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चीन से परेशान ताइवान अब हुआ आक्रामक, उतारे 'ब्रेव ईगल' लड़ाकू विमान

ताइवान घरेलू स्तर पर ब्रेव ईगल जेट को अत्याधुनिक बनाने की तैयारी में है

ताइवान घरेलू स्तर पर ब्रेव ईगल जेट को अत्याधुनिक बनाने की तैयारी में है

चीनी हमले की आशंका में ताइवान (Taiwan under chinese threat) भी तैयार हो गया है. उसने न केवल अमेरिका से फाइटर जेट (America fighter jet) सौदा किया, बल्कि घरेलू स्तर पर ब्रेव ईगल जेट (Brave Eagle jet) बना रहा है.

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    ताइवान (Taiwan) और चीन (China) के बीच साउथ चाइना सी (South China Sea dispute) को लेकर तनाव गहराता जा रहा है. साथ ही हांगकांग के बाद चीन ताइवान पर भी कब्जे की तैयारी में है. उसने वहां तट पर मरीन ब्रिगेड के तहत लगभग 40 हजार सैनिक तैनात किए हैं. इस बीच ताइवान ने भी चीन से निपटने के लिए तैयारी शुरू कर दी है. वो अमेरिका से F-16 फाइटर जेट का बड़ा सौदा कर चुका है, जिसके तहत 90 विमान ताइवान आएंगे. साथ ही घरेलू तौर पर वो ब्रेव ईगल (Brave Eagle) जेट के निर्माण को बढ़ावा दे रहा है. ये जेट भी काफी ताकतवर माना जा रहा है.

    क्या खासियत है ताइवान के जेट की
    ब्रेव ईगल जेट ताइवान का अपना सैन्य जेट है, जो एरोस्पेस इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन तैयार कर रहा है. ये ट्रेनर जेट से आधुनिक है और फ्रंटलाइन फाइटर जेट है. यूरेशियन टाइम्स में आई एक रिपोर्ट में अमेरिकी युद्ध संवाददाता डेविड एक्स के हवाले से जानकारी दी गई है.

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    इसके मुताबिक ताइवान के पास फिलहाल 300 लड़ाकू विमान हैं. इसमें घरेलू विमान के साथ ही अमेरिकी जेट F-16 और फ्रेंच मिराज 2000 जेट शामिल हैं. यानी ज्यादातार जेट विदेशी हैं. यही वजह है कि ताइवान अब घरेलू स्तर पर भी लड़ाकू विमानों को आधुनिक बनाने की सोच रहा है.

    ये ट्रेनर जेट से आधुनिक है और फ्रंटलाइन फाइटर जेट है (सांकेतिक फोटो)
    ये ट्रेनर जेट से आधुनिक है और फ्रंटलाइन फाइटर जेट है (सांकेतिक फोटो)


    बनाया जा रहा और मॉडर्न
    यही देखते हुए इसमें दो सीट कॉकपिट, नई एवियोनिक्स, एक मोटा विंग, अधिक ईंधन क्षमता और एक छोटा रडार जोड़ा गया है. इसमें और भी कई फीचर्स हैं, जो फिलहाल मीडिया में नहीं आए हैं. इसे एक आयरिश कंपनी इटॉन कॉर्पोरेशन की मदद से रीडिजाइन किया जा रहा है. कुछ हिस्से ब्रिटिश कंपनी मार्टिन बेकर बना रहा है लेकिन जेट का लगभग 55% हिस्सा ताइवान ही बनाएगा.

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    घरेलू उत्पादन पर जोर 
    बता दें कि पहले ताअवान अपने ब्रेव ईगल को दूसरे देशों के विमानों से बदलने की सोच रहा था लेकिन फिर ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन ने घरेलू विमानों को ही मॉडर्न बनाने पर जोर दिया. उनका मानना है कि इससे ताइवान न केवल सैन्य तौर पर मजबूत होगा, बल्कि इससे घरेलू उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा. यही देखते हुए ताइवान ने नए ट्रेनिंग जेट के लिए 2.2 डॉलर बिलियन का बजट पास किया. जल्दी ही छोटे पैमाने पर इसका प्रोडक्शन शुरू होगा, और बड़े स्तर पर प्रोडक्शन मार्च 2023 से शुरू हो जाएगा.

    ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन ने घरेलू विमानों को ही मॉडर्न बनाने पर जोर दिया (Photo-publicdomainpictures)


    अमेरिका से किया रक्षा सौदा
    अब फिलहाल के हालात अलग हैं. चीन लगातार ताइवान पर कब्जे की गतिविधियां तेज कर रहा है. कोरोना के दौरान ही हांगकांग पर पूरी तरह नियंत्रण को देखते हुए इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि चीन सैन्य बल पर भी ताइवान पर कब्जे की कोशिश कर सकता है. ताइवान स्ट्रेट के पास उसका लगातार युद्धाभ्यास भी इसी तरफ संकेत करता है. ऐसे में ताइवान ने सोमवार को अमेरिका की हथियार निर्माता कंपनी लॉकहीड के साथ 62 अरब डॉलर के F-16 फाइटर जेट खरीदने का सौदा किया. माना जा रहा है कि इसमें ताइवान ने 62 अरब डॉलर लगाए हैं और लगभग 10 सालों में ये सारे जेट वहां पहुंचेंगे.

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    अमेरिका क्यों है इनवॉल्व
    अमेरिकी सौदे के साथ ताइवान सैन्य रूप से काफी ताकतवर बन जाएगा. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह से चीन के पड़ोसियों को मजबूत करके अमेरिका अपने तरीके से चीन को कमजोर बना रहा है. बता दें कि अमेरिका ने खुद अपने एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस रोनाल्‍ड रीगन को साउथ चाइना सी में भेजा है. यहां पर अमेरिकी नेवी ने जोरदार युद्धाभ्यास भी किया. अमेरिका का कहना है कि चीन कोरोना के कारण फंसे देशों की हालत का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है और वो ये नहीं होने देगा.

    अमेरिकी सौदे के साथ ताइवान सैन्य रूप से काफी ताकतवर बन जाएगा (सांकेतिक फोटो)
    अमेरिकी सौदे के साथ ताइवान सैन्य रूप से काफी ताकतवर बन जाएगा (सांकेतिक फोटो)


    चीन भी बढ़ा रहा ताकत
    इस बीच चीन भी खुद को सैन्य रूप से काफी मजबूत बना रहा है. भारत, ताइवान और अमेरिका के साथ लगातार विवाद के बीच हाल ही में उसने अपने एक खास फाइटर जेट की धौंस जमाई. चेंगदू J-20 (Chengdu J-20) नाम के जेट के बारे में चीन ने तब बात की, जब भारत में राफेल की चर्चा हो रही थी. चीन अपने इस विमान की खूबियों का बखान करते हुए बार-बार बताता है कि ये एशिया का सबसे पहला स्टेल्थ फाइटर जेट है. यानी वो जेट जिसे रडार, इन्फ्रारेड, सोनार और अन्य पकड़ने वाले तरीकों से पकड़ना लगभग नामुमकिन है.

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    वैसे चीन के इस दावे में दम नहीं माना जा रहा है. विशेषज्ञों के मुताबिक रडार से छिपे रहने वाला विमान कोई भी नहीं हो सकता और बहुत छिपकर भी ये पकड़ाई में आ ही जाता है. इस बीच ये चर्चा भी है कि हर चीज की नकल करने वाले चीन ने चेंगदू को भी अमेरिका के जेट F-35 की कॉपी करके बनाया. इस बारे में विदेशी एक्सपर्ट इसलिए भी यकीन से कह रहे हैं क्योंकि चीन पहले से ही गुप्त सूचनाएं और जानकारी चुराने के लिए संदेह में घिरा रहा है.

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