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वैज्ञानिकों ने देखा नजारा, ब्लैक होल ने कैसे पलट दी अपनी पूरी मैग्नेटिक फील्ड

एक सुपरमासिव ब्लैक होल (Supermassive Black Hole) में इस तरह की घटना पहली  बार देखने को मिली है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

एक सुपरमासिव ब्लैक होल (Supermassive Black Hole) में इस तरह की घटना पहली बार देखने को मिली है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

ब्लैक होल (Black Hole) का अध्ययन करते समय वैज्ञानिकों को एक सुपरमासिव ब्लैक होल (SMBH) के बाहर प्लाज्मा के कारण बनने वाला चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) में पलटाव के संकेत मिले हैं. इस हैरान करने वाली घटना साल 2017 के आसपास घटित हुई थी जिसके आंकड़ों के तौर पर स्विफ्ट वेधशाला ने अवलोकित किया था. ब्लैक होल में यह इस तरह का पहला अवलोकन है.

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    ब्लैक होल (Black Hole) अपने अंदर और आसपास बहुत सारी ऊर्जा समेटे होते हैं. वे क्वेजार और अन्य सक्रिय गैलेक्सी केंद्र को भी ऊर्जा प्रदान करते हैं.  इसके पीछे पदार्थ की शक्तिशाली गुरुत्व क्षेत्र और चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) से अंतरक्रिया होती है. ब्लैक होल की खुद की मैग्नेटिक फील्ड नहीं होती लेकिन उसके आसपास चक्कर लगा रहे प्लाज्मा और उसमें आवेशित कण विद्युत प्रवाह और मैग्नेटिक फील्ड पैदा करते हैं. प्लाज्मा के प्रवाह की कभी  दिशा नहीं बदलती है. ऐसे में वैज्ञानिक बहुत हैरान हुए जब उन्होंने एक सुपरमासिव ब्लैक होल की मैग्नेटिक फील्ड को पलटते (Flipping of Magnetic Field) देखा.

    ध्रुवों की अदला बदली
    सामान्य शब्दों में मैग्नेटिक फील्ड एक सरल मैग्नेट के प्रभाव के रूप में समझी जा सकती है जिसमें उत्तर और दक्षिणी ध्रुव होते हैं. चुंबकीय पलटाव या मैग्नेटिक रिवर्सल  जब होता है तो इन काल्पनिक ध्रुवों के अभिविन्यास की अदला-बदली हो जाती है. यह प्रभाव तारों में सामान्य बात है. लेकिन ब्लैक होल में ऐसा होना असामान्य घटना है.

    सूर्य और पृथ्वी में भी
    खुद हमारे सूर्य के साथ भी ऐसा होता है. सूर्य की मैग्नेटिक फील्ड में हर 11 साल में पलटाव होता है. इससे 11 साल का चक्र चलता है जिसे खगोलविद 17वीं सदी से देखते आ रहे हैं. इतना ही नहीं पृथ्वी की मैग्नेटिक फील्ड भी हर कुछ लाख सालों में बदलाव होता है. लेकिन सुपरमासिव ब्लैक होल में इस तरह के चुंबकीय पलटाव के बारे में किसी ने नहीं सोचा था.

    कहां हुई ये घटना
    साल 2018 में एक स्वचलित आकाशीय सर्वे में पाया गया है कि 23.9 करोड़ प्रकाशवर्ष दूरी पर स्थित गैलेक्सी में अचानक बदलाव देखने को मिल रहा है. 1ES 1927+654 नाम की इस गैलेक्सी की चमक दिखने वाले प्रकाश की तुलना में 100 गुना थी. इसकी खोज के तुरंत बाद स्विफ्ट वेधशाला ने इस चमक में एक्स रे और पराबैंगनी किरणें अवलोकित कीं.

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    मैग्नेटिक फील्ड में पलटाव (Flipping of Magnetic Field) सूर्य में भी देखने को मिलता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

    पहले माना गया था कि
    खगोलविदों ने जब इसके पुराने आंकड़ों को देखा तो पाया कि एक्स रे और पराबैंगनी की चमक बढ़नी साल 2017 में ही शुरू हुई थी. शुरु में माना गया था कि यह चमक गैलेक्सी के ब्लैक होल के पास स्थित किसी तारे की वजह से है. माना गया था कि ऐसी घटनाएं ज्वार व्यवधान की घटनाओं को जन्म देते हैं जिससे में तारा टूट जाता है और ब्लैक होल की संचयन चक्रिका में गैस का प्रभाव बाधित होता है. लेकिन नए अध्ययन ने इस विचार को खारिज कर दिया है.

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    एक्स रे की तीव्रता में अचानक बदलाव
    नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने गैलेक्सी की चमक का पूरे स्पैक्ट्रम के अलोकनों को अध्ययन किया. उन्होंने पाया कि एक्स रे की तीव्रता बहुत तेजी से गिर रही है. एक्स रे अमूमन बहुत तीव्र मैग्नेटिक फील्ड के आवेशित कणों से निकलती है. इससे यह पता चला कि ब्लैक  होल के पास की मैग्नेटिक फील्ड में अचानक बदलाव देखा गया है.

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    यह सारे बदलाव संचयन डिस्क (Accretion Disk) और उसके प्लाज्मा के कारण होते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    संचयन डिस्क का गर्म होना
    उसी समय दिखाई देने वाले और पराबैंगनी प्रकाश की तीव्रता भी बढ़ गई जिससे पता चला कि ब्लैक होल की संचयन चक्रिका के हिस्से गर्म होते जा रहे हैं. इस तरह के दोनों प्रभावों में से कोई भी ज्वार व्यवधान घटना में देखने को नहीं मिलता है. लेकिन मैग्नेटिक फील्ड में पलटाव का विचार सटीक बैठता दिखाई दे रहा है. टीम ने दर्शाया कि ब्लैक होलकी संचयन चक्रिका के मैग्नेटिक पलटाव से पहले चक्रिका की बाहरे बाहरी किनारों की फील्ड कमजोर हुई जिसके  बाद डिस्क और कारगर तरह से गर्म हो गई होगी.

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    उसी समय कमजो मैग्नेटिक फील्ड की वजह से कम एक्स रे निकल रही  थीं एक बार मैग्नेटिक फील्ड ने अपना पलटाव पूरा कर दिया, तो डिस्क अपनी मूल अवस्था में वापस आ गई. इस पहले अवलोकन से हमें पता चल गया है कि मैग्नेटिक पलटाव ब्लैक होल में भी होता है. लेकिन हमें अभी यह पता नहीं चल सका है कि ऐसा कब कब होता है.

    Tags: Black hole, Research, Science, Space

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