चांद से लौटने वाले पहले यात्री हुए थे क्वारेंटीन, जानिए इसकी कुछ अनोखी बातें

चंद्रमा (Moon) से आने के बाद अपोलो 11 (Apollo11) की टीम को कई दिनों चत क्वारेंटीन रह पड़ा था. (तस्वीर: NASA via Wikimedia Commons)

चंद्रमा (Moon) से आने के बाद अपोलो 11 (Apollo11) की टीम को कई दिनों चत क्वारेंटीन रह पड़ा था. (तस्वीर: NASA via Wikimedia Commons)

1969 में जब नील आर्मस्ट्रॉन्ग (Neil Armstrong) चंद्रमा (Moon) से पृथ्वी (Earth) पर अपने साथियों के साथ लौटे थे. तब उन्हें उनकी टीम के साथ क्वारेंटीन में रखा गया था. इससे संबंधित कुछ रोचक और बातें लोग आज भी नहीं जानते हैं.

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20 जुलाई 1969 अंतरिक्ष इतिहास में बहुत खास दिन माना जाता है. इस दिन इंसान ने चंद्रमा पर पहला कदम रखा था. अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के अपोलो 11 अभियान के दो सदस्य नील आर्मस्ट्रॉन्ग और बज एल्ड्रिन ने चंद्रमा पर 21 घंटे 36 मिनट बिताए थे. इसके बाद जब दोनों मिशन के अपने साथी माइकल कोलिन्स के साथ लौटे तो पूरे क्रू को कुछ दिन क्वारेंटीन रहना पड़ा था. इस दौरान कई रोचक और अनोखी बातें हुईं जो दुनिया के बहुत सारे लोग नहीं जानते हैं.

कितने दिन का क्वारेंटीन
अपोलो 11 को पृथ्वी पर आते ही क्वारेंटीन में रख दिया गया. यह 21 दिन का क्वारेंटीन था. यह क्वारेंटीन का समय तभी शुरू हो गया था जब आर्मस्ट्रॉन्ग और उनके साथियो ने चंद्रमा से लौटते समय ईगल लूनारलैंडर में प्रवेश किया. इसके तीन दिन बाद आर्मस्ट्रॉन्ग और एल्डिन, कोलिन्स के साथ कोलंबिया मॉड्यूल में चंद्रमा का चक्कर लगाने के बाद तीन की धरती की यात्रा पर निकले थे.

जन्मदिन ना माना पाने की उम्मीद
इसका मतलब यही था कि 5 अगस्त 1969 को नील आर्मस्ट्रॉन्ग लोगों के साथ अपना जन्मदिन नहीं मना सकेंगे. कम से कम आर्मस्ट्रॉन्ग को तो यही लगा था कि वे उस साल अपना जन्मदिन नहीं मना पाएगे.  लेकिन आर्मस्ट्रॉन्ग का 39वां जन्मदिन मानने की नासा ने पहले ही प्लानिंग कर रखी थी. क्वारेंटीन में रहने के बाद भी आर्मस्ट्रॉन्ग का जन्मदिन मनाया गया. उनसे केक कटवाया गया.



ऐस मना क्वारेंटीन में बर्थडे
आर्मस्ट्रॉन्ग के लिए यह एक सरप्राइज पार्टी थी. एक कांच का पार्टीशन रखा गया. पार्टीशन के एक तरफ उन्होंने तो दूसरे तरफ उनके परिवार वालों और उनके साथियों के परिवार वालों ने केक काटकर जश्न मनाया यहां तक कि आर्मस्ट्रॉन्ग  ने केक काटकर कांच से दूसरी तरफ अपने परिवार को केक देने की संकेत भी किया.

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अपोलो 11 (Apollo 11) के मिशन में लौटते समय वैक्यूम कर आर्मस्ट्रॉन्ग और एल्ड्रिन ने अपनी धूल हटाई थी. (तस्वीर: Pixabay)


क्वारेंटीन की बड़ी वजह
20 जुलाई को ही आर्मस्ट्रॉन्ग दुनिया के हीरो बन चुके थे. वे अपने साथियों के साथ चंद्रमा से मिट्टी के नमूने लाए थे. संदेह था कि हो सकता है कि अपोलो11 अभियान के दौरान उनका संपर्क नए लेकिन नुकसानदायक बैक्टीरीया या अज्ञात पदार्थ से हुआ हो. यह पृथ्वी के बाहर के किसी पिंड से पहली मानवीय अंतरक्रिया थी. डॉक्टरों की उन पर पैनी नजर थी जबकि एकअन्य टीम ने पूरी एतियात के साथ चंद्रमा के पत्थरों का अवलोकन किया था.

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 लेकिन लोग यह नहीं जानते कि जानते
चूंकि चंद्रमा से कभी कोई पदार्थ पृथ्वी तक नहीं आया था. इसलिए इस संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता था कि क्रू अपने और नमूनों के साथ किसी भी तरह का जीवन का रूप अपने साथ लाया हो. ऐसे में जीवन के उस रूप को सुरक्षित करना भी जरूरी था. हालांकि इसकी संभावना बहुत ही कम थी. लेकिन फिर भी इसके लिए क्रू को क्वारेंटाइन के साथ नमूनों के साथ भी जरूरी एतिहात बरती गई.

अपोलो 11 (Apollo 11) अभियान पृथ्वी से बाहर के पिंड से इंसान की पहली अंतरक्रिया थी, इसलिए सावधानी ज्यादा बरती गई थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


सबसे लंबा क्वारेंटीन
यह क्वारेंटीन नासा के किसी भी अभियान के बाद आए अंतरिक्ष या चंद्रमा यात्रियों के लिए सबसे लंबा क्वारेंटीन था. इसके बाद के अपोलो अभियानों के लिए क्वारेंटाइन इतना लंबा नहीं था. अपोलो 11 अभियान में इस बात का खास तौर पर पूरे समय ख्याल रखा गया था कि हो सकता है कि यात्री अपने साथ किसी तरह का संक्रमण साथ ले आएं.

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मजेदार बात यह क्वारेंटीन करने का विचार साल 1963 में ही बनना शुरू हो गया था. जब इंटरएजेंसी कमेटी ऑन बैक कंटेमिनेशन बनाई गई थी. उसस समय संक्रमण का भय विज्ञान फंतासी फिल्मों का हिस्सा था.  ऐसे में क्वारेंटीन के समय अंतरिक्ष यात्रियों की जांच ही सबसे अच्छा उपाय माना गया था.
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