जानें, कैसा संगठन है तहरीक-ए-लब्बैक, जिसे PAK में बैन किया गया

तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान कट्टरपंथी संगठन है (Photo- news18 English via Reuters)

तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान कट्टरपंथी संगठन है (Photo- news18 English via Reuters)

तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) की मांग है कि इमरान सरकार फ्रांस के राजदूत को देश से निकाल दे. फ्रांस में पैगंबर मोहम्मद का कार्टून छपने के चलते ये धार्मिक पार्टी फ्रांस से नाराज है.

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  • Last Updated: April 16, 2021, 11:49 AM IST
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साल 1997 के आतंकवाद विरोधी कानून के नियम 11-बी के तहत पाकिस्तान के संगठन तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) पर बैन लग चुका है. इसी बुधवार को लगी इस पाबंदी के पीछे संगठन की हालिया आतंकी कार्रवाई बताई जा रही है. दरअसल इस समूह के लोग लगातार सुरक्षा बलों से हिंसक झड़प कर रहे थे, जिसमें कई जानें गईं और लोग घायल हो रहे थे.

पाकिस्तान के गृह मंत्री शेख रशीद अहमद ने संगठन पर बैन की घोषणा करते हुए इसके कारणों का खुलासा किया. गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक टीएलपी की ओर से बीते तीन दिन से जारी हिंसक प्रदर्शनों के दौरान काफी नुकसान हुआ. इस दौरान 2000 से ज्यादा लोग गिरफ्तार हुए. इन सारे लोगों के खिलाफ आतंकवाद विरोधी कानून के तहत केस दर्ज हुआ. रिपोर्ट के अनुसार इस हिंसा में 2 पुलिस अधिकारियों की मौत हो गई, जबकि 340 से ज्यादा घायल हुए.

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पाकिस्तान में लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं- सांकेतिक फोटो (Photo- news18 English via PTI)


क्या है संगठन की मांग
धार्मिक संगठन के लोग पैगंबर मोहम्मद का कार्टून प्रकाशित करने के मामले में फ्रांस के राजदूत को पाकिस्तान से हटाने की मांग कर रहे हैं. यहां तक कि समर्थकों ने इसके लिए पाकिस्तान सरकार का अप्रैल 20 तक का नोटिस दे रखा है. लेकिन इस बीच बहुत से समर्थक हिंसा पर उतर आए. प्रदर्शनों से बीच ही पाकिस्तान सरकार ने पार्टी के नए प्रमुख साद हुसैन रिजवी हिंसक बयान देने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. इससे प्रदर्शनों को और हवा मिली. फिलहाल दनादन गिरफ्तारियों के बाद सड़कें खाली कराई जा चुकी हैं और पुलिस चप्पे-चप्पे पर नजर रखे हुए हैं.

अब ये तो समझ चुके हैं कि आखिर ये धार्मिक पार्टी क्या चाहती है. इस बीच पार्टी के बारे में थोड़ी जानकारी लेते हैं. तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान कट्टरपंथी इस्लाम को मानने वालों का संगठन है, जिसकी नींव खादिम हुसैन रिजवी ने साल 2017 में रखी थी. वे धार्मिक विभाग के कर्मचारी थे और लाहौर की एक मस्जिद के मौलवी थे.

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खादिम हुसैन रिजवी ने साल 2017 में पार्टी शुरू की (Photo- news18 English via Reuters )




यहां तक सबकुछ शांत था लेकिन धार्मिक संगठन की स्थापना एक घटना से हुई. साल 2011 में पंजाब पुलिस के एक गार्ड ने पंजाब के गर्वनर की हत्या कर दी. इससे लोगों में गार्ड के खिलाफ खासा आक्रोश जाग गया, वहीं रिजवी ने गार्ड का खुला समर्थन किया. इस समर्थन के कारण रिजवी को पंजाब के धार्मिक विभाग की नौकरी तक गंवानी पड़ गई.

नौकरी जाने के बाद भी रिजवी ने आंदोलन जारी रखा और गार्ड मुमताज कादरी की फांसी के खिलाफ मुहिम छेड़ दी. इसी बीच मौलाना रिजवी ने अपने खुद के धार्मिक संगठन का एलान कर दिया. तब उन्होंने पार्टी के दो नाम सोचे थे- तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान या फिर रसूल अल्लाह. धीरे-धीरे टीएलपी की शोहरत बड़ती चली गई. यहां तक कि सरकारी कानूनों में उसका दखल होने लगा.

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फ्रांस इस्लामिक कट्टरपंथ के खिलाफ लगातार एक्शन ले रहा है- सांकेतिक फोटो


साल 2018 में पाकिस्तान में आम चुनावों के दौरान ये पार्टी पांचवी बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी. इस समय भी देखें तो पार्टी के तीन मेंबर विधानसभा में हैं. साल 2020 में पार्टी के संस्थापक और प्रमुख सदस्य खादिम हुसैन रिजवी का निधन हो गया, जिसके बाद भी पार्टी कमजोर नहीं पड़ी, बल्कि उसे उनके बेटे साद रिजवी ने संभाल लिया. हाल ही में इसी युवा नेता ने बयान दिया कि अगर पाकिस्तान फ्रांस के राजदूत को नहीं निकालता और प्रदर्शन होंगे. इसके बाद ही भड़काऊ बयान देने के आरोप में उनकी गिरफ्तारी हुई.

वैसे पाकिस्तान में ये अकेली पार्टी नहीं, जिसपर बैन है. वहां आतंकी गतिविधियों के तहत 78 अतिवादी संगठनों पर पाबंदी लगी हुई है. एक बार कोई संगठन इस लिस्ट में आ जाता है तो सरकार पार्टी के सारे कार्यालय सील करते हुए वहां की प्रचार से लेकर बाकी सारी चीजें अपने कब्जे में ले लेती है. इसके अलावा पार्टी किसी चुनाव या सामाजिक कार्य में भी हिस्सा नहीं ले पाती है.
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