उम्मीद से कहीं पतला है ब्रह्माण्ड, जानिए वैज्ञानिकों को कैसे पता लगा यह सच

उम्मीद से कहीं पतला है ब्रह्माण्ड, जानिए वैज्ञानिकों को कैसे पता लगा यह सच
पहले कहा जा रहा था कि ब्रह्माण्ड (Universe) फैल रहा है, लेकिन इसकी गति उम्मीद से ज्यादा तेज निकली, अब यह उम्मीद से ज्यादा पतला (Thin) पाया गया है. (तस्वीर: Pixabay)

ब्रह्माण्ड (Unvierse) में मौजूद गैल्क्सियों (Galaxies) और उसके अन्य हिस्सों के पिछले सात साल के अध्ययन से पता चला है कि ब्रह्माण्ड जितना समझा रहा था, उससे पतला (Thin) है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 10, 2020, 2:43 PM IST
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सब जानते हैं कि वैज्ञानिक इस बारे में एकमत हैं कि ब्रह्माण्ड (Universe)  फैल रहा है. इस फैलाव को लेकर एक लगभग सर्वमान्य व्याख्या भी की गई है. लेकिन इसके बाद भी इससे संबंधित कई तरह के सवाल हैं जो पुरानी कई धारणाओं को बदलने की कोशिश करते हैं. ब्रह्माण्ड को लेकर हुए नए अध्ययन (Study) ने खुलासा किया है कि वह उम्मीद के कहीं पतला (Thin) है.

सात के अध्ययन के बाद यह नतीजा
इस अध्ययन के अनुसार जैसा कि खगोलविद उम्मीद कर रहे हैं, गैलेक्सियां, गैस और अन्य पदार्थ उस तरह से नहीं फैल रहे हैं. वैज्ञानिक इस नतीजे पर सात साल के आंकड़ों का अध्ययन करने के बाद पहुंचे हैं. पहले कुछ अध्ययनों ने इसी तरह का इशारा किया था, लेकिन ताजा अध्ययन ने इस अवलोकन को मजबूत से स्थापित कर दिया है.

पहले से अधिक तेज गति से फैल रहा है ब्रह्माण्ड
पहले वैज्ञानिकों ने यह खोजा था कि ब्रह्माण्ड उम्मीद से कहीं अधिक गति से फैल रहा है. उनके पास ब्रह्माण्ड के बहुत पुराने प्रकाशों के आधार पर इस बात का आंकलन भी था कि ब्रह्माण्ड कितनी तेजी से फैल रहा होगा. लेकिन आधुनिक ब्रह्माण्ड ने और ज्यादा तेजी से फैलते हुए उन्हें चौंका रखा है.



दो पड़तालों ने उठाए अहम सवाल
इन दो पड़तालों ने कॉस्मोलॉजी के प्रस्थापित मानक मॉडल पर सवालिया निशान लगा दिए हैं. पिंडों के एक साथ न जुड़े रह पाने पर कनाडा में वाटरलू यूनिवर्सिटी के ब्रह्माण्ड विज्ञानी माइकल हडसन ने इसका महत्व बताते हुए कहा, “यदि कॉन्फ्रेंस हो रही होतीं, तो कॉफी के दौरान इन्हीं नतीजों पर चर्चाएं चल रही होती.”

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शोधकर्ताओं ने 3 करोड़ से अधिक गैलेक्सीयों (Galaxies) का अध्ययन किया और इस नतीजे पर पहुंचे. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


प्रकाश नहीं दे पाता सही जानकारी
इस अध्ययन से संबंधित निकले नतीजों के लिए जिस तकनीक का उपयोग किया गया है वह बहुत उन्नत है. जब प्रकाश सुदूर गैलेक्सी से पृथ्वी की ओर आता है तो गैस और डार्क मैटर के इलाकों  से होकर गुजरना होता है. इस दौरान ये इलाके प्रकाश को अपनी ओर खींच कर उसे विकृत करने की कोशिश करते हैं. इससे प्रकाश की सीधे रेखा में कई तरह के मोड़ आ जाते हैं जिन्हें एक तरह की गांठ कहा जा सकता है.

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विकृति हटाने कर सही स्थिति का अनुमान
जब ये प्रकाश पृथ्वी तक पहुंचता है तो वह मुड़ातुड़ा सा या विकृत (Distorted) होता है यह निचोड़ा हुआ भी हो सकता है. वैज्ञानिकों की कोशिश होती है के वे इस विकृति को माप सकें जिससे उन्हें गैलेक्सी की आकृतियों की विकृतियों के बारे में पता चल सके और इसके जरिए वे दिखाई न पाने वाले डार्क मैटर का नक्शा बना सकें.

विशाल ब्रह्माण्ड के इस अध्ययन से पता चला
 किलो डिग्री सर्वे या KiDS खगोलीय सर्वे के सदस्यों ने 31 लाख गैलेक्सियों का अवलोकन किया है जिनमें से कई 10 अरब प्रकाशवर्ष दूर हैं. इसी आंकड़ों की मदद से ब्रह्माण्ड में छिपी हुई गैस और डार्क मैटर के औसत वितरण की भी गणना की गई. इससे यह पता चला कि गैलेक्सी और अन्य पिंड सामूहिक रूप से 10 प्रतिशत पतले हैं. यह उम्मीद के विपरीत है. इससे पहले ब्रह्माण्ड के पिंडों के एक साथ होने का पूर्वानुमान लैम्बडा कोल्ड डार्क मैटर नाम के स्थापित मॉडल के आधार पर था.

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इस अध्ययन और एक अन्य शोध के नतीजों के कारण ब्रह्माण्ड (Universe) के विस्तार (Expansion) के बारे में धारणाएं बदलना पड़ सकती हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


हैरान करने वाली है यह जानकारी
एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी में ब्रह्माण्डविज्ञानी के तौर पर काम करने वाली और KiDS की सदस्या मारिका असगारी का कहना है कि यह खगोलीय तनाव बहुत निचले स्तर पर है, लेकिन यह बहुत हैरान करने वाला, अजीब और आकर्षक भी है.

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इतना ही नहीं दूसरे अध्ययन भी इन नतीजों क समर्थन करते दिख रहे हैं. वैज्ञानिकों को यह एक चिंताजनक बात लग रही है. कई शोध बता चुके हैं कि ब्रह्माण्ड एक सा नहीं हैं बल्कि इसमें बहुत से इलाके खाली हैं तो कई में घना डार्क पदार्थ मौजूद है जो आसपास के पिंडों को अपने गुरुत्व से प्रभावित करते हैं. इस अनियिमतता या असमानता के कारण ही पिछले आठ साल के करीब एक दर्जन सर्वे भी यही कह रहे हैं कि ब्रह्माण्ड उम्मीद से पतला है.
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