहा हैं.
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