जानिए क्या है Supercool पानी का ‘Two in One’ होना और क्या है इसकी अहमियत

पानी (Water) की यह अवस्था में कम तापमान (Low Temperature) के बाद भी तरलता कायम रहती है, लेकिन इसमें दो का संरचनाओं (Structures) का होना पहली बार पाया गया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
पानी (Water) की यह अवस्था में कम तापमान (Low Temperature) के बाद भी तरलता कायम रहती है, लेकिन इसमें दो का संरचनाओं (Structures) का होना पहली बार पाया गया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

पानी (Water) की सुपरकुल (Supercool) तरल अवस्था (liquid state) में दो संरचनाओं (structures) के होने की जानकारी मिली है. इस पड़ताल को कई क्षेत्रों के लिए उपयोगी माना जा रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 19, 2020, 1:00 PM IST
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संसार में पानी (Water) जैसी कोई चीज नहीं है. जीवन में इसके महत्व के अलावा भी पदार्थ (Substance) के रूप में इसकी कई ऐसी विशेषताएं (characteristics) जो शायद ही दुनिया के किसी पदार्थ में हों. इसकी इन अजीब विशेषताओं में से और भी ज्यादा इजाफा हो जाता है, जब यह अति ठंडी (Cool) अवस्था यानि कि सुपरकूल स्टेट (Supercool State) में आ जाता है. शोधकर्ताओं ने पाया है कि इस अवस्था (State) में तरल (liquid) पानी में दो संरचनाओं (Structures) का मिश्रण (mixture) होता है.

क्या होती है सुपकूल अवस्था
किसी भी तरल पदार्थ की सुपरकूल अवस्था वह होती जब उससे उसके जमाव बिंदु के तापमान से कम तापमान पर ठंडा तो किया जाता है, लेकिन उसकी अवस्था ठोस होने नहीं दी जाती. इस प्रक्रिया का उपयोग कई जानवर करते हैं यहां तक कि हमारे फ्रिज में रखे जाने वाले कई पेय पदार्थ भी जम न पाएं इसके लिए भी इसकी तकनीकों को उपयोग होता है.

कितने कम तापमान पर
अब तक बहुत ही कम तापमान पर तरल पानी का बर्ताव कभी भी एक सीधा और सरल विषय नहीं रहा है. कुछ वैज्ञानिकों ने यह कोशिश भी करके देखी है कि क्या पानी को वाकई 190 केल्विन या -83 डिग्री सेल्सियस तक तरल अवस्था में कायम रखा जा सकता है. नया अध्ययन बहुत लंबे समय से प्रतीक्षित प्रयोगिक आंकड़े उपलब्ध कराता है जिससे पानी के बहुत ही अधिक कम तापमान में अजीब बर्ताव की व्याख्या की जा सके. यह सुझाता  कि सुपरकूल पानी एक तरल में दो तरह है.



स्थायी हो जाती है तरलता
केमिकल फिजिसिस्ट ग्रेग किमैल ने बताया, “हमने दर्शाया है कि बहुत ही ठंडे तापमानों पर तरल पानी ने केवल तुलनात्मक रूप से स्थायी होता है, बल्कि यह इसमें दो तरह की विशेष लक्षण होते हैं. लंबे समय से यह विवाद चला आ रहा था कि क्या सुपरकूल पानी हमेशा क्रिस्टल मे बदल जाएगा या नहीं. यह पड़ताल इस बात की भी व्याख्या करती है ऐसा बिलकुल नहीं होता”

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यह अवस्था (State) -83 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान पर बनती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


उच्च घनत्व में ले जाना
इस अध्ययन के लिए वैज्ञानिकों ने पानी की असामान्य विशेषताओं की व्याख्या करने के प्रस्तावित विभिन्न मॉडलों के आंकड़ों का उपयोग किया. सुपरकूल पानी के ‘स्टॉप मोशन’ ‘तस्वीरों’ के आंकड़े बताते हैं कि पानी को उच्च घनत्व वाली तरल संचरना में संघनित (Condense) किया जा सकता है.

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दो संरचनाओं का साथ
इस उच्च घनत्व की खास बात यह है कि यह कम घनत्व वाली संरचना के साथ रह सकती है जो के पानी के खास जुड़ाव से मेल खाने वाली बात है. इसमें उच्च घनत्व का अनुपात तब तेजी से कम होने लगता है जब तापमान -18 डिग्री सेल्सियस से -83 डिग्री सेल्सियस तक जाने लगता है. यह बात सुपरकूल पानी के उन मॉडल्स का समर्थन करती है जो उसे एक मिश्रण बताते हैं.

ऐसे बनाई यह अवस्था
वैज्ञानिकों ने इंफ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी का उपयोग कर जब बर्फ की पतली फिल्म पर लेजर का हमला किया तो उन्होंने पाया कि पानी के अणु  एक तरह से स्टॉप मोशन में आ गए थे. इस स्थिति में सुपरकूल पानी की अवस्था का निर्माण कुछ ही नैनोसेकेंड के लिए हुआ. वैज्ञानिक लोनी क्रिंग्ले ने बताया कि इसमें देखी जाने वाली सबसे खास बात यह थी कि संरचना का यह बदलाव फिर से बनाया जा सकता है और उसे वापस भी हासिल किया सकता है.

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इस अवस्था (State) का तरल पानी (liquid Water) ऊंचे आसमान में भी बनता है जहां हवाई जहाज (Airplane) उड़ते हैं. . (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


वायुमंडल के ऊपरी हिस्से में इसकी भूमिका
इस अध्ययन का हमारे वायुमंडल के ऊपर के हिस्से की प्रक्रियों के लिए बहुत महत्व है. इसमें सबसे खास ग्रॉपल (graupel) बनने की प्रक्रिया है. वायुमंडल में ऊंचाई पर ग्रॉपल बर्फ के वे टुकड़े होते हैं जो सुपरकूल तरल पानी से अंतरक्रिया करते हैं. ग्रॉपल बहुत ही ठंडे तूफानी मौसम में बनते हैं. इनका विमान की उड़ान पर असर हो सकता है.

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यह अध्ययन खगोलविज्ञान में भी काम का साबित हो सकता है. यह हमारे सौरमंडल के बहुत ठंडे ग्रह जैसे गुरू, शनि, यूरेनस, और नेप्च्यून में तरल पानी के बर्ताव को समझने में मदद कर सकता है. यह सुपरकूल पानी की भाप ही होती है जो धूमकेतु के पूंछ का निर्माण करती है.
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