स्वीडिश वैज्ञानिक ने कहा, बिना मास्क और लॉकडाउन के भी हार सकता है कोरोना

स्वीडिश वैज्ञानिक ने कहा, बिना मास्क और लॉकडाउन के भी हार सकता है कोरोना
स्वीडन में कभी कोरोना को लेकर लॉकडाउन नहीं लगाया. इसके बाद भी अब वहां संक्रमण में कमी आती दिख रही है.

स्वीडन (Sweden) के एक महामारी विशेषज्ञ का कहना है कि बगैर मास्क (mask) पहने और स्कूल (School) खोलकर भी कोरोना को हराया जा सकता है, इसीलिए स्वीडन में लॉकडाउन लागू नहीं किया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 7, 2020, 8:13 PM IST
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कोरोना वायरस (Corona virus) का प्रकोप पूरी दुनिया में कायम है. भारत (Inida) में यह अब सबसे तेजी से बढ़ रहा है. इसके इलाज और वैक्सीन परीक्षणों के कई स्तर पर हैं इनमें  कुछ निर्णायक दौर में भी है, लेकिन इसके प्रसार को रोकने पर जो शोध चल रहे हैं वे भी अभी तक अंतिम निर्णय तक नहीं पहुंच सके हैं. लेकिन पिछले दिनों लॉकडाउन (Lockdown) जैसे उपाय न अपनाने वाला स्वीडन (Sweeden) अब कोरोना संक्रमण कम होने के कारण चर्चा में है. स्वीडन की सफलता के पीछे वहां के महामारी विशेषज्ञ एंडर्स टेग्नेल (Anders Tegnell) की दुनिया भर में चर्चा हो रही है.

चिंताजनक हाल में भी नहीं अपनाया लॉकडाउन
करीब एक महीने पहले स्वीडन के बारे में कहा जा रहा था कि कोरोना वायरस से लड़ने के प्रति जो उसका नजरिया है वह एक लापरवाह किस्म का है. स्वीडन ने लॉकडाउन न लगाने का फैसला किया था. इसमें न तो स्कूल बंद हुए, न ही रेस्तरां या बार, अप्रैल के महीने के अंत तक मरने वालों की संख्या ने सभी को चिंता में डाल रखा था. लेकिन स्वीडन के लोक स्वास्थ संस्था ने खास नीति अपना हुई थी और जल्द ही देश के प्रमुख महामारी विशेषज्ञ एंडर्स टेग्नेल देश के लोकप्रिय चेहरा बन गए.

आलोचना भी हुई इस फैसले की
ऐसा नहीं है कि स्वीडन में फिलहाल हालात पूरी तरह से काबू में हैं या ठीकठाक है. आज भी बहुत से वायरोलॉजिस्ट स्वीडन के लॉकडाउन जैसे उपाय न अपनाने की आलोचना कर रहे हैं. खुद एंडर्स मानते हैं कि इस समस्या पर समय पर प्रतिक्रिया देने में चूक हो गई और उनका मानना गलत था कि यह संक्रमण चीन के वुहान तक ही सीमित रहेगा. लेकिन उनके पास कोई क्रिस्टल बॉल नहीं थे.



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स्वीडन में मास्क औरलॉकडाउन जैेसे उपाय शुरू से ही नहीं अपनाए गए थे. सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)


लंबे समय में काम की साबित होगी यह नीति
एंडर्स का मानना है कि लोगों को केयर होम्स में देखभाल के लिए काफी कम काम किया गया. आज तक स्वीडन में कोरोना वायरस के कारण 5,700 से ज्यादा मौत हो चुकी है. इसे बाद भी एडर्स और स्वीडन लॉकडाउन लागू करने के पक्ष में नहीं हैं. उन्हें लगता है कि लंबे समय में यह नीति काफी प्रभावी साबित होगी. स्वीडन में पिछले कुछ दिनों में संक्रमण की संख्या में गिरावट देखने को मिल रही है.

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स्वीडन ने कोरोना रोकथाम के उपायों के तौर पर लोगों की केयर होम में जाने से रोक लगाई थी. एंडर्स ने पहले कहा था कि लॉकडाउन उनके देश में हजारों लोगों के केयर होम्स में मरने से नहीं रोक पाता.  हाल ही में उन्हों ने कहा कि ब्रिटेन जैसे देश में भी जहां लॉकडाउन सख्ती से लगाया था, मरने वालों की संख्या काफी ज्यादा रही है.

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स्वीडन में स्कूल, रेस्तरां, बार आदि भी बंद नहीं किए गए हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


स्वीडन में स्वास्थ्य सेवाओं पर लोगों का बहुत विश्वास है और वहां की सरकारी संस्थाएं भी स्वास्थ्य सेवाओं पर बहुत ज्यादा ध्यान देती हैं. लोग भी सरकार की ओर से जारी दिशानिर्देशों का सही तरीके से पालन करते हैं. यहां तक कि खुद टेग्नेल स्वीडन में काफी लोकप्रिय है. कई लोगों ने तो उनके चेहरा कर टैटू तक अपनी बाहों में बनवा रखा है.

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एक करोड़ दो लाख की आबादी वाले स्वीडन में अभी तक 82 हजार से ज्यादा कोरोना संक्रमण के मामले सामने आ चुके हैं, पिछले एक महीने से यहां नए मामलों की संख्या में गिरावट देखने को मिल रही है, लेकिन पिछले तीन चार दिनों में इस सिलसिला रुकता दिखाई दे रहा है. यह स्थिति स्वीडन में पड़ोस के देशों की तुलना में ज्यादा चिंताजनक बनती जा रही है.
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