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अगस्त का वो दिन जब जिन्ना ने आखिरी बार दिल्ली को देखा और विदा हो गए

अगस्त का वो दिन जब जिन्ना ने आखिरी बार दिल्ली को देखा और विदा हो गए

कैसा रहा भारत में मोहम्मद अली जिन्ना का आखिरी दिन (फाइल फोटो)

कैसा रहा भारत में मोहम्मद अली जिन्ना का आखिरी दिन (फाइल फोटो)

75 साल पहले ही पाकिस्तान को बनाने वाले मोहम्मद अली जिन्ना ने भारत की धरती से हमेशा के लिए विदा ले ली. दिल्ली से उनका विमान अगस्त के पहले हफ्ते के सातवें दिन विदा हुआ. इसके बाद वह चाहकर भी कभी भारत लौट नहीं सके. हालांकि उन्होंने अपनी बेटी को भी पाकिस्तान चलने के लिए कहा लेकिन उसने साफ मना कर दिया.

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07 अगस्त 1947 को उमस से बेचैन होती दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर एक डकोटा विमान तैयार खड़ा था. मंजिल थी कराची. शाम का समय था. ये विमान उस शख्स का इंतजार कर रहा था, जो इस देश के बंटवारे के लिए असल में जिम्मेवार था. भारत की धरती पर ये उसका आखिरी दिन था. उसके बाद उसको कभी उस जमीन पर नहीं लौटना था, जहां उसका जन्म हुआ था, जिसने उसे पहचान दी थी.

शाम तीन से चार बजे के बीच 10, औरंगजेब रोड से एक कार निकली और पालम एयरपोर्ट के लिए सड़कों पर भागने लगी. इस कार में ड्राइवर के अलावा दो ही लोग थे. ये कार रामकृष्ण डालमिया ने खासतौर पर इस शख्स को एयरपोर्ट तक छोड़ने के लिए भेजी थी. कार में सवार ये शख्स मोहम्मद अली जिन्ना थे. उनके साथ थीं उनकी बहन फातिमा जिन्ना.

दिल्ली से गुपचुप विदाई
जब वो पालम पहुंचे तो उम्मीद के प्रतिकूल चंद लोग उन्हें अलविदा कहने आए थे. एयरपोर्ट शांत था. जिन्ना ने उन्हें विदा कहने आए लोगों से हाथ मिलाया और तेज कदमों से सुनहरे रंग के डकोटा की ओर बढ़ गए. ये रॉयल एयरफोर्स ब्रिटेन का विमान था, जो उन्हें ले जाने वाला था. जिन्ना से तेजी से विमान की सीढ़ियां चढ़ीं और फिर दरवाजे से पलटकर वहां से नजर आती दिल्ली को देखा. वो अपनी सीट की ओर बढ़े. जब तक विमान हवा में रहा, उनकी निगाह दिल्ली का पीछा करती रही. दिल्ली की इमारतें जब छोटी होती हुई ढेरों बिंदुओं में बदल गईं. तो वो बुदबुदाए- ये भी खत्म हो गया. फिर पूरी यात्रा वो कुछ नहीं बोले.

जिन्ना उस दिन अपनी बहन फातिमा के साथ कराची के लिए विदा हुए

71 वर्षीय मोहम्मद अली जिन्ना देश के बंटवारे के बाद भारत से निकले नए देश पाकिस्तान की अगुवाई करने वाले थे. बंटवारे के बाद भारत- पाकिस्तान में मारकाट मची थी. लाखों शरणार्थी अपने जमीन को छोड़कर दूसरे वतन में जा रहे थे.

भारत में आखिरी दिन कुछ बिजी था
जिन्ना का ये दिन काफी व्यस्तताओं के बीच बीता. कराची रवाना होने से पहले जिन्ना दिल्ली का अपना मकान 10, औरंगजेब रोड (अब एपीजे कलाम रोड) को उद्योगपति राम कृष्ण डालमिया को तीन लाख रुपए में बेच चुके थे. हालांकि डालमिया ने भी बाद में ये मकान डच दूतावास को बेच दिया. इन दिनों में उसमें डच एंबेसडर रहते हैं. दिन में वो कई लोगों से मिले. डालमिया भी उनसे मिलने आए. उनकी बेटी उस दिन मुंबई में ही थी. लेकिन ना तो उनकी उससे बात ही हुई और ना ही वो उनसे मिली आई. बेटी से वो नाराज जरूर थे, क्योंकि उसने उनकी मर्जी के खिलाफ नेविले वाडिया से शादी कर ली थी. उसने उनके साथ पाकिस्तान जाने से साफ मना कर दिया था.

जिन्ना ने जाते समय अपना दिल्ली का ये मकान उद्योगपति रामकृष्ण डालमिया को बेचा

माउंटबेटन ने दो उपहार दिए थे
जिन्ना को भारत छोडऩे से पहले लार्ड माउंटबेटन से दो उपहार मिले. एक तो उन्होंने अपना एडीसी एहसान अली उन्हें सुपुर्द किया, जो पाकिस्तान जाकर जिन्ना के रोजाना के कामकाज का हिस्सा बनने वाला था. साथ ही बेटन ने अपनी रॉल्स रॉयल्स कार भी उन्हें उपहार में दी.

कराची में जिन्ना से मिलने के लिए भारी संख्या में भीड़ इकट्ठा थी

कराची में अलग था माहौल
विमान सीधे मौरीपुर (मसरूर) में उतरा, जो कराची की हवाई पट्टी थी. जहां जिन्ना दिल्ली से चुपचाप और बगैर गहमागहमी के विदा हुए थे, वहीं कराची की इस हवाई पट्टी पर उनके स्वागत के लिए 50 हजार से ज्यादा लोग इकट्ठा थे. कायदे आजम जिंदाबाद, पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लग रहे थे. इसके बाद हवाई अड्डे से उनका काफिला कराची की सडक़ों पर निकला. सडक़ों के दोनों ओर लोग उनके स्वागत के लिए इकट्ठा थे. जिन्ना ये सोचकर मुंबई का मकान छोड़ गए थे कि वो कभी वहां फिर वापस लौट सकेंगे. लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ.

Tags: 75th Independence Day, Independence day, Jinnah, Mohammad Ali Jinnah

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