जानिए, कैसी होगी देश की नई संसद और कौन है इसका आर्किटेक्ट

जल्द ही नए संसद परिसर का निर्माण शुरू होने जा रहा है
जल्द ही नए संसद परिसर का निर्माण शुरू होने जा रहा है

साल 2026 में देश लोकसभा के आकार पर कोई फैसला ले सकता है. हो सकता है कि आबादी का पूरा प्रतिनिधित्व करने के लिए सांसदों की संख्या बढ़ाई जाए, ऐसे में मौजूदा संसद भवन (parliament house of India) छोटा पड़ेगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 18, 2020, 2:16 PM IST
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जल्द ही नए संसद परिसर का निर्माण शुरू होने जा रहा है. इसका ठेका टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड (Tata Projects Limited) को मिला है, जो लगभग 861.90 करोड़ रुपए की लागत में संसद की नई इमारत बनाएगी. ये इमारत मौजूदा संसद भवन के नजदीक ही बनेगी. लगभग 21 महीनों में इसके पूरा होने की उम्मीद की जा रही है. नई बिल्डिंग में संयुक्त सेशन चलने पर भी 1,350 सांसदों के बैठने के लिए अच्छी-खासी जगह होगी. जानिए, किन खूबियों से लैस होगा नया संसद भवन.

टाटा को मिला भवन बनाने का ठेका
संसद भवन के एक नए परिसर का काम आगे बढ़ चला है. इसके लिए टाटा प्रोजेक्ट्स को टेंडर मिला है. बताया जा रहा है कि कई दूसरी कंपनियों ने भी टेंडर भरा लेकिन सबसे कम बोली टाटा ने ही लगाई, जो कि 861.90 करोड़ रुपए है. इसमें नई इमारत के निर्माण के साथ-साथ मौजूदा संसद भवन के रखरखाव का काम भी शामिल होगा. माना जा रहा है कि सांसदों के बैठने के लिए पर्याप्त जगह न होने के कारण नई इमारत की बनवाई के बारे में सोचा गया.

सांसदों के बैठने के लिए पर्याप्त जगह न होने के कारण नई इमारत के बारे में सोचा गया

नया परिसर काफी खूबियां लिए होगा


केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के मुताबिक इमारत करीब 65 हजार वर्ग मीटर में फैली होगी, जिसमें 16921 वर्ग मीटर का इलाका अंडरग्राउंड भी होगा. इस तरह से बिल्डिंग में भूमिगत को मिलाकर ग्राउंड फ्लोर और दो और मंजिलें भी होंगी. हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में नए संसद परिसर के बारे में विस्तार से बताया गया है. इसके मुताबिक नई डिजाइन त्रिकोणीय परिसर को लिए हुए होगी, जिससे तीन रंगों की किरणें आसमान में छाई लगेंगी.

सांसदों के बैठने की व्यवस्था ज्यादा आरामदेह बनाई जा रही है. इसके तहत टू-सीटर बेंचें होंगी, ताकि किसी भी सांसद को आराम से बैठने की पूरी गुंजाइश हो. फिलहाल कई बार सीटें फुल होने पर सांसदों को सिकुड़कर भी बैठना पड़ जाता है. नई इमारत ये दिक्कत दूर कर देगी.

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पूरे राजपथ पर दिखेगा असर
फिलहाल प्रस्तावित योजना के अनुसार कई फेरबदल हो सकते हैं. इसमें साउथ ब्लॉक और नॉर्थ में भी बदलाव शामिल हैं. जैसे प्रधानमंत्री का आवास और कार्यालय साउथ ब्लॉक के पास स्थानांतरित हो सकता है, वहीं उप-राष्ट्रपति का नया घर नॉर्थ ब्लॉक के पास चला जाएगा. इन ब्लॉक्स में बदलाव से पूरे राजपथ का नक्शा बदल सकता है.

बदलाव से पूरे राजपथ का नक्शा बदल सकता है


क्यों जरूरी है नई इमारत
वैसे ये जानना जरूरी है कि आखिर क्यों इतने बड़े स्तर पर निर्माण की जरूरत पड़ रही है. दरअसल साल 2026 में देश लोकसभा के आकार पर कोई फैसला ले सकता है. बता दें कि आबादी का पूरा प्रतिनिधित्व करने के लिए सांसदों की संख्या बढ़ाई भी जा सकती है. इस बारे में राजनीतिक विशेषज्ञों का भी यही मानना है कि साल 2026 में देश की जितनी आबादी होगी, उसे रिप्रेजेंट करने के लिए 848 सदस्यों की जरूरत हो सकती है.

साल 2019 में ही भूतपूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इनकी मौजूदा संख्या को 545 से बढ़ाकर लगभग दोगुना करने की बात की थी. इसपर अगले पांच सालों बाद कोई बात होगी. हालांकि इस संभावना को ध्यान में रखते हुए ही नई संसद इमारत का फैसला लिया गया.

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संसद तैयार करेगा गुजराती वास्तुविद 
नए संसद परिसर की कई खासियतों में से एक उसका वास्तुविद भी है. बिमल पटेल नाम का ये आर्किटेक्ट गुजरात से है. पटेल सेंट्रल विस्टा के रिडिजाइन के प्रभारी हैं. वे बताते हैं कि नई इमारत में बैठने के लिए अलग से एक लाउंज भी हो सकता है. फिलहाल जो पार्लियामेंट बिल्डिंग है, उसमें सेंट्रल हॉल को लाउंज की तरह इस्तेमाल में लाया जाता है. वास्तुविद पटेल के मुताबिक लोकसभा, राज्यसभा और एक खुला-आंगन-सा होगा, जिसके चारों ओर एक लाउंज होगा. नए भवन में कई दिलचस्प प्रयोग दिख सकते हैं. जैसा कि खुद इसके वास्तु प्रभारी पटेल कहते हैं कि यहां सेंट्रल हॉल में अलग-अलग आकार और तरीके की खिड़कियां होंगी. ये खिड़कियां असल में देश की विविधता को दिखाएंगी.

इमारत के डिजाइन के लिए जर्मन संसद की भी स्टडी की गई (Photo-pikist)


विदेशी संसदों का बारीकी से किया अध्ययन
सांसदों के बैठने की व्यवस्था को समझने के लिए पटेल और उनकी टीम ने कई देशों की संसद को स्टडी किया. इसमें जर्मनी, क्यूबा, इजिप्ट और सिंगापुर शामिल हैं. बता दें कि इन देशों का संसद भवन अपने खुले-खुले स्वरूप के लिए जाना जाता है. अब चूंकि भारत में सांसद अक्सर तंग जगह और सिकुड़कर बैठने जैसी बातें करते आए हैं, लिहाजा नया डिजाइन इन देशों की संसद से प्रेरित और खुला हुआ होगा. संयुक्त सेशन होने पर भी सांसदों के पास बैठने की पूरी जगह होगी. साथ ही उनके लिखने के लिए डेस्क भी होगी. वर्तमान संसद भवन में पहली दो कतारों के पास ही डेस्क है, जबकि पीछे केवल सीटें हैं.

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क्या है वर्तमान संसद भवन की खासियत
मौजूदा संसद भवन के बारे में माना जाता है कि ये चौंसठ योगिनी मंदिर के स्वरूप से प्रेरित है. अंग्रेजी दौर में बने इस भवन का शिलान्यास 12 फरवरी 1921 को ड्यूक आफ कनाट (Duke of Connaught) ने किया था. जबकि इसकी शुरुआत तत्कालीन वायसराय लार्ड इरविन ने 18 जनवरी 1927 को की थी. इसका डिजाइन ब्रिटिश आर्किटेक्ट एडविन लुटियन (Edwin Lutyens) और हर्बर्ट बेकर (Herbert Baker) ने तैयार किया था. इसके आर्किटेक्ट भले ही विदेशी थे लेकिन निर्माण भारत की ही सामग्री से हुआ. बनाने वाले श्रमिक भारतीय ही थे. इसे तब से ही की कुछ शानदार इमारतों में से एक माना जाता रहा. हालांकि वक्त के साथ इसमें जगह की कमी जैसी शिकायतें आने लगीं.
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