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चंद्रमा के निर्माण को समझने के लिए क्यों सिम्यूलेशन की मदद ले रहे हैं खगोलविद

चंद्रमा के निर्माण (Formation of Moon) के एक मत की सारी संभावनाओं के टटोलने की जरूरत पड़ रही है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
चंद्रमा के निर्माण (Formation of Moon) के एक मत की सारी संभावनाओं के टटोलने की जरूरत पड़ रही है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

चंद्रमा के निर्माण (Formation of Moon) की व्याख्या करने वाले बहुत से मत हैं. उनमें से एक की सारी संभावनाएं टटोलने के लिए खगोलविद सुपरकम्प्यूटर सिम्यूलेशन (Computer simulation) की मदद चाहते हैं

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 20, 2021, 7:20 PM IST
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चंद्रमा (Moon) का निर्माण कैसे हुआ, इस बात को लेकर वैज्ञानिकों के बीच बहुत से मत (Theories) हैं. इन मतों का समर्थन करने वाले शोधकर्ता तरह तरह के प्रमाणों की खोज करने का प्रयास कर रहे हैं जिसमें चंद्रमा की चट्टाने और मिट्टी के अध्ययन से लेकर पृथ्वी (Earth) पर गिरे उल्कापिंडों (Meteorites) का अध्ययन शामिल है. लेकिन शोधकर्ताओं के एक समूह ने से चंद्रमा के निर्माण की समस्या को सुलझाने के लिए सुपरकम्प्यूटर सिम्यूलेशन (Computer simulation) की मदद मांगी है.

क्या हैं ये विभिन्न मत
एक सिद्धांत के अनुसार चंद्रमा एक छोटा खगोलीय पिंड था जो पृथ्वी से तब जुड़ गया जब वह उसके पास से गुजर रहा था जिसके बाद वह पृथ्वी की चक्कर लगाने लगा और उसका उपग्रह बन गया. वहीं एक्रीशन सिद्धांत के मुताबिक चंद्रमा का निर्माण पृथ्वी के साथ ही हुआ था. इसके अलावा एक विशाल टकराव का सिद्धांत सबसे ज्यादा प्रचलित है. जिसकी इस शोध में वैज्ञानिकों को सुपरकम्प्यूटर सिम्यूलेशन की जरूरत है.

क्या है विशाल टकराव का सिद्धांत
विशाल टकराव के सिद्धांत के मुताबिक पृथ्वी पृथ्वी का एक दूसरे पिंड से टकराव हुआ था जो मंगल ग्रह के आकार था और इसी टकराव के कारण पृथ्वी का एक प्राकृतिक उपग्रह बना. डरहम यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि आखिर वह किस तरह का टकराव था जिससे चंद्रमा का निर्माण हुआ.



4.5 अरब साल पुरानी घटना
मंगल ग्रह के आकार का खगोलीय पिंड जिसके टकराने से चंद्रमा बना होगा, वैज्ञानिक उसे थीया (Theia) कहते हैं. वैज्ञानिक इस पिंड का वेग, उसके टकराव के कोण, उसकी घूर्णन की गति, आदि का आंकलन करना चाहते हैं जो 4.5 अरब साल पहले पृथ्वी से टकराव के समय रहा होगा.

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बताया जाता है कि टकराव (Collision) का समय 4.5 अरब साल पहले का था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


यह समस्या आई
खगोलविदों ने थीया के न घूमने वाले संस्करण के पृथ्वी से टकराव के नतीजों को समझने का प्रयास किया. लेकिन उससे उन्हें मंगल के भार के 80 प्रतिशत वाला उपग्रह मिला. लेकिन जब उन्होंने थोड़े से घूर्णन वाले थीया के टकराव का अध्ययन किया तो उन्हें दो चंद्रमा मिल गए.

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कैसे बना होगा चंद्रमा
बयान के मुताबिक पृथ्वी से टकराव के बाद छोटे गुच्छे बन गए होंगे जो पृथ्वी की कक्षा में घूमने लगे होंगे. खगोलविदों को लगता है ये गुच्छे अवशेषों की डिस्क में मिलकर आकार में बड़े हो गए होंगे. दिलचस्प बात यह है कि इस थीया में एक लोहे का क्रोड़ है जो चंद्रमा में भी है. चंद्रमा की बाहरी परत पर पुरानी पृथ्वी और थीया के पदार्थों का पाया जाना बताया जाता है.

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शोधकर्ताओं को उम्मीद से है कि सिम्यूलेशन (Simulation) से यह पता चलेगा कि पृथ्वी (Earth) और थीया (Theia) के टकराव के आंकड़े क्या थे. (फाइल फोटो)


क्या पता चलेगा सिम्यूलेशन से
फिलहाल शोधकर्ता आश्वस्त नहीं हैं कि अरबों साल पहले चंद्रमा कैसे बना होगा, लेकिन चंद्रमा और पृथ्वी रासायनिक संरचना में समानता  इसी मत के प्रमाणों की खोज करने के लिए प्रेरित करती है.  कम्पूयटर सिम्यूलेशन के जो नतीजा वर्तमान चंद्रमा के आकार, भार आदि से मेल खाएंगे उसी से पता चलेगा कि अगर टकराव की वजह से चंद्रमा बना था तो वह टकराव कैसे हुआ होगा.

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फिलहाल वैज्ञानिक पृथ्वी और चंद्रमा के इतिहास के अलावा उल्कापिंडों के भी गहराई से अध्ययन कर रहे हैं जिससे पृथ्वी के साथ ही सौरमंडल के इतिहास की भी जानकारी मिलती है. इसके अलावा क्षुद्रग्रह और धूमकेतु का अध्ययन भी काफी कुछ बता सकता है. फिर भी इस शोध के अध्ययनकर्ताओं को सिम्यूलेशन से काफी उम्मीदें हैं.
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