दशहरा 2018: जब रावण ने निकाला अपना हाथ, उखाड़ीं नसें और गाने लगा भजन

श्रीलंका में आज भी रावण को एक महान विद्वान, एक अच्छे शासक और एक अच्छे संगीतकार के रूप में देखा जाता है.

News18Hindi
Updated: October 19, 2018, 10:32 AM IST
दशहरा 2018: जब रावण ने निकाला अपना हाथ, उखाड़ीं नसें और गाने लगा भजन
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Updated: October 19, 2018, 10:32 AM IST
'रावण हत्था' एक भारतीय वाद्य यंत्र है. यह प्रमुख रूप से राजस्थान और गुजरात में बजाया जाता है. राजस्थान में तो यह इतना लोकप्रिय है कि इसे राज्य का लोक वाद्य कहा जा सकता है. पौराणिक साहित्य और हिन्दू परम्परा की मान्यताओं के हिसाब से ईसा से 3000 वर्ष पूर्व लंका के राजा रावण ने इसका आविष्कार किया था. रावण के ही नाम पर इसे 'रावण हत्था' या 'रावण हस्त वीणा' कहा जाता है.

श्रीलंका में भी रावण को बुराई का प्रतीक नहीं माना जाता है. उसे एक दूसरे ही राजा और इंसान के तौर पर वहां देखा जाता है. उसे शिव के परम भक्त, एक महान विद्वान, एक अच्छे शासक और एक अच्छे संगीतकार के रूप में देखा जाता है. रावण को रावण हत्था वाद्ययंत्र से भी जोड़ा जाता है.



यह संभव है कि वर्तमान में इस संगीत वाद्य यंत्र का रूप कुछ बदल गया हो, लेकिन इसे देखकर ऐसा लगता नहीं है. क्योंकि आज भी यह बहुत जटिल और अजीब दिखता है.

यूं बनाया जाता है 'रावण हत्था'

कुछ जानकार इसे वायलिन का पूर्वज भी बताते हैं. इस वाद्य यंत्र को धनुष जैसी मींड़ और लगभग डेढ़-दो इंच व्यास वाले बांस से बनाया जाता है. एक अधकटी सूखी लौकी या नारियल के खोल पर पशुचर्म अथवा सांप के केंचुली को मंढ़ कर एक से चार संख्या में तार खींच कर बांस के लगभग समानान्तर बांधे जाते हैं. यह भारतीय वाद्य यंत्र बहुत मधुर ध्वनि उत्पन्न करता है.

फोटो साभार: एंटोनी पैपोने (फ्लिकर)


रावण ने यूं बनाया था 'रावण हत्था'
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रावण हत्था की कहानी यह है कि जब उसने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कैलाश पर्वत को उठा लिया और शिव को बुरा लगा और उन्होंने कैलाश का भार बढ़ा दिया तब रावण ने अपना ही एक हाथ उखाड़कर रावण हत्था बनाया था. उसने अपनी नसें उखाड़कर रावण हत्था के तार बनाए थे. इस नए वाद्ययंत्र पर संगीत की धुनें बजाकर उसने भगवान शंकर की स्तुति की थी. भगवान शंकर को यह स्तुति इतनी भाई कि उनकी आंखों में आंसू आ गए और उन्होंने रावण को माफ कर दिया.

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