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Lachchu Maharaj Birthday: वो मशहूर तबलावादक जो इमर्जेंसी में जेल गया

News18Hindi
Updated: October 16, 2019, 1:27 PM IST
Lachchu Maharaj Birthday: वो मशहूर तबलावादक जो इमर्जेंसी में जेल गया
बनारस में आज भी अपने मनमौजी अंदाज के लिए याद किए जाते हैं लच्छू महाराज

1975 में जब आपातकाल लगा तब लच्छू महाराज भी जेल गए. जहां वे मशहूर समाजवादी नेताओं जॉर्ज फर्नांडिस, देवव्रत मजुमदार और मार्कंडेय को तबला बजाकर सुनाया करते थे.

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  • Last Updated: October 16, 2019, 1:27 PM IST
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मशहूर तबलावादक लच्छू महाराज का आज 75वां जन्मदिन है. उनका जन्म 16 अक्टूबर 1944 को हुआ था. लच्छू महाराज को तबले से अगाध प्रेम था. बानगी यह कि कई बार जो वे सवेरे 10 बजे तबले के साथ रियाज को बैठते तो यह सीधा शाम को 6 बजे ही खत्म होता. पुराने बनारस की पतली-पतली गलियों वाले इलाके दालमंडी में दूसरी मंजिल पर उनका घर था. जहां की गलियां उनके इस फन से आबाद रहा करती थीं.

ठाठों में ठाठ बनारसिया
बहुत ही कम उम्र में उन्होंने तबला और बांसुरी बजाना शुरू कर दिया था. लच्छू महाराज का तबला किस कदर मोहने वाला था, इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वे जब आठ साल के थे तो वे मुंबई में तबला वादन कर रहे थे.

वहां मौजूद अहमद जान थिरकवा ने कहा था कि काश लच्छू मेरा बेटा होता. अहमद जान अपने जमाने के मशहूर तबला वादक थे. वैसे लच्छू महाराज पक्के बनारसी थे. आज भी वे अपने मनमौजी अंदाज के चलते बनारस में याद किए जाते हैं. उन्हें लोग इसलिए मनमौजी कहते थे क्योंकि वे सिर्फ अपने मन से ही तबला बजाते थे.

मशहूर तबलावादक लच्छू महाराज सुबह 10 बजे रियाज शुरू करते थे तो शाम छह बजे तक तबले पर ये क्रम जारी रखते थे


ऐसे ही एक बार उन्हें तबला वादन के लिए बनारस के विश्व विख्यात संकटमोचन संगीत समारोह में बुलाया गया था. लच्छू महाराज ने ऐसा तबला बजाया कि कुछ ही देर में वह जवाब दे गया, माने तबला बजाते-बजाते फट गया.

महाराज के लिए नया तबला लाने में काफी देर हो गई. तब तक उनकी लय टूट चुकी थी, फिर उन्होंने आगे बजाने से मना कर दिया. संगीत के जानकार कहते हैं कि बनावटी संगीत साधकों के विपरीत लच्छू महाराज सच्चे संगीत साधक थे. माना जाए तो वे संगीत में विपक्ष थे.
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तबले और जीवन में कोई फर्क नहीं था
1975 में जब आपातकाल लगा तब वे भी जेल गए. जहां वे मशहूर समाजवादी नेताओं जॉर्ज फर्नांडिस, देवव्रत मजुमदार और मार्कंडेय को तबला बजाकर सुनाया करते थे. यह उनके विरोध का तरीका था. लच्छू महाराज वक्त के पक्के थे. एक बार उन्हें तबला वादन के लिए आकाशवाणी बुलाया गया. लेकिन जिन महोदय ने बुलाया था, वे खुद 5 मिनट लेट से पधारे. लच्छू महाराज को यह जमा नहीं और वे बिना कार्यक्रम किए ही वापस आ गए.

लच्छू महाराज तवायफों के परिवार से आते थे. ये दर्द कहीं ना कहीं उन्हें सालता भी रहा


लच्छू महाराज तवायफों के परिवार से आते थे. एक बार लच्छू महाराज के बारे में बात करते ख्यात साहित्यकार व्योमेश शुक्ल ने कहा था, तवायफों के परिवार से आने वाले कलाकार नामचीन, प्रकांड विद्वान होने पर भी कहीं न कहीं शर्म का अनुभव करते रहे हैं, यह दर्द लच्छू महाराज के चेहरे पर भी दिखता था. वे प्रख्यात कत्थक नर्तक बिरजू महाराज के चाचा और मशहूर नृत्यांगना सितारा देवी के दामाद थे.



28 जुलाई 2016 को बनारस में उन्होंने अंतिम सांस ली. वह लंबी बीमारी से जूझ रहे थे. उन्हें पद्मश्री के लिए नामित किया गया था लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार करने से इंकार कर दिया. लच्छू महाराज का कहना था, "कलाकार को अवॉर्ड की जरूरत नहीं होती. उनको तबला वादन से मिलने वाली दर्शकों की शाबाशी ही सबसे बड़ा अवॉर्ड है. दर्शकों के प्यार से ज्यादा कुछ नहीं."
गोविंदा के भी गुरु थे लच्छू महाराज


एक्टर गोविंदा को तबला बजाना लच्छू महाराज ने ही सिखाया था. लच्छू महाराज को गोविंदा ने बचपन में ही अपना गुरु मान लिया था. जब लच्छू महाराज मुंबई जाते तो वे गोविंदा के घर में ही रुकते थे.


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First published: October 16, 2019, 1:24 PM IST
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