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वो महाराजा, जिसके थे 88 बच्चे, जिसकी शानोशौकत के थे विदेशों में चर्चे

News18Hindi
Updated: January 30, 2020, 6:09 PM IST
वो महाराजा, जिसके थे 88 बच्चे, जिसकी शानोशौकत के थे विदेशों में चर्चे
महाराजा पटियाला अपनी तड़क-भड़क और लग्जरी लाइफ स्टाइल के लिए जाने जाते थे

पटियाला के महाराजा देश के उन राजाओं में थे जो अंग्रेजों के शासनकाल में पूरे ठाट-बाट से रहते थे. जब वो चलते थे तो उनके काफिले में कम से कम 22 रोल्स रॉयस कारें होती थीं. वो देश के पहले व्यक्ति थे, जिनके पास अपना खुद का विमान था. महाराजा की कई रानियां और उपरानियां थीं, जिसमें कई विदेशी सुंदरियां भी थीं

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  • Last Updated: January 30, 2020, 6:09 PM IST
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आजादी से पहले देश में जो धनी रियासतें थीं, उसमें पटियाला राजघराना सबसे ऊपर था. महाराजा भूपिंदर सिंह देश के पहले शख्स थे, जिनके पास अपना प्राइवेट प्लेन था. महाराजा की लाइफ स्टाइल ऐसी थी कि अंग्रेज भी उनसे रश्क करते थे. वो जब विदेश जाते थे तो पूरा का पूरा होटल किराए पर लेते थे. उनके पास 44 रोल्स रॉयस थीं जिनमें से 20 रोल्स रॉयस का काफिला रोजमर्रा में सिर्फ राज्य के दौरे के लिए इस्तेमाल होता था.

महाराजा भूपिंदर पटियाला घराने के ऐसे राजा रहे हैं. जिनको लेकर बहुत ढेर सारे किस्से हैं. वो भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान भी थे. जब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को खड़ा किया गया, उसमें महाराजा ने मोटा धन दिया. इसके अलावा 40 के दशक तक जब भी भारतीय टीम विदेश जाती थी तो अमूमन उसका खर्च वो उठाया करते थे लेकिन इसके एवज में वो टीम के कप्तान भी बनाए जाते थे.

महाराजा वो शख्स भी थे, जिनके पास देश का पहला व्यक्तिगत विमान था. इसे उन्होंने 1910 में ब्रिटेन से खरीदा था. विमान उड़ाने और रखरखाव के लिए उनके पास पूरा स्टाफ था. इस विमान के लिए पटियाला में ही विमान पट्टी भी बनाई गई थी. महाराजा अक्सर इससे विदेश यात्राएं करते थे. इस राजा की 88 वैध संतानें थीं. उसकी शानोशौकत के चर्चे दुनियाभर में फैले थे.

दस रानियां और 300 से ज्यादा उपरानियां 

दीवान जर्मनी दास ने अपनी किताब "महाराजा" में पटियाला के महाराजा पर विस्तार से लिखा है. लेपियर कोलिंग की "फ्रीडम एट मिडनाइट" में भी महाराजा की सनक और तड़क-भड़क भरी जीवन शैली का विस्तार से जिक्र हुआ है.

महाराजा पटियाला की कई बीवियों और हरम की महिलाओं में विदेशी सुंदरियां भी थीं


महाराजा ने दस बार शादियां कीं. इसके अलावा उनके हरम में 300 से ज्यादा उपरानियां थीं. इसमें एक से बढ़कर एक सुंदर महिलाएं थीं, जिसमें कई विदेशी भी थीं. महाराजा ने 88 बच्चे पैदा किए. वो जब भी विदेश जाते थे तो उनके साथ एक बड़ा लावलश्कर भी जाता था. वो लंदन या पेरिस में सबसे मंहगे होटल की कई मंजिलों को एकसाथ किराए पर ले लेते थे. उसका पूरा खर्च वो खुद वहन करते थे.44 रोल्स रॉयस कारें, हिटलर भी था दोस्त 
महाराजा के पास एक से बढ़कर एक कारें थीं, जिसमें 44 तो रोल्स रॉयस ही थीं. यहां तक हिटलर ने भी महाराजा को एक कार उपहार में थी. 1935 में बर्लिन दौरे के वक्त भूपिंदर सिंह की मुलाकात हिटलर से हुई. कहा जाता है कि राजा से हिटलर इतने प्रभावित हो गए कि उसने अपनी मेबैक कार राजा को तोहफे में दे दी. हिटलर से महाराजा की दोस्ती लंबे समय तक रही.

महाराजा भूपिंदर सिंह क्रिकेट प्रेमी थे. बीसीसीआई को शुरुआती सालों में उन्होंने मोटा पैसा दिया था.


सबसे महंगा हीरों का हार 
वर्ष 1929 में राजा के ठाठ का एक और उदाहरण सामने आया जब उन्होंने कीमती नग, हीरों और आभूषणों से भरा संदूक पेरिस के जौहरी को भेजा. लगभग 3 साल की कारीगरी के बाद ​तैयार हुए इस हार ने खूब चर्चा बटोरी. 25 मिलियन डॉलर की कीमत वाला यह हार देश के सबसे महंगे आभूषणों में से एक है.

यूं तो महाराजा पटियाला के पास एक से बढ़कर एक कारें थीं, जिसमें 44 रोल्स रॉयस कारें थीं. लेकिन ये मेबैक कार है, जो उन्हें हिटलर ने तोहफे में दी थी


महाराजा की अपनी क्रिकेट टीम भी थी
महाराजा पटियाला ने बीसीसीआई के गठन के समय तो बड़ा आर्थिक योगदान तो दिया ही. बाद में बोर्ड की हमेशा मदद करते रहे. मुंबई के ब्रेबोर्न स्टेडियम का एक हिस्सा उनके योगदान से बना था. वह न केवल भारतीय टीम से खेले बल्कि मेरिलबोर्न क्रिकेट क्लब यानी एमसीसी की टीम में भी रहे. उन्होंने सबसे पहले ब्रिटिश क्रिकेट कोचों को भारत बुलाया. उनके पास अपनी क्रिकेट टीम थी, जो उस समय देश में होने वाले टूर्नामेंटों में खेलती थी, इसमें देश के जाने माने खिलाड़ी खेला करते थे, लाला अमरनाथ भी इसमें शामिल थे.

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First published: January 21, 2020, 3:35 PM IST
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