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स्थापना दिवस विशेषः जब कांग्रेस के संस्थापक को सात दिनों तक पहननी पड़ी थी साड़ी!

कांग्रेस के संस्थापक थे ए ओ ह्यूम, photo- news18hindi

कांग्रेस के संस्थापक थे ए ओ ह्यूम, photo- news18hindi

उन दिनों ह्यूम इटावा के जिला अधिकारी थे. इटावा में मौजूद ब्रिटिश सेना के भारतीय सिपाहियों ने ह्यूम पर हमला करने का प्लान बनाया. लेकिन ह्यूम को यह पहले ही पता चल गया.

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    कांग्रेस शुक्रवार को अपना 134वां स्थापना दिवस मना रही है. 28 दिसंबर 1885 को एओ ह्यूम ने कांग्रेस पार्टी की स्थापना की थी. अधिकतर लोग उन्हें इसीलिए जानते हैं. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि ह्यूम पेड़-पौधों और पक्षियों को पढ़ने में काफी दिलचस्पी रखते थे. उनसे जुड़ा एक मशहूर वाकया है कि सिपाहियों की गोली बचने के लिए वह सात दिनों तक एक गुप्त स्थान पर छिपकर रहे थे. इस दौरान वह साड़ी पहनकर महिला के भेष में रहे थे ताकि कोई उन्हें पहचान न सके.

    क्यों एओ ह्यूम की जान के पीछे पड़े थे सैनिक:
    ह्यूम 1849 में भारत आए थे. वो ब्रिटिश सरकार के कर्मचारी थे इसीलिए उन्हें भारत में पोस्टिंग दी गई थी. भारत आते ही उन्हें बंगाल सिविल सर्विस के तहत उत्तर-पश्चिम प्रोविंस के इटावा जिले में भेजा गया. अब यह जिला उत्तर प्रदेश में आता है. यहां 1849 से लेकर 1867 तक वो जिला अधिकारी रहे. उनके कार्यकाल के दौरान ही 1857 में भारत के पहले स्वतंत्रता संग्राम का बिगुल बजा.

    इटावा से कुछ दूर स्थित मेरठ में ही सैनिकों का पहला विद्रोह हुआ था. ब्रिटिश सेना में बहुत से भारतीय सैनिक थे और उन्हें पता चला था कि उनको दी जाने वाली बंदूकों के कारतूसों में गाय और सूअर की चर्बी का प्रयोग होता है. विद्रोह का कारण यही बना था.

    1857 के विद्रोह के समय ह्यूम इटावा के जिला अधिकारी थे


    मेरठ के आस-पास के सभी जिलों को ब्रिटिश सरकार ने असुरक्षित घोषित कर दिया था. इटावा में मौजूद ब्रिटिश सेना के भारतीय सिपाहियों ने ह्यूम पर हमला करने का प्लान बनाया. लेकिन ह्यूम को यह पहले ही पता चल गया. इसीलिए उन्होंने अपने घर से निकलकर किसी सुरक्षित स्थान पर छुपने का फैसला किया. इसके लिए उन्होंने साड़ी पहनी और गांव की महिला का भेष बनाकर सिपाहियों से बचकर भाग निकले. इटावा से वो आगरा की ओर गए और एक सुरक्षित जगह पर करीब 7 दिनों तक छुपकर रहे. यहां से वो आगरा के किले में करीब 6 महीनों तक शरणार्थी बनकर रहे थे.

    इटावा में बनाया जुविनाइल सुधारगृह:

    ह्यूम हमेशा सुधार का प्रयास करते रहे. जब वो इटावा में जिला अधिकारी थे तो उन्होंने प्राइमरी शिक्षा को मुफ्त में सभी के लिए उपलब्ध करवा दिया. पुलिस विभाग में भी उन्होंने सुधार किए और कानूनी विभाग को सही तरीके से चलने के लिए भी कुछ बदलाव किए.

    उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए स्कॉलरशिप भी बनाईं. 1863 में उन्होंने 18 साल से कम उम्र के कैदियों को जेल भेजने की बजाय उनके लिए जुविनाइल रिफार्मेटरी की स्थापना की. इटावा में ही उन्होंने मुफ्त में शिक्षा देने वाले स्कूल बनाए और 1857 तक वो 181 स्कूल बना चुके थे जिनमें 5 हजार से ज्यादा छात्र पढ़ रहे थे.

    पक्षियों, जानवरों और पौधों का बहुत विशाल कलेक्शन:

    ह्यूम को पक्षियों के पंख इकठ्ठा करने का बहुत शौक था. उन्होंने इस विषय पर किताब भी लिखी जहां हजारों अलग-अलग प्रजातियों का जिक्र है. ये 82 हजार स्पेसिमेन ब्रिटिश म्यूसियम को भेंट में दे दिए गए.

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