समुद्री डाकुओं के लिए जन्नत है ये खाड़ी, हमले और फिरौती से करते हैं करोड़ों-अरबों की कमाई

पश्चिम अफ्रीका देशों 6000 मील का इलाका गल्फ ऑफ गिनीया कहलाता है, ये खाड़ी कई अफ्रीकी देशों को छूती है. लेकिन आमतौर पर इन सभी देशों में अव्यवस्था है और कमजोर, भ्रष्ट सरकारें काबिज हैं, जो समुद्री डाकुओं के लिए मुफीद साबित होती रही हैं

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: July 28, 2019, 9:40 PM IST
समुद्री डाकुओं के लिए जन्नत है ये खाड़ी, हमले और फिरौती से करते हैं करोड़ों-अरबों की कमाई
गिनीया की खाड़ी में समुद्री डाकू
Sanjay Srivastava
Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: July 28, 2019, 9:40 PM IST
दुनिया का एक ऐसा इलाका है, जिसे अब समुद्री डाकुओं का स्वर्ग कहा जाता है. पश्चिमी अफ्रीका का ये इलाका करीब 6000 मील में फैला हुआ है. इसमें कई देश आते हैं. ये इलाका अब समुद्री डाकुओं के मामले में गिनीया की खाड़ी के नाम से बदनाम हो रहा है. इस खाड़ी से बड़ी संख्या में जहाज गुजरते हैं और वो इन पायरेट्स के शिकार होते हैं. हमलों की संख्या लगातार बढ रही हैं. लूट और अपहरण के जरिए समुद्री डाकू करोड़ों अरबों रुपए कमाते हैं और शानदार जीवन जीते हैं.

कुछ साल पहले दुनिया में सोमालिया के समुद्री डाकुओं का कहर था. वो ईडन की खाड़ी की ओर से गुजरने वाले जहाजों को अपना निशाना बनाते थे. जहाजों के साथ उनके स्टाफ को सोमालिया के करीब ऐसे इलाकों पर ले जाते थे, जहां कहीं का कोई कानून लागू नहीं होता था. फिर वो मोटी फिरौती की रकम मांगते थे.

बाद में कई देशों की नौसेनाओं ने एक साथ आपरेशन चलाकर सोमालिया के समुद्री डाकुओं के खतरे को करीब करीब खत्म कर दिया लेकिन अब गिनीया की खाड़ी में पायरेट्स का जो खतरा पैदा हुआ है, उसके सामने बड़ी बड़ी जहाज कंपनियां और देश लाचार महसूस कर रहे हैं. इनपर कैसे रोकथाम लगाया जाए, ये किसी की समझ में नहीं आ रहा है.

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कई पायरेट ग्रुप सक्रिय, नेताओं की मिलीभगत भी
ये भी माना जाता है कि गिनीया की खाड़ी में जो भी पायरेट्स के ग्रुप सक्रिय हैं, उन्हें कहीं ना कहीं उनके देशों में नेताओं, पुलिस और सैन्य अधिकारियों का प्रश्रय मिला हुआ है, क्योंकि ये भी कहा जाता है कि लूट की रकम का एक हिस्सा उन तक भी पहुंचता है और उनकी समृद्धि को बढाने का काम करता है.

ये है पश्चिमी अफ्रीका का गिनीया खाड़ी का इलाका

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सबसे पहले हम ये जानते हैं कि गिनीया की खाड़ी कहां है और इस खाड़ी से अफ्रीका के कौन से देश जुड़े हुए हैं. गिनीया की खाड़ी कैमरून, नाइजीरिया, अंगोला, सेनेगल समेत कई अफ्रीकी देशों का समुद्री छोर है. इनमें ज्यादा अस्थिर और भ्रष्ट सरकारों का राज है. जिनका तंत्र भी लुंज-पुंज है. लिहाजा अपराधियों की एक समांतर व्यवस्था पुलिस और सेना की शह से फलती फूलती है.

पायरेसी बनी सोने का अंडा देने वाली मुर्गी
गिनीया की खाड़ी के अधिकांश अफ्रीकी देशों में गरीबी है, बेरोजगारी है, खाने के सामानों की कमी और अव्यवस्था का बोलबाला है. ऐसे में यहां के पढ़े लिखे नौजवानों के पायरेसी एक ऐसी सोने का अंडा देने वाली मुर्गी बन गई है, जो रोज उन्हें फायदा करा रही है.

माना जाता है कि गिनीया की खाड़ी में एक दो नहीं बल्कि कई ग्रुप और हजारों पायरेट्स सक्रिय हैं. खाड़ी से लगे किसी भी देश में अब तक समुद्री लूट से संबंधित कानून नहीं बना है, जो यहां के पायरेट्स के लिए मुफीद साबित हो रहा है. वो अगर पकड़े भी जाते हैं तो आराम से कुछ दिनों में छूट जाते हैं. रिपोर्ट्स ये बताती हैं कि पायरेसी से यहां का एक वर्ग काफी फल-फूल रहा है. इसीलिए इस पूरे इलाके को अब दुनिया में पायरेट्स का स्वर्ग कहा जाने लगा है.

गिनीया की खाड़ी में कई अफ्रीकी देशों के सैकड़ों-हजारों बेरोजगार युवक अब पायरेट्स बनकर मोटा पैसा पीट रहे हैं


इंटरनेट और तकनीके के इस्तेमाल में माहिर 
गिनीया की खाड़ी और सोमालिया के पायरेट्स के बीच यही अंतर है कि सोमालिया के समुद्री लुटेरे जहाजियों को बंधक बनाकर लाखों-करोड़ें में मोटी फिरौती वसूल करते थे जबकि गिनीयी की खाड़ी पायरेट्स हजारों डॉलर में भी सौदा कर लेते हैं.

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ये ज्यादा स्मार्ट हैं. इंटरनेट और तकनीक का पूरा फायदा लेते हैं. आमतौर पर ये पायरेट्स जहाज पर हमला करने के बाद स्टाफ को अपने साथ लेकर चले जाते हैं. उन्हें बंधक बनाकर छिपा देते हैं. फिर उनके परिजनों से फिरौती मांगते हैं. पिछले साल उन्होंने 193 लोगों को अगवा किया. उसमें भारतीय जहाजी भी थे.

इंटरनेशऩल समुद्री ब्यूरो का कहना है कि पिछले साल पश्चिमी अफ्रीका के आइवरी कोस्ट और कैमरून के बीच 72 हमले हुए. हालांकि दूसरे सूत्र कहते हैं कि इस पूरे इलाके में सालभर में कहीं ज्यादा हमले होते हैं, जिसमें से ज्यादा दर्ज ही नहीं होते.

कभी सोमालिया बदनाम था लेकिन अब कम हुई वहां लूटपाट
वैसे पूरी दुनिया में हाल के बरसों में समुद्री लूटपाट कम हुई है. एक जमाने में कुख्यात सोमालिया में पिछले साल केवल तीन समुद्री लूट के मामले दर्ज हुए. सोमालिया 2007 से 2012 के बीच पायरेट्स के मामले में दुनिया का सबसे कुख्यात इलाका था. लेकिन कई देशों की सामूहिक कार्रवाई और पेट्रोलिंग के बाद अब वहां ये समस्या खत्म हो चुकी है. सोमालिया के समुद्री दस्युओं ने बड़े पैमाने पर लोगों का ध्यान खींचा था. इस पर फिल्में भी बनीं थीं.

ये छोटी और तेज नौकाओं या स्टीमर्स से चलते हैं और एके-47 रायफल्स या चाकुओं से लैस रहते हैं


दक्षिण पूर्वी एशिया में भी था समुद्री लुटेरों का आतंक
सोमालिया के बाद पायरेट्स के मामले में दक्षिण पूर्वी एशिया में समुद्री लुटेरों का आतंक मचा था लेकिन वो भी करीब करीब खत्म होने की ओर है. हालांकि जहाज के मालिकों ने प्राइवेट आर्म गार्ड रखने शुरू कर दिये हैं, जिससे उनके जहाजों की रक्षा हो सके लेकिन इससे भी शिपिंग कंपनियों का डर खत्म नहीं हो रहा है. हालांकि जहाज पर प्राइवेट गार्डों की सेवाएं लेना एक शिपिंग कंपनियों के लिए काफी महंगा भी साबित हो रहा है

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तेल टैंकर भी बेच देते हैं
गिनीया की खाड़ी के लुटेरे मुख्य तौर पर जहाजियों के अपहरण का काम करते हैं लेकिन अगर उन्हें तेल टैंकर और कार्गो मिल गए तो उन्हें लपेटे में लेते हैं. खाड़ी में कई ऐसी पार्टियां और देश हैं, जो उनसे हाथों-हाथ सस्ते में तेल खरीद लेती हैं.

किस तरह काम करते हैं
पश्चिमी अफ्रीका यानि गिनीया की खाड़ी में सक्रिय पायरेट्स छोटी तेज नावों और स्टीमर्स में चलते हैं. वो एक-47 रायफल्स और चाकुओं से लैस रहते हैं. जहाज के पास पहुंच कर तेजी से सीढियां लगाकर जहाज के डैक पर पहुंच जाते हैं. पहले ये आमतौर पर आयल टैंकर्स और कार्गो पर ही हमला करते थे, उन्हें ब्लैक मार्केट में बेच देते थे. जब 2015 में तेल के दाम गिर गए तो उन्होंने जहाजों और क्रू को अगवा करना शुरू किया. हालांकि अब वो अपने पुराने काम पर फिर वापस लौट रहे हैं.

क्यों सरकारें निपटने में नहीं लेतीं दिलचस्पी
शिपिंग कंपनियों की शिकायत रहती है कि पश्चिमी अफ्रीकी देशों की सरकार इन लुटेरों से निपटने में कोई दिलचस्पी नहीं लेतीं, क्योंकि इनमें से कई ग्रुप्स की मिलीभगत खुद उनके मंत्रियों और नेताओं से रहती है.  कुछ का ये भी कहना है कि पायरेट्स की मिलीभगत अपने देश की नौसेना के अधिकारियों से भी होती है. उन्हें इसीलिए कई बार मालूम हो जाता है कि कब नौसेना उन पर कार्रवाई कर सकती है. लिहाजा वो पहले से भाग जाते हैं.

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First published: July 28, 2019, 6:19 PM IST
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