आखिर क्या है Psychological Autopsy, जो सुशांत केस में CBI जांच की होगी अहम कड़ी

आखिर क्या है Psychological Autopsy, जो सुशांत केस में CBI जांच की होगी अहम कड़ी
सीबीआई ने फैसला किया है कि वह सुशांत मामले में साइकोलॉजीकल ऑटोप्सी करेगी.

सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajpoot) की मौत के मामले में सीबीआई (CBI) ने साइकोलॉजिक ऑटोप्सी (Psychological Autopsy) की जांच करने का फैसला किया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 25, 2020, 12:11 PM IST
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फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत का मामला उलझता जा रहा है. हाल ही में सीबीआई ने फैसला किया है कि वह इस मामले में साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी करेगी. सीबीआई के आने से पहले ही विवादित यह मामला और सुर्खियां हासिल कर चुका है. सीबीआई अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार इस मामले को देख रही है.

तो क्या होती है साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी
साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी (Psychological Autopsy) जिसे बोलचाल की भाषा में PA भी कहा जाता है, शरीर की ऑटोप्स की तरह ही साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी इस बात की व्याख्या करने की कोशिश होती है कि किसी व्यक्ति ने आत्म हत्या करने की कोशिश क्यों की थी. इसके लिए इसमें मरने वाले के मेडिकल रिकॉर्ड्स, उसके दोस्तों और परिवारों से बातचीत कर यह शोध किया जाता है कि मरने से पहले व्यक्ति की मानसिक स्थिति क्या थी.

विवादित हो गया है यह मामला
34 साल के सुशांत जून में अपने मुंबई आवास में मृत पाए गए थे. उसके बाद प्रारंभिक जांच में बताया गया था कि उन्होंने आत्महत्या की थी. लेकिन उसके बाद कई बॉलीवुड हस्तियों के बयान और जांच में उठे सवालों से बवाल मचने से यह मामला हाई प्रोफाइल बन गया और इसे सीबीआई को सौंपा गया. सूत्रों का कहना है कि यह साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी एक तरह का सुशांत के मन का पोस्टमार्टम होगा.



तो क्या करेगी सीबीआई
इस मामले में सीबीआई सुशांत सिंह राजपूत की मौत के समय के सारे तथ्य जमा कर रही है जिसमें उनके सोशल मीडिया पर हुए चैट्स और बातचीत शामिल हैं जो उनसे उनके परिवार वालों, मित्रों और दूसरे लोगों ने की थी. अपनी इस पड़ताल में सीबीई का सुशांत की मौत के समय उनकी मानसिक स्थिति के बारे में भी पता लगाने की कोशिश करेगी.

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Sushant Singh Rajput Case: सुशांत सिंह राजपूत 14 जून को अपने अपार्टमेंट में मृत पाए गए थे.


सारे हालात को स्पष्टता से जानने की कवायद
सुशांत की मानसिक स्थिति में सीबीआई की दिलचस्पी उनके मूड स्विंग्स, बर्ताव के स्वरूपों और यहां तक कि व्यक्तिगत व्यवहारिक विशेषताओं (personal idiosyncrasies) का भी अध्ययन करेगी. बताया जा रहा है कि सीबीआई का इरादा सुशांत की मौत के समय उनकी मानसिक अवस्था का पूरा खाका पता लगाने का है, जिससे उनकी मौत की स्पष्ट वजह पता चल सके.

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क्यों जरूरत पड़ी ऐसा करने की
दरअसल सुशांत की मौत का आत्महत्या का मामला होना बहुत से लोगों के गले नहीं उतर रहा है. सावर्जनिक जीवन में सुशांत कभी इस तरह के नहीं दिखे कि वे बहुत ज्यादा तनाव में हों. ऐसे में जब कई हस्तियों ने बयान में यह इशारा करना किया कि अगर सुशांत ने आत्महत्या की है तो उन्हें इसके ‘मजबूर’ किया गया है जैसी बातों ने मामले को और ज्यादा सनसनीखेज बना दिया है. इसी बीच सुशांत के जीवन में उनकी गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती की भूमिका भी कई सवालों के घेरे में हैं. इन्ही सब बातों से सीबीआई को इस तरह का फैसला लेना पड़ा.

हमेशा ऐसी जांच नहीं होती है
आत्महत्या के मामलों में साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी को बहुत अहम उन हालातों में माना जाता है जब मरने वाले के बारे में किसी को भी अंदाजा न हो कि वह आत्महत्या जैसा कदम उठा सकता है. ऐसे उसकी मौत के हालातों के बारे में गहराई से अध्ययन कर यह पता लगाया जाता है कि व्यक्ति ने ऐसा कदम उठा क्यों लिया.

Supreme Court, CBI
सुप्रीम कोर्ट ने सुशांत सिंह राजपूत की मौत का केस सीबीआई को सौंपा है


कब होता है यह विकल्प
आमतौर पर आत्महत्या करने वाले लोग अपने आसपास या उन मनोचिकत्सकों को जाने-अनजाने में यह इशारा दे देते हैं कि वे आत्महत्या की कोशिश करने वाले हैं. लेकिन जिनके बारे में कुछ भी अंदाजा न लगा हो, ऐसे में साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी एक विकल्प हो जाता है.

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बताया जा रहा है कि इस तरह की विशेष जांच प्रक्रिया भारत में तीसरी बार अपनाई जा रही है. इससे पहले सुनंदा पुष्कर मामले में और दिल्ली के बुराड़ी में पूरे परिवार के आत्महत्या मामलों में ही ऐसी जांच की गई थी.
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