नील आर्मस्ट्रांग के बाद चांद पर पहले पहुंचेगा कोई भारतीय या चीनी

भारत और चीन दोनों के बीच अब होड़ इस बात की होगी कि उनमें से किस देश का अंतरिक्ष यात्री पहले चांद की जमीन पर कदम रखेगा. हालांकि अपने अंतरिक्ष प्रोग्राम में चीन कहीं आगे निकल चुका है

News18Hindi
Updated: July 23, 2019, 12:39 PM IST
नील आर्मस्ट्रांग के बाद चांद पर पहले पहुंचेगा कोई भारतीय या चीनी
भारत का मैन मून मिशन 2030 तक
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Updated: July 23, 2019, 12:39 PM IST
नील आर्मस्ट्रांग के द्वारा चांद पर कदम रखने के पचास साल हो चुके हैं. चांद पर उतरकर अंतरिक्ष फतह की हसरत दुनिया के सभी बड़े देशों में बनी हुई है. यही वजह है कि दुनियाभर के बड़े देश फिर 'स्‍पेस रेस' में जुट गए हैं. अमेरिका और रूस के साथ भारत और चीन भी इस रेस की उभरती हुई नई ताकत हैं. भारत और चीन दोनों आने वाले समय अपने अंतरिक्ष यात्रियों को चांद पर भेजना चाहते हैं. ये सवाल लाजिमी है कि आर्मस्ट्रांग के बाद चांद पर अगला कदम किसी भारतीय का होगा या चीन से भेजे गए अंतरिक्ष यात्री का.

भारत के चंद्रयान-2 भेजने के बाद वो दुनिया की चार ऐसी ताकतों में शामिल हो गया है, जिन्होंने चांद पर अपने मिशन चला रखे हैं. हालांकि इस मामले में अमेरिका और रूस बहुत आगे हैं. चीन भी तेजी से उस ओर कदम बढ़ा रहा है. साथ ही भारत भी तेजी से साथ अपनी पहचान बना रहा है.

2022 के भारत चांद पर भेजना चाहता है मानव 
इसरो 2022 के बाद चांद पर मैन मिशन पर काम करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है. माना जा रहा है कि 2025 से 2030 के बीच भारत चांद पर मैन मिशन पर कामयाबी हासिल कर लेगा. वैसे ये तो तय है कि अगर चांद पर पानी होने की पुष्टि हो गई तो चांद को लेकर पूरी दुनिया के मिशन में व्यापक तौर पर बदलाव आने वाला है.

इसरो का लक्ष्य चंद्रयान-2 के बाद अंतरिक्ष में अपना गगनयान भेजने का है. इसी गगनयान से भारत पहली बार किसी अंतरिक्ष यात्री को भी भेजेगा. गगनयान मिशन को 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य बनाया गया है. गगनयान मिशन की सफलता के बाद भारत का अगला कदम फिर चांद की जमीं अपने अंतरिक्ष यात्री को उतरने का होगा.

पहले गगनयान फिर अपना स्पेस स्टेशन
पीएम नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले से दिए गए अपने संबोधन में कहा था कि 2022 तक गगनयान लेकर कोई भारतीय अंतरिक्ष में जाएगा. इसके बाद भारत वर्ष 2029 तक अपना स्‍पेस स्‍टेशन स्‍थापित करेगा. इसरो के प्रमुख के.सिवन के मुता‍बिक भारत अपना अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की योजना भी बना रहा है. हालांकि इस ओर चीन ने पहले ही कदम बढ़ा लिया है.
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भारत का लक्ष्य 2030 तक मैन मून मिशन का है


क्या है चीन का मैन मिशन टारगेट 
चीन का भी लक्ष्य 2030 के बाद अपने अंतरिक्ष यात्री को चांद की जमीं पर उतारने का है. हालांकि इस बीच चांद दो बार अपने स्पेसशटल के जरिए तीन बार अंतरिक्षयात्रियों को स्पेस में भेज चुका है. इसी क्रम में चीन अपने स्पेस स्टेशन को अगले साल अंतरिक्ष में स्थापित कर देगा. इन दिनों में वो इसी की तैयारी में जुटा हुआ है.

क्या चांद से आने वाली अगली आवाज मंदारिन होगी

चीन को मालूम है कि आने वाले समय अंतरिक्ष का महत्व और बढने वाला है. चीन के चार मून मिशन चांद पर पहुंच चुके हैं. जिसमें से आखिरी दो अपने साथ रोवर लेकर गए थे, जिन्होंने चांद पर अपनी रिसर्च को भी अंजाम दिया. इसी साल के आखिर में चीन चांग-5 मून मिशन की तैयारी कर रहा है. ब्लूमबर्ग में छपी रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी नेवल वार कॉलेज, न्यूपोर्ट में प्रोफेसर और स्पेस पॉलिसी एक्सपर्ट जॉन जानसन फ्रीजी का कहना है, कोई हैरानी नहीं होनी चाहिए अगर चांद से अगली आने वाली आवाज मंदारिन हो.

चीन ने वर्ष 2003 में यांग लिवेई को अंतरिक्ष में भेजा था. अब चीन भी 2030 के बाद मैन मून मिशन का टारगेट बनाए हुए है


अंतरिक्ष विशेषज्ञों के मुताबिक चांद पर कदम रखने वाला अगला अंतरिक्ष यात्री चीन से होगा.
चाइना डेली अखबार के अनुसार, चीन अगले दस सालों में चंद्रमा के साउथ पोल के करीब किसी जगह पर अपना रिसर्च स्टेशन बनाने की योजना बना रहा है.

कौन से चीनी जा चुके हैं अंतरिक्ष में 
अंतरिक्ष में जाने वाले पहले चीनी यात्री यांग लिवेई एक फाइटर पायलट थे, जो 2003 में पृथ्वी की कक्षा में गए. इसके पांच साल बाद ही झाई झिगांग ने अंतरिक्ष में पहला स्पेसवाक किया. इसके बाद 2012 में चीन ने लियू यांग को अंतरिक्ष में भेजा, वो अंतरिक्ष में जाने वाली पहली चाइनीज महिला थीं. चीन दुनिया में तीसरा देश है, जिसने अपने मिशन के जरिए अपने लोगों को अंतरिक्ष में भेजकर दिखाया है. इससे पहले ये श्रेय अमेरिका और सोवियत संघ को ही हासिल था.

चीन के झांग झिगांग ने वर्ष 2007 में स्पेस वाक किया था


स्‍पेस में कितना ताकतवार है चीन
कोल्ड वॉर के समय अमेरिका और सोवियत रूस केवल दो अंतरिक्ष महाशक्ति हुआ करते थे. लेकिन सोवियत संघ के विघटन के बाद रूस का अंतरिक्ष प्रोग्राम अमेरिका के मुकाबले कमजोर हो गया. साल 2003 में इस स्पेस रेस में एक नए खिलाड़ी चीन का आगमन हुआ. चीन के मैदान में उतरने के बाद अब इस रेस के मायने बदल गए हैं.

चीन ने अंतरिक्ष फतह के लिए बड़े स्तर पर योजना बनाई है चीन के इस योजना को देखते हुए बाकी देश भी इस होड़ में शामिल हो गए हैं.

स्पेस प्रोग्राम में मोटा धन खर्च करता है चीन 
स्‍पेस में कदम रखने के केवल 16 सालों में ही चीन आज एक अंतरिक्ष महाशक्ति बन चुका है. मीडिया रिपोर्ट्स में मुताबिक चीन हर साल 8.48 अरब डॉलर अपने स्‍पेस प्रोग्राम पर खर्च करता है. इसके अलावा चीन अंतरिक्ष में अपनी सैन्‍य गतिविधियों को संचालित करने के काफी पैसा खर्च कर रहा है. विशेषज्ञों की माने तो चीन पृथ्‍वी पर चल रही अपने खास प्रोग्राम बेल्‍ट ऐंड रोड परियोजना का विस्‍तार अंतरिक्ष तक करना चाहता है. चीन 'स्‍पेस सिल्‍क रोड' बनाने की कोशिश में जुटा है.

भारत के मुकाबले चीन अपने अंतरिक्ष प्रोग्राम पर कई गुना ज्यादा धन खर्च करता है


क्या हैं चीन के स्पेस प्रोजेक्ट्स 
चीन 2019 के अंत तक पहला लूनर प्रोब चांग ई-5 लॉन्च करेगा जो निश्चित समय के बाद धरती पर वापस आएगा. साल 2020-21 में चीन मंगल ग्रह के लिए अपना पहला प्रोब भेजेगा. इसी साल अंतरिक्ष में चीन अपना लूनर रिसर्च स्‍टेशन की शुरुआत करेगा. साल 2023-24 में चीन चांद के दक्षिणी ध्रुव पर अंतरिक्ष यान भेजेगा.

साल 2030 के आसपास चीन चांद पर मानवयुक्‍त यान भेजने के मिशन पर काम कर रहा है. चीन ने 2019 के जनवरी में अपना चांग ई-4 अंतरिक्ष यान चंद्रमा पर उतारा था. जानकारों की माने तो चीन चांद पर मौजूद संसाधनों का दोहन करना चाहता है. उसका इरादा चांद के साउथ पोल पर पाए जाने वाले पानी और हीलियम-3 पर है. चीन पानी की खोज कर वहां अपनी बस्तियां बनाना चहता है. वहीं हीलियम-3 से ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की जुगत में लगा हुआ है.

आने वाले समय में संभव है स्पेस वार 
अंतरिक्ष मामलों के जानकारों का मानना है कि अभी चीन का अमेरिका या भारत के साथ कोई स्पेस वॉर नहीं है, लेकिन आने वाले समय में ऐसा होने की प्रबल संभावनाएं हैं. चीन के लूनर मिशन से जुड़े एक बड़े वैज्ञानिक ये पेइजिन के कहा है कि अगर हम अब चांद पर जाने में सक्षम हैं और नहीं जाते हैं तो भविष्य में आने वाली पीढ़ियां हम पर आरोप लगाएंगी की हम उतने सक्रिय नहीं हुए जितना कि हो सकते थे.

चीन साल 2049 को जब कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना के सौ साल होंगे, उस समय तक अंतरिक्ष की सबसे बड़ी ताकत बनना चाहता है.
First published: July 23, 2019, 12:21 PM IST
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