कौन है तुर्की का राष्ट्रपति, जो खुद को इस्लामी दुनिया का खलीफा मान बैठा है

कौन है तुर्की का राष्ट्रपति, जो खुद को इस्लामी दुनिया का खलीफा मान बैठा है
तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन लगातार भारत-विरोधी बयान देते आए हैं

तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोआन (Recep Tayyip Erdoğan, President of Turkey) समय-समय पर ऐसे बयान देते हैं, जिससे वे खुद को दुनियाभर के मुसलमानों की आवाज बता सकें.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 18, 2020, 3:33 PM IST
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फिल्म अभिनेता आमिर खान तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन (Recep Tayyip Erdoğan, President of Turkey) की पत्नी से मुलाकात (actor Aamir Khan meets first lady of Turkey) कर विवादों में आ गए हैं. सोशल मीडिया पर खासतौर पर बवाल मचा है, जहां उन पर देश के खिलाफ बोलने वालों के साथ होने का आरोप लग रहा है. बता दें कि तुर्की के राष्ट्रपति लगातार भारत-विरोधी बयान देते आए हैं. यहां तक कि वे कश्मीर पर खुलकर पाकिस्तान के साथ हैं. जानिए, तुर्की के राष्ट्रपति की 10 खास बातें.

एर्दोआन साल 2012 से तुर्की के राष्ट्रपति हैं. इससे पहले वो 2003 से 2014 तक प्रधानमंत्री और 1994 से 1998 तक इस्तांबुल के मेयर के तौर पर काम करते रहे. इस्तांबुल के पड़ोसी और आर्थिक तौर पर कमजोर शहर कासिमपाशा में जन्मे एर्दोआन का परिवार जल्दी ही राइज चला गया. वहां उनके पिता टर्किश कोस्ट गार्ड में कप्तान थे. लेकिन बाद में वे इस्तांबुल चले आए और वहीं पर एर्दोआन की स्कूली पढ़ाई हुई.

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जैसा कि एर्दोआन बताते रहे कि उनका बचपन काफी गरीबी में बीता था. हफ्ते में उन्हें 2.5 तुर्की मुद्रा (लीरा) मिलती थी. उससे भी वो पोस्टकार्ड खरीद लाते और सैलानियों को बेचते रहते थे. साथ ही वो पानी की बोतलें भी बेचते थे ताकि कुछ कमाई हो सके.
एर्दोआन बताते रहे हैं कि उनका बचपन काफी गरीबी में बीता


आगे के वक्त में वो फुटबॉल खेलते हुए बहुत से छात्र नेताओं के संपर्क में आए और जल्दी ही राजनीति की तरफ जाने लगे. राष्ट्रीय तुर्की छात्र संघ में शामिल होने के बाद वो भाषण देने लगे और तुरंत ही छात्रों के बीच लोकप्रिय हो गए. इसी तरह आगे बढ़ते हुए एर्दोआन साल 1994 में इस्तांबुल के मेयर बन गए और इसके बाद से तुर्की की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत हो गई. दरअसल एर्दोआन को कट्टर मुस्लिम विचारधारा का माना जाता है जो यहूदियों या दूसरे धर्म के लोगों को हीन भाव से देखते हैं.

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साल 2018 में चुनाव के दौरान एर्दोआन ने अपने मुस्लिम वोटरों से वादा किया था कि वो तुर्की के विश्वविख्यात हागिया सोफिया म्यूजियम को मस्जिद में बदल देंगे. बता दें कि ये म्यूजियम एक समय पर दुनिया के सबसे बड़े चर्चों में से रहा. छठी सदी में इसे रोमन सम्राट जस्टिनियन ने बनवाया था. बाद में साल 1453 में ऑटोमन एंपायर के सुल्तान मेहमद द्वितीय ने तुर्की पर जीत के बाद इसे मस्जिद में बदलने का आदेश दे दिया था.

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हालांकि तुर्की के संस्थापक मुस्तफा कमाल पाशा ने साल 1935 में इसे संग्रहालय में बदलवा दिया. एक तरह से हागिया सोफिया म्यूजियम तुर्की की धर्मनिरपेक्षता का प्रतीक बन गया था. लेकिन एर्दोआन ने हाल ही में इसे मस्जिद में बदल दिया.

तुर्की के विश्वविख्यात हागिया सोफिया म्यूजियम को मस्जिद में बदला जा चुका है


कट्टरपंथी एर्दोआन के बारे में माना जाता है कि वो केवल अपने देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में इस्लाम का खलीफा बनना चाहते हैं. यही कारण है कि वो रह-रहकर पाकिस्तान के पक्ष में बोलते रहते हैं. जैसे जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने का एर्दोआन ने विरोध किया था. तब उनका बयान खासा चर्चित हुआ था. उन्होंने कश्मीर के लोगों को पीड़ित बताते हुए पाकिस्तान के साथ खड़ा होने की बात की थी.

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साल 2019 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी एर्दोआन ने कश्मीर मामले को तूल देने की कोशिश की थी. उन्होंने कहा था कि भारत के पास जो कश्मीर है, उसमें लगभग 80 लाख लोग फंसे हुए हैं. इस पर वहीं भारत ने आपत्ति जताई थी और कश्मीर मसले को भारत का आंतरिक मामला कहा था.

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महिलाओं के अधिकारों के बारे में भी तुर्की के इस राजा की राय कुछ खास अच्छी नहीं. पहले तुर्की में हिजाब प्रतिबंधित रहा. अगर कोई युवती हिजाब में है, तो उसे यूनिवर्सिटी जाने की इजाजत नहीं होती थी. लेकिन एर्दोआन के आने के बाद से हिजाब का चलन एकदम से बढ़ा. इसकी एक वजह ये है कि खुद एर्दोआन की पत्नी यानी देश की प्रथम महिला एमीन एर्दोआन हिजाब पहनती हैं.

पूरी दुनिया के मुसलमानों की आवाज बनने का सपना देख रहे एर्दोआन की छवि खुद अपने देश में पाक-साफ नहीं


माना जाता है कि रेडिकल इस्लामिक देश की छवि तैयार करके खुद को पूरी दुनिया के मुसलमानों का नेता बनाने पर तुले एर्दोआन की ओर से पाकिस्तान की आतंकी गतिविधियों को मदद भी मिल रही है. हिन्दुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में इस बारे में बताया गया है कि कैसे कश्मीर और यहां तक कि केरल में भी तुर्की की मदद से पाकिस्तान भारतीय मुसलमानों को कट्टर बनाने पर तुला हुआ है. इसी रवैये के चलते एर्दोआन की ग्लोबल मीडिया में आलोचना भी होने लगी है. खासकर हागिया सोफिया को मस्जिद बनाने के बाद से वो लगातार सुर्खियों में हैं.

वैसे पूरी दुनिया के मुसलमानों की आवाज बनने का सपना देख रहे एर्दोआन की छवि खुद अपने देश में पाक-साफ नहीं. उन पर आरोप है कि साल 2018 में चुनावों में जीत के लिए उन्होंने खूब रिश्वत दी. हर पेंशनभोगी को 1000 लीरा (14,275 रुपये) मिले ताकि वो मतदान से 10 दिन पहले पड़ी ईद मना सकें. ये एक तरह की खुली रिश्वत थी.
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