वैज्ञानिकों ने खोजा शुक्र ग्रह पर दशकों से छाया विशाल जहरीला बादल

वैज्ञानिकों ने खोजा शुक्र ग्रह पर दशकों से छाया विशाल जहरीला बादल
शुक्र ग्रह पर ये बादल अभी से नहीं बल्कि करीब चार दशकों से बनता आ रहा है.

हाल ही में वैज्ञानिकों ने शुक्र ग्रह (Venus) पर एक विशाल बादल (Huge Cloud) के बारे में पता लगाया है जो पिछले चार दशकों (Decades) से वहां तेजी गति से घूम रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 8, 2020, 9:27 PM IST
  • Share this:
इस समय हमारे वैज्ञानिकों का ध्यान पृथ्वी के बाहर जीवन की संभावनाओं को तलाशने पर ज्यादा है. लेकिन इसके साथ ही हमारे वैज्ञानिक अंतरिक्ष में हमारे सौरमंडल और उसके बाहर के पिंडों का इसलिए भी अध्ययन करते हैं  जिससे उन्हें हमारे सौरमंडल, ग्रहों और पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति के बारे में जानकारी मिल सके. इसी लिए शुक्रग्रह भी उनके अध्ययन का एक केंद्र है. ताजा शोध में वैज्ञानिकों को पता चला है कि शुक्र ग्रह पर एक बहुत ही विशालकाय बादल तेजी से घूमता है और उसके जैसे बादल हमारे सौरमंडल में कहीं पर नहीं है.

कितना विशाल है बादल
खगोलविदों ने शुक्र ग्रह के पास जहरीले बादल खोजा है. ये बादल शुक्र की भूमध्य रेखा से लेकर उत्तरी और दक्षिणी मध्य अक्षांश तक 7,500 किलोमीटर तक फैला है. ये बादल ग्रह के ऊपर 47.5 और 56.5 किलोमीटर की ऊंचाई के बीच मौजूद है. इस परिघटना की सबसे खास बात यह है कि ऐसा सौरमंडल के किसी भी और ग्रह में कभी नहीं देखा गया है.

दशकों से घूम रहा है यह वहां
ये बादल हल 4.9 दिन में एक बार ग्रह पर 328 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से घूमते हैं.  यह ग्रह के स्तर की दीवार शुक्र ग्रह पर पश्चिम की ओर 1983 से घूम रही है. खगोलविदों की यह पड़ताल जोफिजिकल रिसर्च लैटर्स में प्रकाशित हुई है. पुर्तगाल में इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स एंड स्पेस साइंस के एस्ट्रोफिजिसिस्ट पेड्रो माकाडो ने बताया, “यह अविश्वसनीय है. यदि यह पृथ्वी पर होता तो यह पृथ्वी के चेहरे की तरह हो जाता.”





जाक्सा के ऑर्बिटर ने भेजीं तस्वीरें
भौतिकविद जेवियर पेराल्टा की अगुआई में शोधकर्ताओं  की टीम ने जापानी स्पेस एजेंसी जाक्सा (JAXA) के वीनस ऑर्बिटर अकात्सुकी की 2016 और 2018 के बीच खींची गई इंफ्रारेड तस्वीरों का अध्ययन किया.  उन्होंने पाया कि एक वायुमंडलीय लहर जैसी आकृति दिख रही है. लेकिन यह आकृति काफी ऊपर दिखाई दे रहा था.

सौरमंडल में और भी हो सकते थे पृथ्वी जैसे ग्रह, क्या गुरू ग्रह है इसकी वजह        

कारण पता नहीं लगा इसके बनने का
अध्ययन में पाया गया कि यह नई आकृति बहुत ही अलग है और शुक्र ग्रह पर इससे पहले देखी गई किसी भी वायुमंडलीय लहर के मुकाबले ज्यादा गहरी है. वह उस बादल की परत में दिखी जो वहां के ग्रीसहाउस प्रभाव (Greenhouse effect)  के लिए जिम्मेदार है. इसी परत की वजह से शुक्र ग्रह बहुत गर्म है. वहीं वैज्ञानिक इस परिघटना के कारणों का पता नहीं लगा सके हैं.

कैसे हालात हैं शुक्र पर
पेराल्टा का कहना है, “वायुमंडल में यह गड़बड़ी एक नई मौसमी परिघटना है जो दूसरे ग्रहों पर नहीं देखी गई है. इसकी वजह से, अभी तक इसकी व्याख्या कर पाना बहुत मुश्किल हो रहा है. शुक्र पर तापमान बहुत ज्यादा होता है. वहां दिन का तापमान 400 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. और वहां के बादल सल्फ्यूरिक ऐसिड के होते हैं. इसी एसिड के कारण यहां के बादल जहरीले माने जाते हैं. यहां वायुमंडलीय दाब भी बहुत ही ज्यादा है. यहां की सतह पर ऐसा लगेगा कि हम पृथ्वी पर पानी के एक किलोमीटर नीचे हैं.

चांद और मंगल के बाद NASA का शुक्र ग्रह के लिए VERITAS मिशन, जानिए क्या है यह 

उल्लेखनीय है कि जब पृथ्वी और शुक्र ग्रह का निर्माण हुआ था उस समय दोनों ही ग्रह के स्थितियां बिलकुल एक ही जैसी थीं. लेकिन पृथ्वी पर जीवन का विकास होता गया और शुक्र ग्रह एक गर्म ग्रह हो कर रह गया.  वैज्ञानिकों की इसीलिए शुक्रग्रह के अध्ययन में खासी रुचि है. उनका मानना है कि शुक्र ग्रह के अध्ययन से सौरमंडल की उत्पत्ति और पृथ्वी पर जीवन के विकास संबंधी अनेक प्रश्नों के उत्तर मिल सकते हैं.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading