पृथ्वी की तरह सूर्य पर भी आते हैं ‘भूकंप’, फिर क्या होता है

सूर्य (Sun) की सतह पर भूकंप (Quakes) का पहले भी पता चलता रहा था, लेकिन उसके स्रोत के बारे सही जानकारी अब मिली है(प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay).

सूर्य (Sun) की सतह पर भूकंप (Quakes) का पहले भी पता चलता रहा था, लेकिन उसके स्रोत के बारे सही जानकारी अब मिली है(प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay).

सूर्य (Sun) पर हुए नए शोध से पता चला है कि सूर्य की सतह पर आने ‘भूकंप’ (Sunquakes) वाले वहां की आंतरिक गतिविधियों के कारण आते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 6, 2021, 2:02 PM IST
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पृथ्वी (Earth) की तरह सूर्य (Sun) पर भी ‘भूकंप’ (Quakes) आते हैं. अब तक वैज्ञानिकों को इनके बारे में काफी कम जानकारी थी, लेकिन ताजा शोध ने इस विषय पर नई रोशनी डालते हुए कुछ नए खुलासे भी किए हैं. इससे कुछ पुरानी धारणाओं को भी बदलना पड़ा है. इसमें सौरज्वाला (Sun Flare) और कोरोनल मास इजेक्शन (CME) भी शामिल हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि पृथ्वी के भूकंप की तरह सूर्य के भी ये ‘भूकंप’ सूर्य के अंदर के हालात की काफी जानकारी दे सकते हैं.

क्या होते हैं ये ‘भूकंप’

सूर्य पर आने वाले ‘भूकंप’ को सनक्वेक (Sunquake) कहते हैं. यह वास्तव में सूर्य के आंतरिक भाग में एक छोटे समय के लिए आना वाली भूकंपीय व्यवधान (seismic disturbance) होता है जो सूर्य की सौरज्वाला और सीएमई के साथ ही सूर्य की सतह पर तरंगित होकर  फैलते हैं. नासा के सोलर डायनामिक्स ऑबजर्वेटरी (SDO) डेटा के आंकड़ों के आधार पर हुआ अध्ययन सुझाता है कि इन सनक्वेक की कार्य प्रणाली सूर्य की सतह के नीचे के कुछ रहस्यों को उजागर कर सकती है.

ध्वनि तरंगों से निकली राह
सूर्य के ये ‘भूकंप’ वहां की सतह पर पैदा होने वाली सौर ज्वाला के साथ एक विस्तारित तरंगों के रूप में अवलोकित किए जाते हैं. ये तरंगें एक तरह की ध्वनि तरंगें (acoustic waves) को पैकेट को प्रदर्शित करती हैं जो सूर्य के आंतरिक भाग से निकलती हैं और सौर ज्वाला के प्रभाव से उत्तेजित हो जाती है.

बदलनी पड़ी ये धारणा

दशकों तक वैज्ञानिकगण यह मानते रहे हैं कि सौर ज्वाला द्वारा पैदा किए चुंबकीय बल के कारण ही सूर्य पर ये ‘भूकंप’ आते हैं. ऐसा माना जाता था कि सौर ज्वाला सूर्य के अंदर तक जाती हैं.  लेकिन नासा के एसडीओ के आंकड़ों के ताजा शोध के नतीजों ने कुछ अलग ही बात पता लगाई है.



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सूर्य (Sun) में भूकंपीय स्रोत (Seismic Source) उसकी सतह के 700 मील अंदर का है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


कैसे पता चला इसका

जुलाई 2011 में जब एक ‘ सूर्य के भूकंप’ का अवलोकन किया गया जिसकी अल्पतीव्र सौर ज्वाला में से असामान्य रूप से तीखी तरंगें एसडीओ ने अवलोकित की. वैज्ञानिक इन तरंगों के स्रोत तक पहुंचने में सफल रहे जिसके लिए उन्होंने हेलियोसीज्मिक होलोग्राफी तकनीक का उपयोग किया. इस तकनीक में एसडीओ का हेलियोसीज्मिक और मैग्नेटिक इमेजर का उपयोग किया गया.

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क्या पाया शोधकर्ताओं

वैज्ञानिकों ने इस तकनीक से सूर्य की सतह का गतिविधि मापी जिसका पहले भी सूर्य के अलावा अन्य स्रोतों की ध्वनि तरंगों का रास्ता पता लगाया गया था. वैज्ञानिकों ने देखा कि ये तरंगे बजाय सूर्य की सतह से अंदर की ओर जाने के सौर ज्वाला के आने के फौरन बाद उनके आने वाली जगह की बहुत गहराई से आती है.

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सौरज्लावाओं (Solar Flares) को पहले इन भूकंपों (Sunquakes) का स्रोत माना जाता था.
(प्रतीकात्मक तस्वीर)


कहां था इन तरंगों का मूल स्रोत

इस पड़ताल से पता चला कि ध्वनि स्रोत सूर्य की सतह के 700 मील भीतर का था. जबकि इससे पहले यह माना जाता था कि यह स्रोत सूर्य की सतह है. ये तरंगे एक डूबे हुए स्रोत से आती पाई गईं जो किसी तरह से सौर ज्वाला द्वारा शुरू होता है. यह पड़ताल सूर्य के सनक्वेक के लंबे समय से चले आ रहे रहस्य के कई सवालों का जवाब दे सकती है.

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इस शोध से सन्क्वेक के स्रोत के उद्गम के बारे में संकेत अलावा यह भी पता चल सकेगा कि इस भूकंप की कुछ तरंगें उसको पैदा होने की वजह बनने वाली ज्वाला से अलग क्यों होती है. अब वैज्ञानिक अन्य भूकंपों के अध्ययन की भी योजना बना रहे हैं कि क्या उनमें भी ऐसे स्रोतों से तरंगें पैदा होती है.
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