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सुप्रीम कोर्ट इन 4 मामलों पर अगले हफ्ते दे सकता है फैसला

News18Hindi
Updated: November 8, 2019, 6:02 PM IST
सुप्रीम कोर्ट इन 4 मामलों पर अगले हफ्ते दे सकता है फैसला
सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते तक देश के चार बड़े मामलों पर फैसला सुना सकता है.

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई (CJI Ranjan Gogoi) के 17 नवंबर को रिटायर होने से पहले अयोध्या में राम जन्मभूमि विवाद सहित राफेल, सबरीमाला और चौकीदार पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला अगले हफ्ते आ सकता है.

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  • Last Updated: November 8, 2019, 6:02 PM IST
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देश के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई (CJI Ranjan Gogoi) अगले सप्ताह रिटायर्ड होने वाले हैं. ऐसा माना जा रहा है कि जस्टिस गोगोई के रिटायरमेंट से पहले सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में लंबित चार बड़े मामलों पर फैसला अगले हफ्ते आ सकता है. देश के सबसे बड़े विवादों में शामिल अयोध्या में राम जन्मभूमि विवाद से संबंधित फैसले को भी अगले हफ्ते आना है. इसके अलावा राफेल विवाद, सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर चौकीदार विवाद पर भी सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने वाला है.

गौरतलब है कि निवर्तमान चीफ जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर होने वाले है. ऐसे में आगामी कुछ दिनों में अयोध्या विवाद सहित अन्य बड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ सकता है. गौरतलब है कि अयोध्या में राम जन्म भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की स्पेशल पीठ ने लगातार 40 दिनों तक सुनवाई चली है.

अयोध्या विवाद सहित अन्य बड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ सकता है.


राम जन्मभूमि पर फैसला सुरक्षित

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरा होने के बाद राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद पर अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था. बता दें अयोध्या विवाद की सुनवाई करने वाली सुप्रीम कोर्ट की स्पेशल बेंच की अगुवाई चीफ जस्टिस रंजन गोगई ने की है. चीफ जस्टिस के अलावा इस बेंच में जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर शामिल थे.

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में यह दूसरी बार है, जब किसी मामले की सुनवाई लगातार 40 दिनों तक चली है. इससे पहले केशवानंद भारती बनाम भारत सरकार के मामले में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ में 62 दिनों तक लगातार सुनवाई हुई थी.  दरअसल अयोध्या विवाद सुप्रीम कोर्ट में 2010 से लंबित था. इसकी सुनवाई कोर्ट में इसी वर्ष 6 अगस्त से शुरू हुई थी.

आयोध्या मामले की सुनवाई लगातार 40 दिनों तक चली है.

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पिछले महीने 16 अक्टूर को अयोध्या विवाद की सुनवाई पूरी कर ली गई थी. मालूम हो कि इससे पहले अयोध्या विवाद पर वर्ष 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया था. अदालत ने अपने फैसले में अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित भूमि को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्माही अखाड़ा और रामलला के बीच बराबर-बराबर बांटा था. हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कई याचिका दायर की गई थीं.

राफेल विवाद पर फैसला
अयोध्या मामले के अलावा चीफ जस्टिस गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच द्वारा दूसरा महत्वपूर्ण फैसला राफेल विवाद को लेकर आने वाला है. याचीकर्ता प्रशांत भूषण और अरुल शैरी द्वारा 10 मई को राफेल रिव्यू पिटीशन दायर की गई थी. याचीकर्ताओं ने अनियमिता का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की थी. वहीं केंद्र सरकार ने याचिकर्ताओं की याचिका को खारिज करने की मांग की थी.

राफेल सौदे पर भ्रष्टाचार का आरोप था.


हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की पहले हुई सुनवाई में मांच की मांग को खारिज कर दिया था. कोर्ट ने यह फैसला 14 दिसंबर 2018 को दिया था. बावजूद  इसके याचीकर्ताओं द्वारा यह दलील देते हुए की पहले की सुनवाई में सरकार ने कई गलत तख्य रखे हैं, सुप्रीम कोर्ट में एक रिव्यू याचिका दायर की गई थी.

वहीं केंद्र सरकार की तरफ से अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि मामले में पहली नजर में कोई संज्ञेय अपराध नहीं हुआ है. इसलिए कोर्ट को इस रिव्यू याचिका को खारिज कर देना चाहिए. गौरतलब है कि कांग्रेस द्वारा 2019 के लोकसभा चुनाव में राफेल को एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया गया था. यदि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में सरकार के पक्ष में फैसला देती है तो यह मोदी सरकार की एक बड़ी नैतिक जीत होगी.

राहुल गांधी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में राफेल को एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया.


सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर विवाद
केरल के बड़े सामाजिक और राजनीति विवाद सबरीमाला पर भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार है. दरअसल केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की इजाजत नहीं है. लेकिन हाल के कुछ वर्षों में कुछ महिला संगठनों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे को उठाया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के पक्ष में फैसला सुनाया था. कोर्ट ने अपने फैसले में महिलाओं को मंदिर में प्रवेश करने की इजाजत दी थी.

परंपरा और धार्मिक मसला बताते हुए कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ चीफ जस्टिस गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने एक रिव्यू पिटीशन दायर की गई थी. कोर्ट ने मामले की सुनवाई पूरी कर ली है और जल्द ही इस पर फैसला आ सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में महिला के प्रवेश की इजाजत दी.


बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर 2018 को सभी महिलाओं को मंदिर में प्रवेश करने की इजाजत देने वाला फैसला दिया था. कोर्ट ने कहा था कि लिंग के आधार पर मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को रोकना एक भेदभाव वाली प्रथा है, जिससे महिलाओं के मौलिक अधिकार का हनन होता है. दरअसल पिछले कुछ समय से केरल की राजनीति इसी मुद्दे के इर्द-गिर्द घूम रही है.

चौकादार चोर विवाद
जस्टिस गोगोई की नेतृत्व वाली बेंच द्वारा अगले हफ्ते राहुल गांधी के बयान चौकादार चोर पर भी फैसला आ सकता है. बता दें कि भारत सरकार द्वार वायु सेना के घटते हवाई बेड़े के मद्देनजर फ्रांस सरकार से राफेल विमानों का सौदा किया था. इस सौदे को दोनों सरकारों के बीच फास्ट ट्रैक प्रोसीजर के तहत 36 राफेल विमानों का सौदा किया गया. देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने सरकार पर अधिक दामों पर राफेल खरीदने की बात कही.

राहुल गांधी के बयान चौकादार चोर पर भी फैसला आ सकता है.


कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गांधी ने यह आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मित्रों को लाभ पहुंचाने के लिए सौदे में भ्रष्टाचार किया है.  साथ ही लोकसभा के चुनावों के दौरान राफेल को कांग्रेस ने एक बड़ा मुद्दा बनाया. राहुल गांधी ने राफेल पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए 'चौकीदार चोर है' का नारा दिया. राहुल गांधी के इस बयान के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई 10 मई को ही पूरी कर फैसला सुरक्षित कर लिया था. याचीकर्ता ने कोर्ट में दायर अपनी याचिका में कहा था कि राहुल गांधी ने चौकीदार चोर है का बयान देकर प्रधानमंत्री का अपमान किया है. जिस पर उन्हें माफी मांगनी चाहिए. वहीं राहुल गांधी के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट में एक हलफनामा दायर करके अपनी गलती स्वीकार कर ली है.

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First published: November 8, 2019, 5:49 PM IST
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