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    चीन से 81 मील दूर बसे ताइवान ने समय से पहले भांपा था कोरोना का खतरा, जाने वो 10 बातें जिससे वो हुआ सेफ

    ताइवान के आपदा प्रबंधन विभाग ने कोरोना के खतरे को सबसे पहले भांपा और तुरंत सक्रिय हो गया
    ताइवान के आपदा प्रबंधन विभाग ने कोरोना के खतरे को सबसे पहले भांपा और तुरंत सक्रिय हो गया

    जब चीन के वुहान शहर में कोरोना फैलना शुरू हुआ, तब दुनिया में कोई देश जो सबसे पहले हरकत में आया, वो उससे 81मील दूर बसा देश ताइवान था. वो समय से पहले ही एक्टिव हो गया. इसके लिए उसने कई सालों से एक सिस्टम भी बना रखा है. क्या ये सिस्टम और वो तरीके, जिससे उसने खुद को करीब सुरक्षित कर लिया

    • News18Hindi
    • Last Updated: March 27, 2020, 6:22 PM IST
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    ताइवान की दूरी चीन से महज 81 मील है. ये माना जा रहा था कि सबसे निकटवर्ती पड़ोसी होने के कारण वो कोरोना की जद में होगा और उससे बहुत बुरी तरह प्रभावित भी हो सकता है. इसकी एक वजह ये भी थी कि ताइवान से लोग लगातार चीन जाते-आते रहते हैं. वहां नौकरी भी करते हैं. वुहान से ताइवान रोज दो से तीन बार हवाई सेवा आती जाती है. इसके बाद भी ताइवान अब तक आमतौर पर बचा है. ऐसा नहीं है कि उसके यहां कोरोना के संक्रमित मरीज नहीं हैं लेकिन उनकी संख्या बहुत कम है.

    यहां ये बताना भी जरूरी है कि Johns Hopkins Coronavirus COVID-19 Global Cases map के अनुसार ताइवान में अब तक कोरोना वायरस से 267 लोग संक्रमित हुए. जिसमें दो मौत हो गई जबकि 29 लोगों का उपचार हो गया.

    वैसे ये हैरानी की बात कही जाएगी कि जो कोरोना वायरस इस समय पूरी दुनिया में आतंक का कारण बना हुआ है. दुनियाभर के ज्यादातर देश लाकडाउन के जरिए खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, उसके बीच चीन का ये छोटा सा पड़ोसी कोरोना पर कमोवेश कंट्रोल की स्थिति में है.



    1. त्वरित कार्रवाई
    ताइवान चूंकि चीन का पड़ोसी है, लिहाजा जैसे ही वुहान में कोरोना का कहर फैलना शुरू हुआ. वो सतर्क हो गया. उसने तुरंत सतर्कता बरती. चीन और खासकर वुहान से आनी वाली फ्लाइट्स की मुस्तैदी से चेकिंग शुरू कर दी.

    2.व्यापक स्क्रीनिंग
    वहां से आने वाले हर शख्स की पूरी तरह टेस्टिंग की गई. जहां जरूरत हुई वहां उस शख्स को तुरंत क्वारेंटाइन कर दिया गया.चीन से आने वाला कोई शख्स यूं ही निकल पाया. बाद में जब दुनिया की दूसरी जगहों पर कोरोना की खबरें आनी शुरू हुईं तो उन्होंने इस मामले में और सख्ती दिखाई. कुछ उड़ानें भी सीमित की.

    मध्य जनवरी में ही जब सारी दुनिया कोरोना को लेकर आंख बंद करके बैठी थी, तभी ताइवान ने अपने एयरपोर्ट्स पर सघन चेकिंग और टेस्टिंग का काम शुरू कर दिया धा


    3. कांटैक्ट ट्रेसिंग
    ताइवान में जब भी कोई विदेश से आता है तो उसको सरकार एयरपोर्ट पर एक मोबाइल नंबर देती है, जिससे उसे ट्रैक किया जाता है. इसी तरह उनके अपने नागरिकों के लिए भी यही तरीका इस्तेमाल होता है. उनकी ये व्यवस्था बहुत शानदार है. उससे वो हर शख्स को ट्रेस कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर मदद भी कर सकते हैं. इसी जरिए कई बार परिवार और उसके साथी भी ट्रेस किये जाते हैं.

    4. पूरी तरह से टेस्टिंग
    ताइवान में कई सालों से उनके अपने नागरिकों के साथ विदेश के लोगों की टेस्टिंग हो रही है. इससे शायद ही कोई बच पाता है. इससे वो अपने लोगों के स्वास्थ्य पर नजर रखते हैं.

    ताइवान का हेल्थ डाटा सिस्टम सबसे शानदार है. साध ही वो अपने नागरिकों के साथ विदेश से आने वाले हर शख्स की ट्रेसिंग भी करता है. कोरोना फैलने से पहले उसे अपने डाटा इस्तेमाल से बहुत मदद मिली


    5. डाटा का भरपूर इस्तेमाल
    अपने हर नागरिक के डाटा का जितना बेहतरीन इस्तेमाल ताइवान करता है, उसे पूरी दुनिया को सीखना चाहिए. वहां के हर नागरिक का हेल्थ केयर डेटा रखा जाता है. अगर वो विदेश जाता है, तो भी ये उसके डाटा में रिकॉर्ड हो जाता है. यहां तक कि अगर वो विदेश की यात्रा में कहां जा रहा है, ये डाटा भी वो रखते हैं. इसे बहुत अच्छी तरह रखने, एनालाइज करने का काम करते हैं. इसका इस्तेमाल उन्होंने कोविड-19 की सतर्कता के तौर पर किया. उसके पास नेशनल हेल्थ इंश्योरेंस का बहुत बड़ा डाटा बेस है.

    6. तकनीकी का भरपूर इस्तेमाल
    आप ऊपर लिखी बातों को पढ़कर समझ गए होंगे कि ताइवान बेशक छोटा सा देश है लेकिन ह्यूमन हेल्थ मैनेजमेंट के साथ आपदा प्रबंधन में तकनीक का इस्तेमाल करना उसे बखूबी आता है. ये सारा इंतजाम ताइवान में वर्ष 2003 में वहां चीन से आई सार्स फ्लू बीमारी के बाद शुरू किया गया. इसका श्रेय वहां के नवयुवकों को देना चाहिए, जिन्होंने ताइवान को इस तकनीक से लैस करने का काम किया.

    7. महामारी बचाव प्लान
    स्टनफर्ड हेल्थ पॉलिसी से जुड़े जैसन वांग, जो स्टनफर्ड मेडिसिन कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर हैं, उन्होंने स्टनफर्ड की आधिकारिक साइट पर कहा कि वर्ष 2003 के सार्स प्रकोप के बाद ताइवान महामारी बचाव योजना बनाना सीख चुका है. तब ताइवान सरकार ने नेशनल हेल्थ कमांड सेंटर (एनएचसीसी) स्थापित किया, ये आपदा प्रबंधन सेंटर के एक हिस्से के तौर पर काम करने लगा. नेशनल हेल्थ कमांड सेंटर में ही एक सेंट्रल एपिडेमिक कमांड सेंटर भी है, जो जनवरी में ही सक्रिय हो चुका था,

    कहा जा सकता है कि कोरोना को लेकर वर्ल्ड हेल्थ आर्गनाइजेशन से पहले ही ताइवान सक्रिय होकर अपने बचाव के काम में जुट चुका था


    8. हर आपदा से पहले ही सक्रियता
    आपदा प्रबंधन सेंटर बड़ी आपदा पर तुरंत सतर्क में ही नहीं आता बल्कि आपरेशनल कमांड की तरह सक्रिय होकर सीधे सारे विभाग से तालमेल करने लगता है. दरअसल इसे जिस तरह बनाया गया है, उसमें इसका काम यही है कि आपदा का अंदेशा होते ही ये उसे पहले से सूंघ ले और हरकत में आ जाए.

    9. तुरंत जरूरी चीजों का उत्पादन
    स्टनफर्ड रिपोर्ट ही ये भी बताती है कि जनवरी से ही करीब पांच हफ्तों तक ताइवान तेजी से 124 जरूरी सामानों के उत्पादन और उनके क्रियान्यवन में जुट गया. इस मामले में उन्होंने नीतियों और सीमाओं से परे जाकर भी काम किया, क्योंकि उन्हें लग रहा था एक सीमा में रहकर सबकुछ नियंत्रित करना शायद काफी नहीं होगा.

    10. वायु और समुद्री प्वांइट्स पर कंट्रोल
    जनवरी के दूसरे हफ्ते से ताइवान के महामारी कमांड सेंटर ने जिन 124 बातों पर तुरत-फुरत एक्शन दिखाया, उसमें एयर और समुद्र सीमा पर नियंत्रण भी था. साथ ही जनता तक सही गलत सूचनाएं पहुंचाई गईं ताकि वो गलत जानकारियों से बहके नहीं. तमाम पड़ोसी और अन्य देशों से भी लगातार संपर्क बनाकर रखा.

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