हजारों के ब्रांडेड कपड़े असल में इतने सस्ते होते हैं कि चकरा जाएंगे आप

महंगे ब्रांडेड कपड़े जो पूरी दुनिया में खासी महंगी कीमतों में बिकते हैं, उन्हें बांग्लादेश में इतनी कीमत में तैयार किया जाता है कि सुनकर हैरान रह जाएंगे.

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: May 9, 2019, 8:54 PM IST
Sanjay Srivastava
Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: May 9, 2019, 8:54 PM IST
दुनिया के मशहूर ब्रांड्स के कपड़े पहनने की अपनी शान है. हम रोजाना जो कपड़े पहनते हैं वो बेशक जाने-माने ब्रांड्स के ही होते हैं. अगर ब्रांड ग्लोबल और मशहूर हो तो पक्का है कि एक टीशर्ट की कम से कम कीमत 3000 से 4000 रुपये के आसपास होगी. क्या आप अंदाजा लगा सकते हैं कि जो टीशर्ट आप हजारों रुपये में खरीद रहे हैं उसकी वास्तविक लागत क्या होती होगी. आप सुनकर चकरा जाएंगे. हां, इसकी वास्तविक कीमत बमुश्किल 100 से 300 रुपये तक ही होगी.

बिल्कुल यही सच्चाई है. दुनिया भर के जितने बड़े गारमेट ब्रांड्स हैं, जितने बड़े और लोकप्रिय ग्लोबल ब्रांड्स हैं, उन सभी के गारमेंट्स आजकल बांग्लादेश में बनते हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि बांग्लादेश की गारमेंट इंडस्ट्री दुनिया की सबसे बड़ी मैन्यूफैक्चरिंग इंडस्ट्री ही नहीं बन गई है बल्कि लागत के हिसाब से सबसे सस्ती भी है. जितनी कम कीमत पर अब वो पूरी दुनिया के गारमेंट्स बनाते हैं, उतना तो चीन भी नहीं कर सकता.



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सारे सुपर ब्रांड्स के रेडिमेड गारमेंट्स की बांग्लादेश में बनने की कहानी तो आप जानेंगे साथ ही उस इंडस्ट्री के बारे में भी जानेंगे जिसने दुनियाभर की सारी गारमेंट मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स को चित कर दिया है.

दुनिया का हर बड़ा ब्रांड होता है यहां तैयार
ढाका में दुनिया का हर आला रेडिमेड ब्रांड तैयार होता है. माना जा रहा है कि इसने गारमेंट्स मैन्यूफैक्चरिंग और निर्यात में चीन को भी पीछे छोड़ दिया है. दुनियाभर में यहां बनने वाली टीशर्ट्स, स्वेटर, ट्राउजर, मेंस और वूमंस शर्ट्स की बहार है. यहां की करीब 5500 फैक्ट्रियों में रोज एक लाख 25 हजार टीशर्ट्स बनती हैं. ये फैक्ट्रियां ढाका, चटगांव और आसपास के इलाकों में फैली हैं.

बांग्लादेश की गारमेंट इंडस्ट्री इतनी बड़ी हो चुकी है कि दुनिया का हर बड़ा रेडिमेड ब्रांड वहां से प्रोडक्ट तैयार करा रहा है

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हर शर्ट पर मजदूर को मिलते हैं इतने रुपये
दुनिया का कोई भी ऐसा बड़ा गारमेंट ब्रांड नहीं होगा, जो उत्पादन की आउटसोर्सिंग बांग्लादेश से नहीं कराता हो. इसकी बड़ी वजह बांग्लादेश का सबसे सस्ता श्रम है और साथ में उत्कृष्ट फिनिशिंग औऱ बेहतरीन गुणवत्ता. हां ये बात अलग है कि यहां बनने वाली जो शर्ट्स विदेशी बाजारों में हजारों रुपये में बिकती हैं उस पर यहां के एक मजदूर को बमुश्किल एक से दो रुपये भी नहीं मिलते.

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यूरोप के सबसे बड़े रेडीमेड रिटेलर एच एंड एम यानी हैंस एंड मौरिट्ज का आधा से ज्यादा काम यहीं से होता है. हाल के सालों में दुनिया के सबसे बड़े रिटेल ब्रांड वालमार्ट, यूके के प्रतिष्ठित ब्रांड प्राइमर्क, इतालवी ब्रांड राल्फ लौरेन ने लगातार यहां अपने आर्डर को बढ़ाया है.

30 साल पहले शुरू हुई थी पहल
वर्ष 1978 में पहली बार बांग्लादेश के रेडीमेड उद्योग के जनक कहे जाने वाले नुरुल कादर खान ने 130 युवा ट्रेनीज को दक्षिण कोरिया ट्रेनिंग के लिए भेजा था तो किसी ने नहीं सोचा था कि ये घटना आने वाले समय में इस देश को बदलकर रख देने वाली थी. जब ये ट्रेनी लौटे तो बांग्लादेश की पहली गारमेंट फैक्ट्री खोली गई. बाहर से काम लेने की कोशिश शुरू हुई. इसके बाद तो बांग्लादेश में कई और फैक्ट्रियों की नींव पड़ी. फिर इस उद्योग ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.

दुनिया का शायद ही कोई ऐसा ब्रांड हो, जिसके कपड़े यहां तैयार नहीं किये जाते, वो इतनी कम मजदूरी पर कि कोई भी हैरान हो सकता है


बांग्लादेश ने बंद कराईं यूरोपीय फैक्ट्रियां
वर्ष 1985 में बांग्लादेश का ये रेडीमेड गारमेंट उद्योग 380 मिलियन डॉलर का था. अब 22.49 बिलियन डॉलर का है. बांग्लादेश की करीब 80 फीसदी निर्यात की आमदनी इस उद्योग से होती है. दुनिया के बड़े बड़े ब्रांड्स को भी लगता है कि जब बड़े पैमाने पर बहुत कम पैसों में वो बांग्लादेश में उत्कृष्ट क्वालिटी और डिजाइन वाले कपड़े बनवा सकते हैं तो उसके लिए यूरोपीय फैक्ट्रियों में महंगे श्रम का पैसा क्यों दें.

कितनी आती है असल लागत
बांग्लादेश में उम्दा कॉटन के साथ बनी एक टीशर्ट की कीमत सारी लागत, मजदूरी, ट्रांसपोटेशन, शो-रूम का खर्च निकाल कर यदि अमूमन 1.60 डॉलर से 6.00 डॉलर तक आता है, जिसे अलग-अलग ब्रांड्स यूरोप और अमेरिका में काफी ऊंची कीमतों में बेचते हैं.

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वैसे इसे आप समय का फेर भी कह सकते हैं. अंग्रेज जब भारत आए तो उन्होंने बांग्लादेश कहे जाने वाले इस हिस्से के बेहतरीन हथकरघा उद्योग को मैनचेस्टर की कपड़ा मशीनों के तले दबा दिया. अब बांग्लादेश में गारमेंट इंडस्ट्री का फिर उदय हो चुका है जबकि मैनचेस्टर का कपड़ा उद्योग एकदम तबाह.

बांग्लादेश से ये कपड़े दुनियाभर के ब्रांडेड शो-रूम में पहुंचते हैं. ये बहुत महंगे बिकते हैं लेकिन इनकी असल लागत बहुत कम होती है


वो बड़े ब्रांड्स जिनके कपड़े यहां बनते हैं
वाल्मार्ट, एच एंड एम, ह्यूगो बॉस, टॉमी हिलफीगर, प्राइमर्क, बेनेटन, गैप, रिप्ले, जी स्टार रो, जियोर्जियो अरमानी, कैल्विन क्लीन, प्यूमा, रॉल्फ रौलेन

क्या है अर्थशास्त्र
- एक किलो कॉटन में चार से पांच टीशर्ट तैयार होती हैं
- बांग्लादेशी कॉटन 3.80 डॉलर का होता है
- अमेरिकी कॉटन करीब 5.50 डॉलर का
- इसमें पॉलिएस्टर और विस्कोज भी मिक्स किया जाता है.
- एक मजदूर को एक घंटे का करीब 18 सेंट यानी नौ रुपये मिलता है

जो टी शर्ट आप हजारों रुपए की खरीदते हैं, उस पर कारीगर को मिलते हैं महज एक से दो रुपए


- अलग अलग क्वालिटी के लिहाज से एक टीशर्ट की कुल लागत 1.60 डॉलर से 6.00 डॉलर तक आती है
- बांग्लादेश फैक्ट्री का मालिक एक टीशर्ट पर करीब 58 सेंट यानी 11 रुपये लाभ कमाता है
- यही टीशर्ट यूरोप और अमेरिका में अलग-अलग दामों पर बिकती हैं

ब्रांड्स और टी-शर्ट्स के मूल्य
प्राइमर्क 10 डॉलर                  (लागत 1.6 डॉलर)
हिलफीगर 39 डॉलर              (लागत 5 डॉलर)
जी स्टार 91 डॉलर                 (लागत करीब 06 डॉलर)
रिप्ले 53 डॉलर

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