कौन थे भगवान स्वामीनारायण, जिनके नाम पर दुनिया का सबसे भव्य मंदिर बना

स्वामीनारायण या सहजानंद स्वामी हिंदू धर्म के स्वामीनारायण संप्रदाय के संस्थापक थे- सांकेतिक फोटो (flickr)

स्वामीनारायण या सहजानंद स्वामी हिंदू धर्म के स्वामीनारायण संप्रदाय के संस्थापक थे- सांकेतिक फोटो (flickr)

उत्तरप्रदेश के गोंडा जिले के एक गांव में जन्मा बालक घनश्याम पांडे आम बच्चों से एकदम अलग और तीक्ष्ण बुद्धि का स्वामी था. आगे चलकर यही बालक स्वामीनारायण कहलाया.

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घनश्याम पांडे या स्वामीनारायण या सहजानंद स्वामी हिंदू धर्म के स्वामीनारायण संप्रदाय के संस्थापक थे. अप्रैल, 1781 को भगवान श्रीराम की जन्मभूमि कही जाने वाली अयोध्या के पास छपिया नाम के गांव में उनका जन्म हुआ था. उस दिन रामनवमी थी.

जब नाम मिला नीलकंठवर्णी

पांच वर्ष की अवस्था में बालक ने पढ़ना-लिखना शुरू किया और आठ साल की उम्र में उनका जनेऊ संस्कार हुआ. इसके तुरंत बाद बालक ने शिक्षा में अपनी विलक्षण प्रतिभा दिखाई और अनेक शास्त्रों को पढ़ लिया. कुछ ही समय में वे घर छोड़कर निकले और पूरे देश की परिक्रमा कर ली. तब तक उनकी बहुत ख्याति हो चुकी थी. और लोग उन्हें नीलकंठवर्णी कहने लगे थे.

गुजरात में बना ठिकाना 
देश के कई राज्यों से होते हुए वे गुजरात आ गए. यहां उन्होंने बाकायदा अपने संप्रदाय की शुरुआत की और उनके बहुत से अनुयायी बन गए. उन्होंने उस दौर की कई कुरीतियों को खत्म करने में बड़ा योगदान दिया. तब गुजरात समेत देश में कई प्राकृतिक आपदाएं आया करती थीं. उस दौरान स्वामीनारायण ने अपने अनुयायियों को लोगों की मदद के लिए प्रेरित किया. इस सेवाभाव को देखकर लोग उन्हें भगवान के अवतारी मानने लगे.

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स्वामीनारायण ने अपने अनुयायियों को लोगों की मदद के लिए प्रेरित किया- सांकेतिक फोटो (flickr)


मंदिर के लिए शुरू हुआ श्रमदान 



मंदिर निर्माण उनके जीवनकाल के दौरान की बात है. खुद ब्रिटिश हुकूमत ने मंदिर के लिए जमीन दान की थी. मंदिर निर्माण भगवान स्वामीनारायण के अनुयायी आनंदानंद स्वामी की देखरेख में हुआ. इस दौरान भगवान स्वामीनारायण ने खुद भी श्रमदान किया.

वास्तुकला का अनूठा नमूना 

अहमदाबाद स्थित इस मंदिर को बर्मी टीक में उकेरा गया है, और हर मेहराब और ब्रैकेट को चमकीले रंगों से चित्रित किया गया है, जो हर जगह स्वामीनारायण मंदिरों की खास पहचान है. यहां पर स्वामीनारायण की रखी हुई कई मूर्तियां हैं, साथ ही उनकी व्यक्तिगत मूर्तियां भी यहां रखी हुई हैं. मंदिर में अलग-अलग हिस्से, अलग काम के लिए आरक्षित हैं. जैसे एक हिस्सा केवल महिलाओं के लिए है. यहां महिलाओं के ठहरने से लेकर उनके लिए अलग तरह की वर्कशॉप और पढ़ाई-लिखाई भी चलती रहती है. इसी तरह से एक खंड में तीर्थयात्रियों के ठहरने का शानदार बंदोबस्त है.

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इसके बाद से स्वामीनारायण मंदिर देश-विदेश में अपनी भव्यता और खूबसूरत काम के लिए ख्यात हो गए. उनके जीवनकाल में ही अहमदाबाद, मूली, भूज, जेतलपुर, धोलका, वडताल, गढ़डा, धोलेरा और जूनागढ़ में भव्य मंदिर बने. इन तमाम मंदिरों को स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना माना जाता है.

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स्वामीनारायण मंदिर देश-विदेश में अपनी भव्यता और खूबसूरत स्थापत्य के लिए जाने जाते हैं


सौ एकड़ में फैला मंदिर 

दिल्ली का अक्षरधाम मंदिर उनके अनुयायियों का ही बनावाया हुआ है.साल 2005 में बना ये मंदिर करीब 100 एकड़ जमीन पर फैला हुआ है. इसमें 200 पत्थर की मूर्तियां शामिल हैं. इस मंदिर में 234 नक्काशीदार स्तंभ, 9 अलंकृत गुंबद, गजेंद्र पीठ और भारत के दिव्य महापुरुषों की 2000 मूर्तियां शामिल हैं. साथ ही इस मंदिर के केंद्रीय गुंबद के नीचे 11 फुट ऊंची नारायण की प्रतिमा है. यहां की प्रत्येक मूर्ति पांच धातुओं से बनाई गई है.

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दुनिया के सबसे बड़े मंदिर का मिला खिताब

अक्षरधाम मंदिर नारायण सरोवर से घिरा हुआ है. यह एक झील है, जिसे 151 झीलों के पानी से भरा गया है. अपनी तमाम खूबियों के साथ 17 दिसंबर, 2007 के दिन गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की ओर से इस मंदिर को दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर घोषित किया गया था.

मानवजाति और धर्म के लिए सेवाभाव की प्रेरणा देते हुए साल 1830 में भगवान स्वामीनारायण का देहांत हो गया, लेकिन उनके मानने वाले आज दुनिया के कोने-कोने में हैं. साथ ही मंदिरों के माध्यम से भी उनका जीवन दर्शन देखा जा सकता है.
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