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इंजीनियर से लेकर बाबा बनने तक रामपाल की कहानी

इंजीनियर से लेकर बाबा बनने तक रामपाल की कहानी

रामपाल जब एक संत के करीब आया तो उनके रंग में रंगता चला गया, फिर उसकी धन दौलत और प्रभाव भी बढ़ता गया

    सतलोक आश्रम के संचालक रामपाल को चार महिलाओं और एक बच्चे की हत्या के मामले में कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. रामपाल एक जमाने में जूनियर इंजीनियर था. इसके बाद वो कैसे आश्रम बनाकर अकूत धन दौलत का स्वामी बन गया, उसकी कहानी कम रोचक नहीं है.

    रामपाल का जन्म सोनीपत के गोहाना तहसील के धनाना गांव में हुआ था. पढ़ाई पूरी करने के बाद रामपाल को हरियाणा सरकार के सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर की नौकरी मिल गई. नौकरी के दौरान ही रामपाल की मुलाकात 107 साल के कबीरपंथी संत स्वामी रामदेवानंद महाराज से हुई. रामपाल उनके शिष्य बन गए.

    नौकरी से इस्तीफा
    स्वामी के करीब आने के बाद रामपाल उनके रंग में रंगने लगे. 1995 को संत रामपाल ने 18 साल की नौकरी से इस्तीफा दे दिया. सत्संग करने लगे. फिर धीरे-धीरे रामपाल खुद संत बन गए. उनके अनुयायियों की संख्या बढ़ने लगी. कमला देवी नाम की एक महिला ने करोंथा गांव में बाबा रामपाल दास महाराज को आश्रम के लिए जमीन दे दी. फिर 1999 में रामपाल ने सतलोक आश्रम की नींव रखी.

    विवादों से भी नाता
    2006 में स्वामी दयानंद की लिखी एक किताब पर रामपाल की एक टिप्पणी पर खासा विवाद हुआ था. आर्यसमाज को ये टिप्पणी नागवार गुजरी. दोनों के समर्थकों के बीच हिंसक झड़प हुई. इसमें एक शख्स की मौत भी हो गई. नतीजतन जिला प्रशासन ने 13 जुलाई 2006 को आश्रम को कब्जे में ले लिया. रामपाल और उनके 24 समर्थकों को गिरफ्तार कर लिया गया.

    बढता गया प्रभाव 
    रामपाल को तकरीबन 22 महीने तक जेल में रहना पड़ा. 22 महीने के बाद रामपाल को 30 अप्रैल 2008 को पुलिस ने रिहा कर दिया था. वर्ष 2009 में रामपाल को अपना आश्रम भी वापस मिल गया.

    इसके बाद रामपाल का प्रभाव हरियाणा में तेजी से बढ़ता चला गया. साथ ही उसका वैभव भी उसी तरीके से बढ़ता गया. लेकिन कोई भी जब उसके खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत करता था तो भक्त उससे बहुत बुरी तरह पेश आते थे. 2013 में करोंथा गांव में रामपाल के आश्रम में झड़प हुई. जिसमें दो लोगों की मौत हो गई और कुछ अन्य लोग घायल हुए.

    संत रामपाल पुलिस के साथ (फाइल फोटो) विवादों से भी नाता


    बाबा खुद कबीर पंथी कहता है
    रामपाल खुद को कबीर पंथी कहता है. हरियाणा के हिसार में उसका सतलोक आश्रम है. जब इस आश्रम पर पुलिस ने छापा मारा तो वहां की सुविधाएं देखकर उसकी आंखें चौंधिया गईं. खासकर रामपाल के निजी कक्ष में लग्जरी सुविधाएं पाई गईं. ये भी पता लगा कि आश्रम में भक्तों का आना तो आसान रहता था लेकिन निकलना उतना ही मुश्किल. समर्थक उसे धरती पर भगवान का स्वरूप मानते थे.

    वर्ष 2014 में रामपाल की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने सतलोक आश्रम में सर्च अभियान चलाया था, इसमें वहां से करोड़ों रुपए की खाद्य सामग्री मिली. तलाशी के दौरान पुलिस को कई चौंकाने वाली चीजों का पता चला था.

    नरबलि का भी लगा आरोप
    बरवाला के सतलोक आश्रम संचालक रामपाल की मुसीबतें तब और बढ़ गईं, जब हाईकोर्ट में उनके खिलाफ नरबलि का आरोप लगाया गया. दरअसल, जींद निवासी हरिकेश ने याचिका दायर कर कहा था कि अगस्त 2014 में उनके बेटे का शव आश्रम में मिला था. आशंका है कि उसकी बलि दी गई है, लेकिन पुलिस ने आत्महत्या का केस दर्ज किया.जिस पर पीडि़त ने सीबीआई जांच की मांग की थी.

    गिरफ्तारी से बचने फेंके थे पेट्रोल बम...
    गिरफ्तारी से बचने रामपाल और उसके कमांडोज ने तरह-तरह के हथकंडे अपनाए थे, लेकिन बच नहीं पाए. गिरफ्तारी से पहले आश्रम के बाहर हिंसा भड़क उठी थी और रामपाल को गिरफ्तार करने पहुंची पुलिस को समर्थकों व कमांडोज ने फायरिंग कर बाहर ही रोक दिया था. करीब 90 राउंड फायरिंग की गई थी और पेट्रोल बम भी फेंके गए थे। इस हिंसा में लगभग 75 पुलिस कर्मी और 200 से ज्यादा लोग जख्मी हो गए थे। इतना ही नहीं, पांच महिलाओं की मौत का दावा भी किया गया था.

    Tags: Court, Haryana news, Hisar news, Sant Rampal

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