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क्या है प्‍लाज्‍मा थेरेपी? कैसे काम करती है ये तकनीक, दिल्ली में ठीक हुए चार मरीज

क्या है प्‍लाज्‍मा थेरेपी? कैसे काम करती है ये तकनीक, दिल्ली में ठीक हुए चार मरीज

दिल्‍ली में प्‍लाज्‍मा थेरेपी से इलाज करने पर मरीज 5 दिन में हुआ पूरी तरह ठीक.

दिल्‍ली में प्‍लाज्‍मा थेरेपी से इलाज करने पर मरीज 5 दिन में हुआ पूरी तरह ठीक.

दिल्‍ली में कोरोना वायरस (Coronavirus) के एक गंभीर मरीज के इलाज में प्‍लाज्‍मा थेरेपी (Plasma Therapy) का इस्‍तेमाल किया. अब मरीज ठीक हो चुका है और उसका कोरोना टेस्‍ट भी निगेटिव आया है. उसका इलाज करने वाले डॉ. सुदीप बुद्धिराजा ने बताया कि ये थेरेपी कैसे काम करती है और कौन प्‍लाज्‍मा डोनेट कर सकता है.

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    दिल्ली सरकार को कोरोना के इलाज में बड़ी सफलता मिली है. दिल्ली में कोरोना से पीड़त चार मरीजों का इलाज प्लाजमा थैरेपी से किया गया, जिसके नतीजे अच्छे रहे हैं. इस मामले पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि प्लाजमा थैरेपी से पहले चरण में अच्छे संकेत मिले हैं. उन्होंने कहा कि हम आगे भी इसी थैरेपी से कोरोना पीड़ितो का इलाज जारी रखेंगे साथ ही उन्होंने ऐसे लोगों से खून देने की गुजारिश की जो कोरोना को हराकर घर लौट चुके हैं.

    आपको बता दें कि दिल्‍ली के एक निजी अस्‍पताल में 4 अप्रैल को एक 49 साल के कोरोना वायरस (Coronavirus) से संक्रमित व्‍यक्ति को भर्ती कराया गया. संक्रमित का श्‍वसन तंत्र (Respiratory System) 8 अप्रैल को फेल हो गया और उन्‍हें डॉक्‍टर्स ने वेंटिलेटर पर ले लिया. अस्‍पताल संक्रमित का इलाज स्‍वास्‍थ्‍य व परिवार कल्‍याण मंत्रालय (Health Ministry) के बताए दिशानिर्देशों के मुताबिक कर रहा था. उन्‍हें हाइड्रॉक्‍सीक्‍लोरोक्‍वीन औरर एजिथ्रोमाइसिन का कॉम्बिनेशन भी दिया जा रहा था. इसके बाद भी उनकी तबीयत में किसी तरह का सुधार नहीं हो रहा था. इस पर मरीज के परिवार ने डॉक्‍टरों से प्‍लाज्‍मा थेरेपी (Plasma Therapy) की मदद से इलाज करने की गुहार लगाई. इस समय तक कोविड-19 के इलाज में प्‍लाज्‍मा थेरेपी एक्‍सपेरिमेंट टेक्नीक के तौर पर इस्‍तेमाल की जा रही थी. हालांकि, आईसीएमआर (ICMR) तब तक इस थेरेपी के प्रयोग के तौर पर इस्‍तेमाल की अनुमति दे चुका था.

    4 दिन में वेंटिलेटर से हटा, 5वें दिन खुद खाना खाने लगा मरीज
    परिवार के बार-बार आग्रह करने पर डॉक्‍टर्स ने एक संक्रमण से उबर चुके व्‍यक्ति का प्‍लाज्‍मा लिया और 14 अप्रैल से उसे मरीज को चढाना शुरू कर दिया. इस मरीज के माता-पिता भी संक्रमित हो गए थे. महीने की शुरुआत में ही पिता की मौत हो गई थी, जबकि मां कोरोना वायरस से उबर चुकी थीं. मैक्‍स हेल्‍थकेयर के ग्रुप मेडिकल डायरेक्‍टर और इंस्‍टीट्यूट ऑफ इंटरनल मेडिसिन के सीनियर डॉक्‍टर डॉ. सुदीप बुद्धिराजा ने बताया कि प्‍लाज्‍मा थेरेपी से इलाज करने पर मरीज की हालत में सुधार होने लगा. उसे 18 अप्रैल को वेंटिलेटर से हटा दिया गया. उसके अगले ही दिन यानी 19 अप्रैल से वह खुद खाना खाने लगे. इसके बाद किए गए कोरोना टेस्‍ट में उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई.

    डॉ. बुद्धिराजा का कहना है कि अभी प्‍लाज्‍मा थेरेपी के क्‍लीनिकल ट्रायल्‍स की जरूरत है.


    'प्‍लाज्‍मा थेरेपी से इलाज के लिए क्‍लीनिकल ट्रायल्‍स की जरूरत'
    डॉ. बुद्धिराजा कहते हैं, 'इस सफलता के बाद भी हमें समझना होगा कि प्‍लाज्‍मा थेरेपी कोई चमत्‍कारी इलाज नहीं है. इस मरीज के इलाज में प्‍लाज्‍मा थेरेपी के साथ ही बाकी सभी तरह के उपचार भी किए गए. प्‍लाज्‍मा थेरेपी ने मरीज की हालत में सुधार की रफ्तार बढाने में मदद की. मरीज की हालत में सुधार सिर्फ प्‍लाज्‍मा थेरेपी के कारण ही नहीं है. कई कारणों से मरीज संक्रमण से उबरा है.' उन्‍होंने कहा कि इसी के लिए क्‍लीनिकल ट्रायल की जरूरत होती है. अध्‍ययन से साफ होगा कि प्‍लाज्‍मा थेरेपी वास्‍तव में कैसे काम करती है. प्‍लाज्‍मा थेरेपी के ट्रायल्‍स भारत समेत पूरी दुनिया में चल रहे हैं. ये थेरेपी वैक्‍सीन बनने तक इलाज में काफी मददगार साबित हो सकती है. ब्‍लड बैंक कोविड-19 से उबर चुके लोगों का प्‍लाज्‍मा लेकर क्‍लीनिकल ट्रायल्‍स के लिए उपलब्‍ध कराने में मदद कर सकते हैं.

    किसका प्‍लाज्‍मा थेरेपी की मदद से किया जा सकता है इलाज
    दिल्‍ली के 49 वर्षीय मरीज की प्‍लाज्‍मा थेरेपी करने वाले डॉ. बुद्धिराजा के मुताबिक, प्‍लाज्‍मा थेरेपी को सिर्फ गंभीर या थोड़ा कम लक्षणों वाले मरीजों के इलाज में इस्‍तेमाल किया जा सकता है. इस मामले में मरीज को सांस लेने में तकलीफ होने लगी थी और उसे गंभीर निमोनिया हो गया था. किसी भी दवाई का उस पर असर नहीं हो रहा था. इस थेरेपी का इस्‍तेमाला उन मरीजों पर नहीं किया जा सकता, जो कगार पर हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्‍या इस थेरेपी का इस्‍तेाल कोरोना वायरस निवारक के तौर पर किया जा सकता है तो उन्‍होंने कहा कि प्‍लाज्‍मा थेरेपी का ये उद्देश्‍य ही नहीं है. प्‍लाज्‍मा थेरेपी गंभीर बीमार व्‍यक्ति के शरीर को बीमारी से लड़ने में मिलने वाली अतिरिक्‍त मदद भर है. बाहरी स्रोत से मिलने वाली एंटीबॉडीज की मदद से मरीज वायरस का ज्‍यादा अच्‍छे से मुकाबला कर सकता है और मुश्किल हालात से बाहर निकल सकता है.

    प्‍लाज्‍मा थेरेपी के लिए वही व्‍यक्ति ब्‍लड डोनेट कर सकता है, जिसे कोरोना वायरस से उबरे हुए कम से कम 14 दिन हो चुके हों.


    कौन प्‍लाज्‍मा थेरेपी के लिए डोनेट कर सकता है अपना ब्‍लड
    प्‍लाज्‍मा थेरेपी या पैसिव एंटीबॉडी थेरेपी के लिए उस व्‍यक्ति के खून से प्‍लाज्‍मा लिया जाता है, जिसे कोरोना वायरस से उबरे हुए 14 दिन से ज्‍यादा हो चुके हों. संक्रमण से उबर चुके अलग-अलग लोगों के शरीर में अलग-अलग समय तक एंटीबॉडीज बनती रहती हैं. ये उसको हुए संक्रमण की गंभीरता और रोग प्रतिरोधी क्षमता पर निर्भर करता है. माय उपचार की रिपोर्ट के मुताबिक, ठीक हुए मरीज के मामले में प्‍लाज्‍मा डोनेट करने वाला व्‍यक्ति संक्रमित हुआ था. इलाज के बाद ठीक होने पर किए गए दो कोरोना टेस्‍ट में वह निगेटिव पाया गया था. इसके अलावा उसकी हेपेटाइटिस बी, सी और एचआईवी जांच भी की गई. सब कुछ ठीक पाए जाने पर उसके ब्‍लड से प्‍लाज्‍मा लेकर वेंटिलेटर पर मौजूद मरीज को दिया गया. डॉ. बुद्धिराजा ने बताया कि इस मामले में एंटीबॉडी टेस्‍ट नहीं किया जा सका था, लेकिन बेहतर होगा कि डोनर का एंटीबॉडी टेस्‍ट कर लिया जाए.

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    Tags: Corona Knowledge, Corona patients, Coronavirus, Coronavirus Epidemic, Coronavirus in India, Delhi, Lockdown, Lockdown. Covid 19, Protection against corona

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