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दुनियाभर में मक्का के बाद सबसे ज्यादा श्रद्धालु सबरीमाला मंदिर आते हैं, जानें वजह

दुनियाभर में मक्का के बाद सबसे ज्यादा श्रद्धालु सबरीमाला मंदिर आते हैं, जानें वजह

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सबरीमाला मंदिर के द्वार सभी के लिए खोले जाने का फैसला सुनाया है

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सबरीमाला मंदिर के द्वार सभी के लिए खोले जाने का फैसला सुनाया है

केरल का सबरीमाला मंदिर दक्षिण भारत के सबसे प्रमुख मंदिरों में से एक है. इस मंदिर तक जाने के लिए 18 पवित्र सीढ़ियों को चढ़ना होता है. इन सीढ़ियों के अलग-अलग अर्थ भी बताए गए हैं.

    केरल के सबरीमाला मंदिर की वेबसाइट कहती है कि यह सभी धर्मों और जातियों के लोगों को मंदिर के अंदर आकर पूजा करने की अनुमति है. हालांकि मंदिर में लंबे वक्त तक 10 से 50 साल तक की औरतों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहा है जो अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हट सका है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि महिलाओं के प्रवेश पर रोक महिलाओं के समानता के अधिकार का हनन है. सबरीमाला मंदिर भारत के सबसे ज्यादा मान्यता वाले मंदिरों में से एक है. इसके बारे में कई खास बातें हैं जिन्हें जानकर आपको आश्चर्य होगा -

    @ सबरीमाला किसी खास वक्त के लिए खुलने वाले दुनिया के सबसे बड़े तीर्थों में से एक है. इसमें सऊदी अरब के मक्का के बाद सबसे ज्यादा शृद्धालु आते हैं. पिछले साल इस मंदिर में 3.5 करोड़ लोग दर्शन के लिए आए थे. भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार 2016-17 के उत्सव के दौरान मंदिर में 243.69 करोड़ रुपये का दान आया था.

    @ माना जाता है कि हिंदू भगवान अयप्पा ने सबरीमाला को खतरनाक राक्षस महिषी को मारने के बाद ध्यान करने के लिए चुना था. वहीं दूसरी मान्यता के अनुसार परशुराम महर्षि ने केरल को अपनी कुल्हाड़ी फेंककर के समुद्र से उठाया था और उन्होंने ही सबरीमाला में भगवान अयप्पा की स्थापना की थी.

    @ अन्य हिंदू मंदिरों की तरह यह मंदिर पूरे साल नहीं खुला रहता है. मलयालम कैलेंडर के हिसाब से यह हर महीने 5 दिनों के लिए खुलता है. इसके अलावा यह नवंबर महीने के बीच से जनवरी के बीच तक मंडलम और मकाराविलक्कु सालाना उत्सवों के लिए खुलता है.

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    @ भगवान अयप्पा के वक्त मकर संक्रांति के दिन को बेहद खास मानते हैं. मकर संक्रांति के दिन मंदिर में दर्शन के लिए सबसे ज्यादा श्रद्धालु पहुंचते हैं.

    @ कहा जाता है कि मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं के प्रवेश पर रोक की परंपरा 1500 साल पुरानी थी. जिसे हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने समानता के अधिकार का हनन बताकर खत्म कर दिया है. इस परंपरा के बारे में नीचे दिए गए लिंक पर पढ़ें -

    @ सबरीमाला आने वाले भक्त सिर पर पोटली रखे रहते हैं. इस पोटली में नैवेद्य होता है. जिसे प्रसाद के तौर पर भी दिया जाता है. मंदिर की मान्यता के अनुसार तुलसी या रुद्राक्ष की माला पहनकर, व्रत रखकर और सिर पर नैवेद्य लेकर जो व्यक्ति भगवान अयप्पा के दर्शन के लिए आएगा, उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

    @ भगवान अयप्पा, भगवान विष्णु के मोहिनी रूप और शिव के पुत्र हैं. इसी लिए इनका नाम हरिहरपुत्र भी पड़ गया है. इसके अलावा उन्हें अयप्पन, शास्ता, मणिकांता नाम से भी जाना जाता है.

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    @ केरल का सबरीमाला मंदिर दक्षिण भारत के सबसे प्रमुख मंदिरों में से एक है. इस मंदिर तक जाने के लिए 18 पवित्र सीढ़ियों को चढ़ना होता है. इन सीढ़ियों के अलग-अलग अर्थ भी बताए गए हैं.

    @ पहली 5 सीढ़ियां इंसान की 5 इंद्रियों की प्रतीक हैं. इसके बाद की 8 सीढ़ियां मानवीय भावनाओं की प्रतीक हैं. अगली 3 सीढ़ियों को मानवीय गुण और आखिरी 2 सीढ़ियों को ज्ञान और अज्ञान का प्रतीक माना जाता है.

    @ कन्नड़ आदाकारा जयमाला ने 2006 में बार दावा किया था कि उन्होंने सबरीमाला मंदिर के प्रांगण में प्रवेश किया है और उन्होंने भगवान अयप्पा की मूर्ति को भी छुआ है. उनके इस दावे के बाद केरल सरकार ने अपने क्राइम ब्रांच को इस मामले की जांच के आदेश दिए थे, हालांकि बाद में इस केस को वापस ले लिया गया था.

    @ मंदिर की इन खासियत के चलते यहां भारी मात्रा में लोग आते हैं. मंदिर में अबतक दो बार बड़ी भगदड़ हो चुकी है, जिसमें 200 लोगों की जानें गई हैं.

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    Tags: Hindu, Kerala, Religion, Sabrimala, Supreme Court, Women

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