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'द ग्रेट बनियन ट्री' को 1787 में लाया गया था हावड़ा, देश में और भी हैं बरगद के विशाल पेड़

News18Hindi
Updated: May 23, 2020, 2:21 PM IST
'द ग्रेट बनियन ट्री' को 1787 में लाया गया था हावड़ा, देश में और भी हैं बरगद के विशाल पेड़
सुुपर साइक्‍लोन अम्‍फान ने 270 साल पुराने देश के सबसे विशाल बरगद के पेड़ को काफी नुकसान पहुंचाया है.

पश्चिम बंगाल के हावड़ा में आचार्य जगदीशचंद्र बोस इंडियन बॉटेनिकल गार्डन में लगे 'द ग्रेट बनियन ट्री' को चक्रवाती तूफान अम्‍फान (Cyclone Amphan) से काफी नुकसान हुआ है. इसका उत्तर पश्चिम भाग खाली दिख रहा है. आइए जानते हैं कि इस विशाल पेड़ की खूबियां और देश में कहां-कहां मौजूद हैं ऐसे ही विशाल वृक्ष...

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पश्चिम बंगाल में सुपर साइक्लोन अम्फान (Super Cyclone Amphan) ने काफी तबाही मचाई है. इस तूफान ने 270 साल से हावड़ा के आचार्य जगदीशचंद्र बोस इंडियन बॉटेनिकल गार्डन में लगे दुनिया के सबसे विशाल बरगद के पेड़ (The Great Banyan Tree) को भी काफी नुकसान पहुंचाया है. तूफान में इस पेड़ की कई जड़ें उखड़ गई हैं. करीब 4.67 एकड़ में फैले इस पेड़ की जड़ें उखड़ने के चलते इसका उत्तर पश्चिम भाग खाली दिख रहा है. हालांकि, नुकसान का सही आकलन एक दो दिन में हो पाएगा. बता दें कि ये पेड़ आइला, फानी और बुलबुल जैसे कई तूफानों को झेलने के बाद भी अडिग रहा, लेकिन इस बार इसे काफी नुकसान हुआ है. ये पेड़ गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल है. 'द ग्रेट बनियन ट्री' के नाम से भी पहचाने जाने वाले इस पेड़ को 1787 में यहां स्थापित किया गया था. उस समय इसकी उम्र करीब 20 साल थी. इस पेड़ की इतनी जड़ें और शाखाएं हैं कि इससे पूरा जंगल ही बस गया है.

पेड़ पर 85 से ज्‍यादा पक्षियों की प्रजातियों का है बसेरा
'द ग्रेट बनियन ट्री' दुनिया का सबसे चौड़ा पेड़ है, जो 14,500 वर्ग मीटर में फैला है. इस पेड़ की शाखाओं (Branches) से निकलीं जटाएं पानी की तलाश में जमीन में नीचे की ओर बढ़ती गईं. फिर धीरे-धीरे यह पेड़ जंगल (Small Forest) में बदलता चला गया. इसकी 3,350 से ज्‍यादा जटाएं अब तक जड़ का रूप ले चुकी हैं. अम्‍फान से पहले 1884 और 1925 में आए चक्रवाती तूफानों ने इस पेड़ को काफी नुकसान पहुंचाया था. उस समय कई शाखाओं को फफूंद (Fungus) लगने के बाद काट दिया गया था. इस पेड़ पर 85 से ज्‍यादा पक्षियों की प्रजातियों का बसेरा है. इसकी सबसे ऊंची शाखा की लंबाई या कहें इस पेड़ की ऊंचाई 24 मीटर है. इस विशाल बरगद के सम्मान में भारत सरकार ने 1987 में डाक टिकट जारी किया था. बाद में ये विशाल बरगद का पेड़ बॉटेनिकल सर्वे ऑफ इंडिया (BSI) का प्रतीक चिह्न भी बनाया गया.

बेंगलुरु के रामोहल्‍ली में 'डोड्डा अलाडा मारा' नाम से बरगद का विशाल पेड़ है. इसे करीब 400 साल पुराना बताया जाता है.




जिधर प्रदूषण, उस तरफ नहीं बढ़ता है 'द ग्रेट बनियन ट्री'


इस पेड़ को 'द ग्रेट बनियन ट्री' के साथ ही 'वॉकिंग ट्री' (Walking tree) भी कहते हैं. इस पेड़ के बारे में कहा जाता है कि जिधर प्रदूषण (Pollution) होता है उस तरफ ये नहीं बढ़ता है. इसलिए हावड़ा में यह पूर्व की ओर बढ़ रहा है. इसी तरफ इसकी ग्रोथ भी ज्‍यादा हुई है. दरअसल, जब 1985 में इसके चारों ओर कंटीली बाड़ लगाने के कुछ साल बाद इसके बढ़ने की दिशा का सही-सही पता लगा. इसकी देखभाल के लिए करीब 13 लोगों को नियुक्त किया गया है. इनमें चार सीनियर बॉटेनिस्ट और बाकी प्रशिक्षित माली हैं. इसकी शाखाएं नीचे की ओर बढ़ने के कारण पूरी टीम के लिए इसे संभालना बड़ी चुनौती के जैसा है. इसकी ग्रोथ एक ओर अधिक हो रही है. ऐसे में इसका संतुलन बनाए रखते हुए इसे सीधा रखना भी बड़ी चुनौती है. इस पेड़ का कुल क्षेत्रफल 4.67 एकड़ है.

गिनीज बुक में दर्ज हो चुका है 'थियम्‍मा मरयमनू' का नाम
हावड़ा के 'द ग्रेट बनियन ट्री' के अलावा भारत में कई जगह और भी विशाल बरगद के पेड़ हैं. इनमें कोई 800 साल पुराना है तो कोई 500 साल से अपनी जगह अडिग खड़ा है. ऐसा ही एक बरगद का पेड़ आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) के अनंतपुर जिले में है. इसके नाम भी दुनिया के विशाल बरगद के पेड़ का रिकॉर्ड दर्ज रहा है. इसे लोग थियम्‍मा मरियमनू के नाम से पहचानते हैं. ये पेड़ 4.721 वर्ग एकड़ में फैला है. इस पेड़ को 1989 में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्‍ड रिकॉर्ड में दुनिया के सबसे बड़े पेड़ के तौर पर दर्ज किया गया था. बेंगलुरु के रामोहल्‍ली में 'डोड्डा अलाडा मारा' नाम से बरगद का विशाल पेड़ है. इसे करीब 400 साल पुराना बताया जाता है. इसकी भी हजारों शाखाएं अब जड़ों में तब्‍दील हो चुकी हैं.

राजस्‍थान के रणथम्‍बोर नेशनल पार्क में मौजूद गिगनैटिक बनियन ट्री को देश का दूसरा सबसे बड़ा बरगद का पेड़ माना जाता है.


रणथम्‍बोर में है देश का दूसरा सबसे बड़ा बरगद का पेड़
गुजरात के भरूच जिले में नर्मदा नदी किनारे कबीरवाद आइलैंड में भी एक विशाल बरगद का पेड़ है. ये 4.33 वर्ग एकड़ में फैला है. इसे करीब 300 साल पुराना पेड़ बताया जाता है. इस पेड़ के कारण अच्‍छा खासा बड़ा बगीचा तैयार हो गया है. पुरी के जगन्‍नाथ मंदिर में मौजूद विशाल बरगद के पेड़ को लोग कल्‍पवट भी कहते हैं. उत्‍तर प्रदेश के लखनऊ के नजदीक माझी का बरगद का पेड़ भी काफी विशाल है. तेलंगाना के महबूबनगर जिले में 'पिल्‍लामारी' नाम से विशाल बरगद का पेड़ है, जिसे 800 साल से भी ज्‍यादा पुराना बताया जाता है. चेन्‍नई में अदयार नाम से बरगद का पेड़ है. ये पेड़ 450 साल से ज्‍यादा समय से अपनी जगह अडिग खड़ा है. राजस्‍थान के रणथम्‍बोर नेशनल पार्क में मौजूद गिगनैटिक बनियन ट्री को देश का दूसरा सबसे बड़ा बरगद का पेड़ माना जाता है.

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First published: May 23, 2020, 2:20 PM IST
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