इंडोनेशिया में ज्वालामुखी के लावे से बनी गणेश मूर्ति, जान पर खेलकर होती है पूजा

इंडोनेशिया में ज्वालामुखी के लावे से बनी गणेश मूर्ति, जान पर खेलकर होती है पूजा
ज्वालामुखी का खतरा भी लोगों को इसके मुहाने पर बने गणेश मंदिर में जाने से रोक नहीं पाता- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)

पूरे 14 दिनों तक चलने वाली इस पूजा की इंडोनेशिया (Ganesh Puja in Indonesia named Eksotika Bromo Festival) में काफी मान्यता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 27, 2020, 6:51 PM IST
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देशभर में पिछले पांच दिनों से गणेश पूजा चल रही है. वैसे देश ही नहीं, दुनिया के कई हिस्सों में गणपति को माना जाता है. इंडोनेशिया ऐसा ही एक देश है. वहां एक सक्रिय ज्वालामुखी के मुंह पर गणेश मंदिर है. इस मंदिर में सालाना जलसा होता है, जिसमें जान पर खेलकर लोग लगातार 14 दिनों तक गणेश पूजा करते हैं.

कहां पर बना है गणेश मंदिर
इंडोनेशिया (Indonesia) में मौजूद कुल 141 ज्वालामुखी हैं, जिनमें से 130 अब भी सक्रिय हैं यानी इनमें जब-तब विस्फोट होता रहता है. इन्हीं में से एक है माउंट ब्रोमो (Mount Bromo) पहाड़ पर बना ज्वालामुखी. दुनिया के सबसे सक्रिय ज्वालामुखियों (active volcanoes) में से एक होने की वजह से इंडोनेशिया जाने वाले सैलानियों के लिए इसके बहुत से हिस्सों तक जाने की मनाही है, लेकिन ज्वालामुखी का खतरनाक होना भी यहां के लोगों को इसके मुहाने पर बने गणेश मंदिर (Ganesha temple) में जाने से रोक नहीं पाता. माना जाता है कि गणेश पूजा से ही वे अब तक सुरक्षित हैं.

माउंट ब्रोमो का मतलब स्थानीय जावानीज भाषा में ब्रह्मा से है

क्या है पूजा का इतिहास


माउंट ब्रोमो का मतलब स्थानीय जावानीज भाषा में ब्रह्मा से है. हालांकि यहां पर मंदिर गणेश का है. स्थानीय लोगों का मानना है कि ये मूर्ति 700 सालों से वहां है, जो उनके पूर्वजों ने स्थापित की थी. मान्यता के अनुसार यही गणेश मूर्ति अब तक जलते हुए ज्लावामुखी के पास होने के बाद भी उनकी रक्षा करती आ रही है.

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यही वजह है कि यहां के पूर्व में बसा एक जनजातीय समूह, जिसे Tenggerese नाम से जाना जाता है, गणेश जी की सदियों से पूजा करता आ रहा है. इस गणेश मंदिर को Pura Luhur Poten के नाम से जाना जाता है. मंदिर की विशेषता है कि यहां गणेश जी की अलग-अलग तरह की मूर्तियां हैं और सारी ही मूर्तियां ज्वालामुखी के जमे हुए लावे से बनी हुई हैं.

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हिंदू रीति-रिवाज की प्रमुखता
माउंट ब्रोमो के आसपास बने 30 गांवों में इस जनजाति के लगभग 1 लाख लोग रहते हैं. ये खुद को हिंदू मानते हैं और हिंदू ही रीति-रिवाज मानते हैं. हालांकि समय के साथ इनके रीति-रिवाजों में कुछ बुद्ध रिवाज भी जुड़ गए हैं. जैसे ये लोग त्रिमूर्ति (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) की पूजा के साथ ही भगवान बुद्ध की पूजा भी करते हैं.

यहां गणेश जी की अलग-अलग तरह की मूर्तियां ज्वालामुखी के जमे हुए लावे से बनी हैं (Photo-pixabay)


पर्व के दौरान क्या होता है
सारे रीति-रिवाजों के बीच एक खास पूजा का Tenggerese में काफी महत्व है. वे हर साल 14 दिनों के लिए माउंट ब्रोमो के मुहाने पर बने गणेश मंदिर में भगवान गणेश की पूजा करते हैं. इस पूजा को Yadnya Kasada पर्व कहते हैं. माना जाता है कि 13वीं से 14 सदी के बीच इस पूजा की शुरुआत हुई. इसके पीछे भी एक लोककथा है, जिसके अनुसार भगवान ने वहां के राज-रानी जो सालों तक निःसंतान थे, उन्हें 14 संतानें दीं, इस शर्त पर कि 25वीं और आखिरी संतान को वे पहाड़ को अर्पित कर देंगे. इसके बाद से हर साल पूजा और पशु बलि का सिलसिला चल पड़ा. अब भी यहां बकरियों की बलि दी जाती है.

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साथ ही ज्वालामुखी के भीतर इस बलि के अलावा फल-फूल और मौसमी सब्जियां भी अर्पित की जाती हैं. मान्यता है कि गणेश जी की पूजा और सुलगते हुए ज्वालामुखी को फल अर्पित करना ही उसमें विस्फोट को रोकता है और अगर ऐसा न किया जाए तो ये समुदाय जलकर खत्म हो जाएगा.

त्योहार के दौरान पहाड़ पर बड़ा मेला लगता है जिसमें स्थानीय लोग कई तरह का आर्ट दिखाते हैं- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)


क्या सिस्टम है पुजारियों का
पूजा के कई तरीके हिंदुओं से मिलते-जुलते हैं. जैसे हमारे यहां के मंदिर की पुजारी की तरह ही यहां भी पुजारी होते हैं, जिन्हें Resi Pujangga कहा जाता है. ये विधि-विधान पूरा करने में लोगों की मदद करते हैं. आगे चलकर पुजारी का बेटा ही पुजारी बनता है. बड़े उत्सव के दौरान पुजारी के तीन सहयोगी होते हैं, जिन्हें Legen, Sepuh और Dandan से जाना जाता है.

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सैलानी भी देखने को आते हैं
इस जनजाति का एक अपना कैलेंडर है. इसी के अनुसार हर साल 14 दिनों के त्योहार के दौरान पहाड़ पर बड़ा मेला लगता है जिसमें स्थानीय लोग कई तरह का आर्ट दिखाते हैं. यही वजह है कि ये पर्व विदेशी सैलानियों को भी खासा आकर्षित करता है. हालांकि लगातार सुलगते हुए ज्वालमुखी के कारण यहां का तापमान ज्यादा रहता है. इसी वजह से अगर किसी सैलानी को सांस लेने में दिक्कत या किसी और तरह की हेल्थ प्रॉब्लम हो तो उसे यहां आने की इजाजत नहीं मिलती है.
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