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The Forgotten Army सिर्फ आजाद हिंद फौज नहीं, आज के भारत की भी कहानी

News18Hindi
Updated: January 24, 2020, 6:58 PM IST
The Forgotten Army सिर्फ आजाद हिंद फौज नहीं, आज के भारत की भी कहानी
The Forgotten Army वेब सीरीज में सुभाष चंद्र बोस द्वारा बनाई गई आजाद हिंद फौज के सैनिकों के संघर्षों को दिखाया गया है.

The Forgotten Army: Azaadi Ke Liye सिर्फ आजाद हिंद फौज की कहानी भर नहीं है बल्कि ये आज के भारत के लिए भी संदेश है.

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  • Last Updated: January 24, 2020, 6:58 PM IST
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बीते कुछ सालों में बॉलीवुड ने इतिहास पर आधारित कई फिल्में बनाई हैं. इनमें बाजीराव-मस्तानी, मणिकर्णिका, पानीपत, केसरी, रागदेश जैसी फिल्में शामिल हैं. अब निर्देशक कबीर खान भी इसी कड़ी में The Forgotten Army जैसी वेब सीरीज लेकर दर्शकों के बीच हाजिर हो गए हैं. ये वेब सीरीज अमेजन प्राइम पर रिलीज हुई है. इससे पहले भी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के बड़े निर्देशक वेब सीरीज जैसे एंटरटेनमेंट के नए माध्यम में एंट्री ले चुके हैं. अनुराग कश्यप, जोया अख्तर, करण जौहर सहित इंडस्ट्री के कई नामी निर्देशक वेब सीरीज में हाथ आजमा रहे हैं.

The Forgotten Army कहानी है नेता जी सुभाष चंद्र बोस द्वारा बनाई गई आजाद हिंद फौज की. इस वेब सीरीज का पूरा नाम है 'द फॉरगॉटेन आर्मी: आजादी के लिए'. नाम से ही जाहिर है कि इसमें आजाद हिंद फौज द्वारा भारत की आजादी के लिए दिए गए बलिदान को याद किया गया है. निर्देशक कबीर खान के मुताबिक इस प्रोजेक्ट का विचार उनके दिमाग में करीब दो दशकों से चल रहा था जो अब जाकर पूरा हो पाया है.



इस वेब सीरीज की शूटिंग में करीब तीन साल का वक्त लगा है. फिल्म में कैप्टन अमरिंदर सिंह सोढी (सन्नी कौशल) की जिंदगी को दो समय काल में दिखाया गया है.पहला टाइम फ्रेम  द्वितीय विश्व युद्ध के समय अमरिंदर सिंह को सिंगापुर में युद्ध के दौरान जापानी सेना द्वारा पकड़ लिया जाता है. अमरिंदर तब ब्रिटिश इंडियन आर्मी का सदस्य होता है जो जापान के खिलाफ युद्ध कर रहा होता है. फिर जापान में ही सुभाष चंद्र बोस का एक शानदार भाषण सुनने के बाद वो आजाद हिंद फौज में शामिल होने का फैसला करता है. दूसरा टाइम फ्रेम 1996 की कहानी कहता है जब वृद्ध हो चुका अमरिंदर सिंगापुर में अपने परिवार से मिलने गया होता है. अपने पोते से बातचीत के दौरान वो आजाद हिंद फौज की अपनी पूरी कहानी याद करता है. फिल्म में शाहरुख खान का वॉइस ओवर है.

भुला दिए गए संघर्ष की दास्तान
इस फिल्म में निर्देशक कबीर खान ने आजाद हिंद फौज के सैनकों की जिंदगी की मुश्किलें, त्रासदी और यातनाएं दिखाने की कोशिश की हैं. ऐसे सैनिक जो बेहद कम सुविधाओं और संसाधनों के साथ बड़ी लड़ाई लड़ रहे थे. बाद में इन सैनिकों पर देश से गद्दारी का केस भी चलता है और उन्हें पेंशन भी नहीं मिली जो दूसरे स्वतंत्रता सेनानियों को मिली. पूरी फिल्म देश को एक रहने का संदेश देती है. अनेकता में एकता जैसे कॉन्सेप्ट पर देशवासियों को एक रहने का संदेश देती है.

माया श्रीनिवासन का रोल शरवरी वाघ ने निभाया है.
माया श्रीनिवासन का रोल शरवरी वाघ ने निभाया है.
प्रेम कहानी
इस सबके बीच आजाद हिंद फौज की महिला ब्रिगेड की सदस्य माया श्रीनिवासन (शरवरी वाग) के साथ अमरिंदर सिंह सोढी की प्रेम कहानी भी दिखाई गई है. फिल्म के ट्रेलर में एक बेदह अर्थपूर्ण वाक्य सुनाई दिया था वो माया श्रीनिवासन ही बोलती है. माया सैनिकों से कहती सुनाई देती है-आज़ाद हिंद फौज में शामिल होने के लिए किसी जाति, नस्ल और धर्म की जरूरत नहीं. यानी आजाद हिंद फौज में सैनिक होने के लिए सिर्फ हिंदुस्तानी होने की और हिंदुस्तान के लिए लड़ने की जरूरत है.

दरअसल ये सीरीज सिर्फ उस वक्त की आजाद हिंद फौज की कहानी भर नहीं है बल्कि ये आज के भारत के लिए भी संदेश है. इस वेब सीरीज के ट्रेलर को भी खूब पसंद किया गया था और सोशल मीडिया पर इसे काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिला है. सीरीज में कई जबरदस्त युद्ध के सीन हैं. ये आजाद हिंद फौज की वो अनसुनी दास्तां सुनाती है जो शायद वक्त में कहीं काफी पीछे छूट गई है. अगर आपके पास अमेजन प्राइम की मेंबरशिप है तो इस वेब सीरीज को यहां क्लिक कर देख सकते हैं.
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First published: January 24, 2020, 6:27 PM IST
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