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वो शख्स, जिसकी प्रेरणा से हेडगेवार ने रखी थी RSS की नींव

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Updated: September 27, 2019, 11:05 AM IST
वो शख्स, जिसकी प्रेरणा से हेडगेवार ने रखी थी RSS की नींव
कई अहम भूमिकाएं निभाने वाले बीएस मुंजे.

मुसोलिनी (Mussolini) से मुंजे ने कहा 'हर एक महत्वाकांक्षी और विकासशील राष्ट्र को सैन्य पुनर्जागरण के लिए ऐसे फासीवादी (Fascist) संगठनों की जरूरत है'.

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डॉ के बी हेडगेवार (K. B. Hedgewar) ने 27 सितंबर,1925 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh)  की स्थापना की थी. हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना को साकार करने के लिए उन्होंने 1925 में विजयादशमी के दिन संघ की नींव रखी (Foundation Day) थी. उन्होंने शुरू से ही संघ को सक्रिय राजनीति से दूर सिर्फ सामाजिक-धार्मिक गतिविधियों तक सीमित रखा. हेडगेवार का मानना था कि संगठन का प्राथमिक काम हिंदुओं को एक धागे में पिरो कर एक ताकतवर समूह के तौर पर विकसित करना है. लेकिन ये अकेले उनके दिमाग की उपज नहीं थी बल्कि उसके सूत्रधार थे बी.एस मुंजे (B. S. Munje).

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कौन थे बी.एस मुंजे ?


मुंजे का जन्म 1872 में केंद्रीय प्रांत (Central Province) (वर्तमान में छत्तीसगढ़) में बिलासपुर (Bilaspur) में हुआ था. उन्होंने 1898 में मुंबई (Mumbai) में ग्रांट मेडिकल कॉलेज से मेडिकल डिग्री ली. फिर बॉम्बे नगर निगम में चिकित्सा अधिकारी के रूप में काम करने लगे. सैन्य जीवन (Military Life) में उनकी गहरी रुचि के चलते वो सेना में कमीशन अधिकारी बन गए. सेना की मेडिकल विंग में उन्होंने दक्षिण अफ्रीका (South Africa) में बोअर युद्ध में हिस्सा लिया.

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गांधीजी की मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति से असहमत होने के चलते डॉ. मुंजे कांग्रेस से अलग हो गए. वो हिंदू महासभा आ गए. जल्द ही उनकी गिनती हिंदू महासभा के बड़े नेताओं में होने लगी. 1930 और 1931 के गोलमेज सम्मेलनों में वे हिंदू महासभा के प्रतिनिधि के रूप में गए थे. इतालवी लेखिका मार्जिया कोसालेरी के मुताबिक, मुंजे ने गोलमेज सम्मेलन के बाद फरवरी से मार्च 1931 तक यूरोप का टूर किया. वो 15 मार्च से 24 मार्च तक इटली में भी रुके.  डॉ मुंजे 1927-28  में अखिल भारत हिंदू महासभा के अध्यक्ष रहे. आरएसएस को बनवाने में इनका बड़ा हाथ था.

मुंजे और हेडगेवार का साथ

मुंजे और हेडगेवार की उम्र में 17 साल का फर्क था. उम्र में बड़े होने के कारण वो हेडगेवार के मार्गदर्शक ज्यादा रहे. हेडगेवार पर उनका प्रभाव भी बहुत था. माना जाता है कि 1910 में मूंजे ने ही हेडगेवार को मैट्रिक के बाद मेडिकल की पढ़ाई के लिए कोलकाता भेजा था.
मेडिकल की पढ़ाई के बाद हेडगेवार भी शुरुआती दिनों में कांग्रेस में शामिल हुए थे. उन्होंने भी 1921 के असहयोग आंदोलन में हिस्सा लिया. एक साल जेल में गए. लेकिन गांधी जी के खिलाफत आंदोलन को समर्थन देने के चलते उनका कांग्रेस से मन खिन्न हो गया. 1923 में सांप्रदायिक दंगों ने उन्हें पूरी तरह उग्र हिंदुत्व की ओर ढकेल दिया.



संघ की ड्रेस मुंजे के दिमाग की उपज

हेडगेवार मुंजे के संपर्क में शुरू से थे ही, साथ ही बाल गंगाधर तिलक और विनायक दामोदर सावरकर का भी उनपर बड़ा प्रभाव था इसलिए हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना को साकार करने के लिए उन्होंने संघ की नींव रखी. वो चाहते थे कि कांग्रेस के अधिवेशन में संघ के सदस्य दूर से ही पहचान में आएं. अनुशासित भी दिखें. इसलिए उन्होंने संघ के सदस्यों के लिए खाक़ी शर्ट, खाक़ी निकर, खाक़ी टोपी, लंबे मोज़े और जूतों का ड्रेस कोड तैयार किया था. लेकिन ये ड्रेस कोड मुंजे की देन थी. मुंजे हिंदू महासभा के नेता थे. मुसोलिनी से मिल चुके थे उनकी सेना से भी प्रभावित थे. इसका असर हेडगेवार की यूनिफ़ार्म में नज़र आया.



इटली के फासीवादी संस्थानों सरीखी ट्रेनिंग

मुंजे मानते थे कि हिंदुओं का सैन्यकरण होना चाहिए. इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए उन्होंने यूरोप का दौरा किया था. वो इटली में फासीवाद के संस्थापक बेनितो मुसोलिनी से विशेष तौर पर प्रभावित थे. मुसोलिनी से मिलकर लौटने के बाद उन्होंने हेडगेवार के साथ मिलकर स्वंयसेवकों के लिए मिलिट्री ट्रेनिंग अनिवार्य कर दी थी. कोसालेरी के मुताबिक, मुंजे इटली के जिन फासीवादी संस्‍थांनों में गए, उनकी प्रशिक्षण पद्घति और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रशिक्षण पद्घति लगभग एक जैसी है. हेडगेवार ने जितने भी अनुशालन संघ में लागू किए, वे मुंजे की देन थे.



फासिज्म के प्रति मुंजे का आकर्षण

इतालवी विद्वान मर्जिया केसोलारी कहती हैं-मुंजे पर फासीवादी संगठन की गहरी छाप कि पुष्टि उनकी डायरी करती है. डायरी के अंश इस बात को सजीव ढंग से सामने लाते है कि फासीवाद का विचार हिंदुओं को एकजुट करने की परिकल्पना को साकार करता है. मुंजे ने लिखा है, "भारत और विशेष रूप से हिंदू भारत को हिंदुत्व सेना के पुनुरुद्धार के लिए किसी ऐसे संस्थान की जरूरत है. नागपुर स्थित डॉ. हेडगेवार के निर्देशन में चल रहा हमार संस्थान आरएसएस  ऐसा ही है, हालांकि इसे स्वतंत्र रूप से स्थापित किया गया है. मैं अब अपना पूरा जीवन महाराष्ट्र और अन्य प्रांतों में डॉ. हेडगेवार के इस संस्थान के विकास और विस्तार में लगा दूंगा."

मुसोलिनी से क्या कहा था मुंजे ने

मुसोलिनी से मुंजे ने कहा "हर एक महत्वाकांक्षी और विकासशील राष्ट्र को सैन्य पुनर्जागरण के लिए ऐसे फासीवादी संगठनों की जरूरत है. इसी बैठक में मुंजे ने कहा कि पूरे भारत में हिंदू धर्म का मानकीकरण करने के लिए मैंने हिंदू धर्म शास्त्र पर आधारित एक योजना के बारे में सोचा है "लेकिन मुद्दा यह है कि यह आदर्श तब तक लागू नहीं किया जा सकता, जब तक हमारे पास पूर्ण स्वराज न हो.

1934 में मुंजे ने सेंट्रल हिंदू मिलिट्री एजुकेशन सोसाइटी की शुरुआत की. इसका उद्देश्य मातृभूमि की रक्षा के लिए युवा हिंदुओं को सैन्य प्रशिक्षण देना और उन्हें 'सनातन धर्म' की शिक्षा देना था. साथ ही, निजी और राष्ट्रीय सुरक्षा की कला में युवाओं को माहिर बनाना था. इसमें कहा गया है कि इस प्रशिक्षण का मकसद जीत हासिल करने के लिए किसी भी हद तक अपने विरोधियों को खत्म करना है.

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First published: September 27, 2019, 10:56 AM IST
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