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जब राफेल बनाने वाली कंपनी के मालिक को हिटलर ने बना लिया था बंदी

News18Hindi
Updated: December 14, 2018, 10:57 AM IST
जब राफेल बनाने वाली कंपनी के मालिक को हिटलर ने बना लिया था बंदी
राफेल की फाइल फोटो- AP

दसो का ज्यादातर कंट्रोल फ्रांस की सरकार के हाथ में है. कंपनी का मुख्यालय पेरिस में है. लेकिन रोचक बात यह है कि इस कंपनी का फ्रांस में कोई भी सर्विस सेंटर नहीं है.

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  • Last Updated: December 14, 2018, 10:57 AM IST
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दसो एविएशन के साथ भारत के 36 लड़ाकू रॉफेल विमानों का सौदा फिलहाल सवालों के घेरे में है. लेकिन फ्रांस बेस्ड दुनिया की इस सबसे पुरानी एविएशन कंपनी से जुड़े कई रोचक तथ्य हैं जिन्हें जानना आपके लिए खासा रोचक अनुभव होगा. वैसे फ्रांस की इस कंपनी के बारे में सबसे मजे कि बात तो ये है कि ज्यादातर लोग कंपनी का नाम गलत लेते हैं. दसो नाम की इस कंपनी को लोग दसॉल्ट, दसाल्ट, डेसॉल्ट, डेसाल्ट आदि नामों से पुकारते हैं. हालांकि इसका सबसे सही उच्चारण दसो या फिर दसॉ होगा. फ्रेंच में जैसा लिखा जाता है, वैसा बोला नहीं जाता. और इस नाम में आखिरी का L और T साइलेंट होता है. दसों के बारे में और रोचक तथ्य ये हैं -

@ ये दुनिया की सबसे पुरानी एविएशन कंपनियों में से एक है. इस कंपनी की स्थापना 1929 में हुई थी. उस वक्त तक एयरोप्लेन का विकास हो ही रहा था. लेकिन दसो के साथ स्थापित बाकी कंपनियों की तुलना की जाये तो उनमें से ज्यादातर बंद हो चुकी हैं. दसो अपने अच्छे उत्पादों के चलते ही आज तक टिकी हुई है.

@ कम से कम 83 देशों में दसो के प्रॉडक्ट कभी न कभी प्रयोग हो चुके हैं. ऐसे दुनिया में बहुत कम ही कंपनियां हैं जिनके पास ऐसा कोई रिकॉर्ड हो. कंपनी के कुल बिजनेस का 60 फीसदी केवल जेट विमानों के बिजनेस से आता है.

@ एयरक्राफ्ट्स के साथ ही कंपनी अंतरिक्ष यात्रा के उपकरण और रक्षा उपकरण भी बनाती है. इसके अलावा रडार और दूसरे लड़ाकू उपकरण भी यह कंपनी बनाती है.

@ जेट बनाने के अलावा एविएशन के कई क्षेत्रों में काम करती हैं दसो की सहयोगी कंपनियां. दसो स्पेस में भी हाथ आजमा रही है. इसके लिए लगातार प्रयोग चल रहे हैं.

@ दसो का ज्यादातर कंट्रोल फ्रांस की सरकार के हाथ में है. कंपनी का मुख्यालय पेरिस में है. लेकिन रोचक बात यह है कि इस कंपनी का फ्रांस में कोई भी सर्विस सेंटर नहीं है. यह चौंकाता है कि जहां कंपनी की स्थापना हुई, जहां उसका ज्यादातर इतिहास रहा है, वहां उसका कोई सर्विस सेंटर नहीं है.

@ दसो मात्र 4 देशों में अपनी हवाई सेवाएं देती है. ये देश हैं, अमेरिका, ब्राजील, चीन और जापान. हालांकि कंपनी का जुड़ाव 83 देशों से रहा है.@ वैसे लोग यही मानते हैं कि 'एयरबस' एक इंग्लैंड की कंपनी है. वे यह नहीं जानते कि दसो, एयरबस की पेरेंट कंपनी है. हालांकि दसो के पास एयरबस के सारे शेयर तो नहीं है लेकिन जब एयरबस आर्थिक रूप से कमजोर हो चुकी थी, दसो ने इसमें इंवेस्ट कर इसे बचाया था.

@ 1920 में कंपनी की स्थापना करने वाले मार्शेल ब्लॉच दूसरे विश्व युद्ध के दौरान पकड़ लिए गए थे. वे जर्मनी के कंसंट्रेशन कैंप में तब तक कैदी के रूप में रहे थे जब तक 1945 में मित्र देशों की फौज ने उन्हें नहीं छुड़ाया. इस दौरान कंपनी का कारोबार ही नहीं फ्रांस की हवाई शक्ति भी प्रभावित रही. लेकिन मार्शेल के बचने के बाद कंपनी न केवल बची बल्कि उसने दुनिया में एक नई पहचान भी बनाई.

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First published: December 14, 2018, 9:20 AM IST
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