कौन है दाऊद का वो खास आदमी, जिसे बचाना चाहती है इमरान की सरकार

जारिब मोतीवाला नाम का ये शख्स कराची का बहुत बड़ा कारोबारी है लेकिन रिपोर्ट्स कहती हैं कि वास्तव में वो डॉन का सबसे खास सहयोगी है. पाकिस्तान से लेकर विदेशों तक दाऊद के लिए कई तरह के काम करता है

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: July 4, 2019, 8:56 PM IST
Sanjay Srivastava
Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: July 4, 2019, 8:56 PM IST
वो कराची का एक बहुत बड़ा व्यापारी है. लग्जरी लाइफ जीता है. किलेनुमा बंगले में भारी सुरक्षा में रहता है. उसका एक पैर पाकिस्तान में होता है दूसरा विदेश में. उसे अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का सबसे खास आदमी कहा जा रहा है. इन दिनों वो लंदन की जेल में है. अमेरिका इस शख्स को हर हाल में अपनी पकड़ में चाहता है. लेकिन दूसरी ओर पूरी पाकिस्तान सरकार उसे बचाने में लगी है.

ये शख्स करीब एक साल से लंदन की जेल में है. अमेरिकी सरकार के वकील का दावा है कि वो डी कंपनी का सबसे खास आदमी है. आखिर कौन है ये शख्स. कितना ताकतवर है. डी कंपनी में वास्तव में उसकी क्या हैसियत है. वो करता क्या है.

लंदन के हिल्टन होटल से हुई गिरफ्तारी
लंदन में पिछले साल 17 अगस्त में स्काटलैंड यार्ड ने उसे तब गिरफ्तार किया था, जब वो दुबई से लंदन पहुंचा. वहां से सबसे शानदार होटलों में एक हिल्टन होटल में रुका. अमेरिका के एजेंट हर पल उसके हर कदम को सूंघ रहे थे. अमेरिकी एफबीआई के कहने पर ही स्काटलैंड यार्ड ने उसे लंदन में धर दबोचा. दरअसल जाबिर का बेटा लंदन यूनिवर्सिटी में पढता है और वो वहां उसके साथ ईद मनाने गया था.

अब अमेरिका उसका प्रत्यर्पण चाहता है. वहीं पाकिस्तान को डर है कि ऐसा हुआ तो वो अमेरिका जाकर दाऊद इब्राहिम की पूरी पोल खोलकर रख देगा. ये भी माना जाता है कि उसकी गिरफ्तारी के पीछे अमेरिका के साथ भारत का भी हाथ है. क्योंकि भारत सरकार ने भी ब्रिटेन से उसे गिरफ्तार करने का अनुराध किया हुआ था.

अमेरिकी सरकार ने लंदन की अदालत में ये दावा भी किया है कि अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम पाकिस्तान में ही है. हालांकि लंदन कोर्ट में ये बात कहे जाने के बाद ही पाकिस्तान सरकार हरकत में आ गई. तुरत-फुरत पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी किया कि दाऊद इब्राहिम पाकिस्तान में नहीं है.

दरअसल पाकिस्तान सरकार को डर है कि अगर जारिब मोतीवाला को लंदन से अमेरिका प्रत्यर्पित किया गया तो वो ये बता सकता है कि इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के साथ डॉन के क्या कनेक्शन हैं. अमेरिका पहले ही दाऊद को ग्लोबल टेरेरिस्ट टेरेरिस्ट डिक्लेयर कर चुका है. बताया जाता है कि पाकिस्तान में बैठकर दाऊद एक इंटरनेशऩल ड्रग सिंडिकेट चला रहा है.
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अमेरिका चाहता है कि जारिब का प्रत्यर्पण लंदन से अमेरिका किया जाए लेकिन इसे रोकने के लिए पाकिस्तान हरसंभव कोशिश कर रहा है


जारिब कराची का बड़ा कारोबारी 
जारिब मोतीवाला के कई नाम हैं.  कुछ लोगो उसे जारिब मोती के नाम से जानते हैं तो कुछ जारिब सिद्दीकी. कुछ को वो अपना नाम जारिब सिद्दीकी मोतीवाला बताता है. कराची में उसकी गिनती बड़े और संपन्न व्यापारियों में होती है. माना जाता है कि उसके संपर्क खासे लंबे चौड़े हैं. कराची स्टॉक एक्सचेंज की स्थापना में उसके पिता और दादा की खास भूमिका रही है यानि पुश्तैनी तौर पर उसका परिवार धनाढ्य और हैसियत वाला भी रहा है.

शेयर बाजार का भी बड़ा कारोबारी है जारिब
कराची में ये भी कहा जाता है कि वो उसका इंपोर्ट-एक्सपोर्ट का बड़ा कारोबार दुनियाभर में फैला है. इसीलिए बिजनेस के चलते वो ज्यादातर बाहर रहता है. कराची स्टाक एक्सचेंज में उसकी धाक है. वो शेयर बाजार का बड़ा कारोबारी है. लाइफस्टाइल ऐसी कि देखकर आंखें चौंधिया जाए.

क्या मजाल है कि कोई उसके खिलाफ कुछ बोल भी दे.वो चेहरे पर हमेशा दाढी रखता है. उसके पासपोर्ट पर भी उसका चेहरा दाढी के साथ नजर आता है. उम्र है यही कोई 52 साल. उसकी दो बीवियां हैं. दोनों कराची में रहती हैं.

दाऊद के लिए क्या करता है वो 
सूत्रों का कहना है कि मोतीवाला दाऊद का प्रमुख फाइनेंस सहयोगी है. लंदन की अदालत में अमेरिका के वकील जॉन हार्डी ने कहा, मोतीवाला बड़े पैमाने पर यात्राएं करता है. अपने बॉस दाऊद इब्राहिम के लिए (अंडरवर्ल्ड अपराधों से संबंधित) मीटिंग करता है. वो भारत में भी आतंकी अपराधों को अंजाम देने के मामलों में वांछित है.

जारिब कराची का बड़ा कारोबारी है और पाकिस्तान में उसके ऊंचे संपर्क हैं


ड्रग तस्करी का रैकेट चलाता है
सूत्रों का कहना है, मोतीवाला डी-कंपनी के काले धन को विदेशों में कई  प्रोजेक्ट्स में लगा रहा है. उन्होंने कहा कि वो ड्रग तस्करी का रैकेट चलाता है. यूरोप में डी-कंपनी की ओर से पैसा इकट्ठा करने के लिए जाता-आता है. सूत्र कहते हैं कि अगर मोतीवाला का अमेरिका में प्रत्यर्पण हो गया तो ये दाऊद के साथ पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका होगा.

लंदन में पाकिस्तान उच्चायोग ने लंदन की अदालत में एक पत्र भी प्रस्तुत किया था, जिसमें मोतीवाला को पाकिस्तान का मशहूर और सम्मानित व्यवसायी बताया गया.

अमेरिका की नजर लंबे समय से थी
अमेरिका का दावा है कि वो उस पर 2005 से नजर रखे था. उससे मिलने वालों पर अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई की नजर रहती थी, साथ ही वो लगातार उसके फोन भी टेप करता था. वो ये भी देखता था कि जाबिर आखिर किन लोगों से मिलता-जुलता और उठता-बैठता है. जब एफबीआई आश्वस्त हो गया कि जाबिर डी कंपनी में सीनियर पोजिशन पर है और डी कंपनी के सभी तरह के कामों को कराने का काम करता है, तो अमेरिका ने उसे शिकंजे में कसना शुरू किया. अमेरिका में उसके खिलाफ ड्रग्स स्मगलिंग, जबरन धन उगाही और मनी लांड्रिंग के मामले हैं.

डी कंपनी के इस खास आदमी पर अमेरिका का एफबीआई लंबे समय से नजर रखे हुए था


किस तरह जाल बिछाया एफबीआई ने
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को ये भी शक था कि वो अमेरिका में ड्रग स्मगलिंग से लेकर धन फिरौती का काम करता है. एफबीआई ने उसके खिलाफ जाल बिछाया. एफबीआई के तीन एजेंट्स उसके पास ड्ग्स के व्यापारी बनकर पहुंचे. उससे मीटिंग्स हुईं. मोतीवाला का विश्वास जब उन पर जम गया तो उन्हें अमेरिका में डी कंपनी के ड्ग्स का एजेंट बना दिया गया.

इन तीन में से एक पास चार किलो की हेरोइन की खेप भेजी गई. जिसे उस एजेंट बखूबी अमेरिका तक पहुंचाया. उसकी एवज में मोतीवाला को 20 हजार डॉलर का पेमेंट भी किया गया. लेकिन बाद में पूरा पैसा नहीं मिलने पर मोतीवाला बिफर गया. लेकिन वो उस जाल में फंस चुका था, जिसे एफबीआई ने उसके खिलाफ बिछाया था. एफबीआई का दावा है कि उसके पास मोतीवाला के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं. जिसकी मदद से वो उसे अमेरिका ले जाकर ही मानेगा.

डॉक्टर कह रहे हैं वो डिप्रेशन का मरीज है
बताया जाता है कि पाकिस्तान सरकार के कई रसूखदार लोग उसे बचाने में लगे हैं. अदालत में पाकिस्तान के एक जाने माने डॉक्टर को पेश किया गया, जिसने वहां बताया कि किस कदर मोतीवाला डिप्रेसन का मरीज है. अगर उसे अमेरिका भेजा गया तो वो जिंदा नहीं बचेगा. पाकिस्तान की भरपूर कोशिश है कि मोतीवाला अमेरिका प्रत्यर्पित ना हो सके.

अदालत में उसे अमेरिकी वकील ने डी कंपनी का सीनियर मेंबर बताया गया है. ये बताया गया कि पिछले कुछ सालों में एफबीआई ने डी कंपनी और इसके सदस्यों के बारे में काफी कुछ पता लगाया है. इसका लीडर पाकिस्तान में रहता है और दक्षिण एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका के रूट के जरिए स्मगलिंग करता है. मोतीवाला इस सिंडिकेट में शीर्ष लोगों में है. इस डी कंपनी का बेस कराची में है.

अदालत में अमेरिकी सरकार के वकील ने ये भी कहा, मोतीवाला सीधे डी कंपनी के लीडर दाऊद इब्राहिम को रिपोर्ट करता है और उसके साथ लगातार बैठकों में रहता है. अदालत में ये दावा भी किया गया कि जाबिर मोतीवाला सीधे डीकंपनी के अपराधों में शामिल रहा है, जिसमें धन उगाही, फिरौती, उधार बटोरने के साथ दुनियाभर में डीकंपनी के जरिए लोगों से संपर्क करना रहा है. उसने अपने कामकाज के बारे में अमेरिकी एफबीआई के अंडरकवर एजेंट्स के सामने स्वीकार भी किया है.

इस बीच लंदन की अदालत में उसकी जमानत के लिए कई बार अनुरोध किया जा चुका है लेकिन अदालत ने उसे हर बार खारिज कर दिया है. मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल में जब वो अदालत में पहुंचा तो कमजोर नजर आ रहा था और उसकी दाढी बढ़ी हुई थी. उसने एक जाने माने इंटरनेशनल वकील टोबी कैडमन की सेवाएं ली हुई हैं.

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First published: July 4, 2019, 8:56 PM IST
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