जानिए नेताओं के चुनावी अंधविश्वास- दिग्गी राजा का मिर्ची हवन तो प्रियंका का काला टीका

तेलंगाना के मुख्यमंत्री और टीआरएस प्रमुख के चंद्रशेखर राव तो कोई काम बगैर ज्योतिषी की सलाह के नहीं करते.

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: May 20, 2019, 8:59 PM IST
Sanjay Srivastava
Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: May 20, 2019, 8:59 PM IST
लोकसभा चुनाव हो चुके हैं. अब इंतजार परिणामों का है. चुनावों के दौरान नेताओं ने अपने तरह तरह के अंधविश्वास का प्रदर्शन किया. इसमें दिग्गज नेता और पार्टियां तक शामिल रहीं. इस मामले में इस बार कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का मिर्ची हवन खासा चर्चित हुआ है.

एक साधु ने दिग्विजय सिंह के लिए भोपाल में एक मिर्ची हवन किया, इसमें उसने पांच हजार मिर्चियों से बने पाउडर को आहुति में डाला ताकि शैतानी शक्तियां दिग्विजय के चुनाव पर कोई असर नहीं डाल सकें. यहीं नहीं दिग्विजय ने चुनाव के दौरान कई काम किए. उन्होंने गायत्री शक्तिपीठ में गऊ पूजा की. उन्होंने कई गायों को हार पहनाया.



उत्तर प्रदेश में इस बार चुनाव अभियान के दौरान पहली बार जब प्रियंका ने लखनऊ में रोड शो शुरू किया, तो उन्होंने माथे पर काला टीका लगा रखा था ताकि उन्हें किसी की नजर ना लगे और गलत शक्तियों से वो सुरक्षित रहें. इसमें प्रियंका ने जिस बस का इस्तेमाल किया, उसी बस का इस्तेमाल पंजाब में भी उनके रोडशो में किया गया, क्योंकि कांग्रेसियों ने उस बस को लकी बस माना था.

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इसलिए नहीं कराई जाती कांग्रेस मुख्यालय की पुताई
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के प्रदेश के मुख्यालय पर इसलिए पुताई नहीं कराई जाती, क्योंकि माना जाता है कि अगर इसमें पुताई करा दी गई तो मौजूदा प्रदेश कमेटी जिम्मेदारी से हटा दी जाएगी.
1992 में महावीर प्रसाद, 1995 में एनडी तिवारी, 1998 में सलमान खुर्शीद और 2012 में रीता जोशी सब पुताई के बाद ही हटे थे. वहम की वजह से लखनऊ में कांग्रेस दफ्तर में अशोक के पेड़ बड़े होते ही काट दिये जाते हैं. कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि अशोक का पेड़ अगर बिल्डिंग की छत से ऊंचा हो जाए तो ये बहुत अपशकुन माना जाता है.
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भोपाल में कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह के लिए हो रहा हवन


वास्तु के हिसाब से रैलियों में बीजेपी नेताओं के मंच
बताया जाता है कि इस चुनावों में जहां भी बीजेपी के बड़े नेताओं की रैलियां हुईं, वहां उनके मंच वास्तु के हिसाब से बनाए गए. इस बात का खास ध्यान रखा गया. इन चुनावों में ज्यादातर नेता मुहुर्त निकलवा कर ही नोमिनेशन करने गए.

ज्योतिष के मामले में चंद्रशेखर राव हैं सबसे आगे
ज्योतिष पर विश्वास के मामले में तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव सबसे आगे कहे जा सकते हैं. वो अपने ज्यादातर काम ज्योतिषियों की सलाह पर ही करते हैं. लोकसभा चुनावों के दौरान भी उन्होंने अपने चुनाव अभियान की शुरुआत की.

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इससे पहले जब चंद्रशेखर राव ने 12 दिसंबर 2018 को राज्य में मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली तो इसके लिए खास मुहुर्त तय किया हुआ था. उन्होंने ये शपथ दोपहर 1.24 बजे से 03.04 बजे के बीच ली. क्योंकि ये समय उनके प्रमुख ज्योतिषी लक्ष्मी धर्माचार्य ने तय कर दिया था. धर्माचार्य के अनुसार ये खास अभिजीत मुहुर्त था. इससे पहले तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के प्रमुख चंद्रशेखर राव ने इसी ज्योतिषी के कहने पर समय से पहले ही विधानसभा भंग कर चुनाव कराने की घोषणा की थी.

तेलंगाना राष्ट्र समिति के प्रमुख और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव आमतौर पर सारे महत्वपूर्ण काम ज्योतिषी की सलाह से ही करते हैं


ज्योतिषी के कहने पर ही उन्होंने विधानसभा चुनाव जीतने के बाद काफी समय तक राज्य को बगैर मंत्रिमंडल के चलाया, क्योंकि ज्योतिषी ने उन्हें सलाह दी थी कि अभी राज्य में मंत्रिमंडल बनाना ठीक नहीं रहेगा.

के. चंद्रशेखर राव को भारतीय ज्योतिष पर जबरदस्त विश्वास करने वाले नेता के रूप में जाना जाता है. वो खुद के लिए नंबर छह को लकी मानते हैं. ये बात भी उन्हें उनके ज्योतिषी ने ही उनका ज्योतिष चार्ट देखकर बताया है.

सिंधिया ने पहली थी नींबू की माला
मध्य प्रदेश में कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया नीबू और मिर्च से बना एक माला पहने हुए नजर आए. ऐसा तब हुआ जबकि वो कुछ महीने पहले विधानसभा चुनावों के दौरान मंदसौर में प्रचार कर रहे थे. ताकि बुरी ताकतों से उनकी रक्षा हो सके.

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चंद्रबाबू नायडु भी करते हैं ज्योतिष पर भरोसा
चंद्रबाबू नायडु खुद ज्योतिष पर बहुत भरोसा रखते हैं. अपने निजी ज्योतिषी श्रीनिवासन गार्गेय के कहने पर ही उन्होंने आंध्र प्रदेश की नई राजधानी अमरावती का भूमि पूजन छह जून को कराया था. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी भी ज्योतिषियों की राय पर काफी यकीन रखती हैं.

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायुडू खुद ज्योतिषियों पर काफी भरोसा करते हैं


तब नीतीश तांत्रिक के पास गए थे
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बारे में कहा जाता है कि वो अक्सर तांत्रिक के पास जाते हैं. बिहार विधानसभा चुनावों के दौरान उनके एक तांत्रिक के पास जाने का वीडियो खासा वायरल हुआ था.

कमलनाथ का अंधविश्वास
छिंदवाड़ा में कहा जाता है कि हर चुनाव में मुख्यमंत्री कमलनाथ जुन्नारदेव विधानसभा क्षेत्र में आखिरी जनसभा करते हैं. ऐसा नहीं करने पर उनकी जीत की रफ्तार पर ब्रेक लग जाता है. इस गलती का खामियाजा एक बार कमलनाथ को भुगतना भी पड़ा है, जब 1997 में हुए लोकसभा उपचुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा ने कमलनाथ को हरा दिया था. उस चुनाव में कमलनाथ चुनाव प्रचार का समापन जुन्नारदेव से करना भूल गये थे.

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नेताजी ने ये भी किया
कुछ महीने पहले जब छत्तीसगढ़ में दूसरे चरण का चुनाव हुआ तो पूर्व मंत्री दयालदास बघेल वोट डालने तो गए लेकिन ईवीएम को पूजा-पाठ से नवाजा. ईवीएम बॉक्स से नारियल छुआ उसे मतदान केंद्र के दरवाजे पर फोड़ा. फिर पूरे कमरे में अगरबत्ती घुमाई. दरअसल उनके ज्योतिषी ने उनसे ऐसा करने के लिए कहा था.

लखनऊ में कांग्रेस के प्रांतीय मुख्यालय की पुताई इसलिए नहीं कराई जाती, क्योंकि माना जाता है ऐसा होते ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हटा दिए जाते हैं


राजस्थान के ज्यादातर नेता ज्योतिष पर खासा भरोसा करते हैं. ज्योतिषियों के ही कहने पर राजस्थान के नए विधानसभा भवन का शुद्धिकरण कराया गया. अन्यथा पहले ये माना गया कि इस नए भवन में भूत रहते हैं. क्योंकि यहां से 200 मीटर दूरी पर श्मशान था.इसके लिए एक पुजारी ने अनुष्ठान भी किया.

नोएडा आने से बचते थे यूपी के सीएम
लंबे समय तक तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री नोएडा आते ही नहीं थे, क्योंकि उन्हें लगता था कि नोएडा जाने से उनकी सीएम की कुर्सी छीन जाएगी. ये सिलसिला जून 1988 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह से शुरू हुुआ था. यहां से जाने के बाद उनका निधन हो गया.

बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती 2007 से 2012 के दौरान मुख्यमंत्री रहते हुए यहां आईं. लेकिन फिर वो 2012 के चुनावों में उनकी पार्टी हार गई. हालांकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ दिसंबर 2017 में यहां दिल्ली की मेजेंटा लाइन मेट्रो का उदघाटन करने यहां आए लेकिन तीन महीने बाद ही गोरखपुर और फूलपुर के उपचुनावों में उनकी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा.

आजादी का समय भी ज्योतिषियों के चलते सरकाया गया था
जब भारत के अंतिम वायसराय लुईस माउंटबेटन ने भारत की आजादी के लिए 15 अगस्त का दिन तय किया तो भारतीय ज्योतिषियों ने बेहतर नहीं समझा. लेपियर और कोलिएंस ने अपनी किताब फ्री एट मिडनाइट में लिखा कि एक ज्योतिषी स्वामी मदमातंड ने माउंटबेटन को लिखा, भगवान के लिए आप भारत को 15 अगस्त के दिन आजादी मत दें. क्योंकि ग्रह नक्षत्र सही नहीं दीख रहे हैं. इसी के चलते 14 अगस्त की आधी रात को भारत की आजादी का समय मुकर्रर किया गया.

 

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