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38 हजार वोट भी नहीं हासिल कर सके ट्विटर पर 6.5 लाख फॉलोवर वाले तजिंदर बग्गा

News18Hindi
Updated: February 12, 2020, 3:40 PM IST
38 हजार वोट भी नहीं हासिल कर सके ट्विटर पर 6.5 लाख फॉलोवर वाले तजिंदर बग्गा
हरिनगर से बीजेपी प्रत्याशी तजिंदर पाल सिंह बग्गा चुनाव हार गए हैं.

वकील प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) से मारपीट के बाद सुर्खियों में आए तजिंदर बग्गा (Tajinder Pal Singh Bagga) सोशल मीडिया पर सक्रियता की वजह से पहचाने जाते हैं.

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  • Last Updated: February 12, 2020, 3:40 PM IST
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दिल्ली विधानसभा चुनावों में जब टिकटों का बंटवारा चल रहा था तब एक नाम को लेकर काफी हो-हल्ला मचा. ये नाम था बीजेपी कैंडिडेट तजिंदर पाल सिंह बग्गा (Tajinder Pal Singh Bagga) का. बीजेपी ने बग्गा को हरिनगर सीट से प्रत्याशी बनाया था जो पहले बीजेपी का गढ़ मानी जाती थी. 1993 में हुए चुनाव में इस सीट पर बीजेपी ने बाजी मारी. फिर लगातार 2008 तक जीतती रही. यहां से बीजेपी के टिकट पर हरशरण सिंह बल्ली लगातार चार बार विधायक बने. लेकिन 2013 में आम आदमी पार्टी के जगदीप सिंह ने जीत हासिल की और फिर 2015 में भी वो जीते. इस बार के चुनाव में आप ने राजकुमारी ढिल्लन को प्रत्याशी बनाया था जिन्होंने बग्गा से सीट छीन ली. तजिंदर पाल बग्गा को 37956 वोट मिले जबकि जीतने वाली प्रत्याशी राजकुमारी ढिल्लन को 58087 वोट मिले. तजिंदर बग्गा के ट्विटर पर 6.4 लाख फॉलोवर हैं. आखिर बग्गा क्यों हारे. आइए जानते हैं उनकी हार के बिंदुवार कारण-

1-सोशल मीडिया स्टार की छवि
तजिंदर पाल सिंह बग्गा पहली नेशनल मीडिया की सुर्खियों में 2011 में आए थे जब उन्होंने वकील प्रशांत भूषण के साथ मार-पीट की थी. तब उन्होंने ट्वीट किया था कि ' वो मेरा देश तोड़ना चाहते हैं, मैंने उनका सिर तोड़ने की कोशिश की. सोशल मीडिया विशेष तौर पर ट्विटर पर बग्गा बेहद सक्रिय हैं और शायद यही वजह थी कि बीजेपी ने उन्हें टिकट दिया. लेकिन माना जा रहा है कि सोशल मीडिया से इतर ग्राउंड पर लोगों का वो वैसा समर्थन नहीं जुटा सके.

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2-गंभीर उम्मीदवार नहीं
बग्गा की उम्मीदवारी को लेकर सोशल मीडिया पर काफी तीखी प्रतिक्रियाएं भी आई थीं. बग्गा की छवि सोशल मीडिया पर गंभीर नहीं है. ऐसे में ये सवाल उठ रहे थे कि वो कितने गंभीर नेता साबित होंगे?

3-देर से उम्मीदवारी
बग्गा के प्रदर्शन को लेकर और बात देर से उम्मीदवारी मिलना भी रही. सामान्य तौर पर अगर किसी प्रत्याशी को अपने क्षेत्र में प्रचार का ज्यादा समय मिलता है तो उसे लोगों के बीच पहुंचने में ज्यादा आसानी होती है. बीजेपी की तरफ से बग्गा के केंडिडेचर की घोषणा देर से हुई. इसका भी उन्हें नुकसान मिला. इसके अलावा इस क्षेत्र में बीजेपी के कई पुराने नेता भी सक्रिय रहे हैं. तो टिकट को लेकर अंदरखाने मनमुटाव की बातें भी विधानसभा में चल रही थीं.

4-आप का काडर ज्यादा मजबूत
अन्ना आंदोलन के बाद से ही राजधानी दिल्ली में आम आदमी का काडर वक्त के साथ मजबूत होता चला गया है. पहले जो लोग आंदोलन से जुड़े थे फिर वो बाद में पार्टी से जुड़ते चले गए. साथ ही आम आदमी पार्टी की तरफ से सोशल मीडिया का भी जमकर इस्तेमाल किया जाता है.

आप प्रत्याशी राजकुमारी ढिल्लन.


5-विपक्षी उम्मीदवार भी सीख-राजकुमारी ढिल्लन
दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा तिहाड़ जेल परिसर दिल्ली के हरिनगर विधानसभा क्षेत्र में ही आता है. राष्ट्रीय राजधानी के इस इलाके में करीब 40 प्रतिशत सिख हैं इसके अलावा पंजाबी वोटर्स की बड़ी संख्या है. आप प्रत्याशी राजकुमारी ढिल्लन पहले कांग्रेस में थी. 57 साल की राजकुमारी ढिल्लन की छवि इलाके में सामाजिक कार्यकर्ता की है. राजकुमारी दिल्ली के रईस प्रत्याशियों में गिनी जा रही हैं. उन्होंने चुनाव आयोग में जो हलफनामा दिया था उसमें संपत्ति 51 करोड़ बताई थी. माना जा रहा है कि उन्होंने बग्गा के सामने बड़ा चुनाव अभियान छेड़ा और ज्यादा पैसे खर्च किए. ढिल्लन लोगों के बीच खासी मशहूर हैं. जब उन्हें टिकट दिया गया तो पार्टी के विधायक जगदीप सिंह ने इस्तीफा दे दिया था.
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First published: February 11, 2020, 4:37 PM IST
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