पुण्यतिथि : तब मुलायम ने आगे किया कलाम का नाम और अटल सरकार ने समर्थन कर दिया

पुण्यतिथि :  तब मुलायम ने आगे किया कलाम का नाम और अटल सरकार ने समर्थन कर दिया
एपीजे अब्दुल कलाम (फाइल फोटो)

एपीजे अब्दुल कलाम भारत के ऐसे राष्ट्रपति बने जो इससे पहले दिग्गज साइंटिस्ट के तौर पर ख्याति अर्जित कर चुके थे. भारत में मिसाइल प्रोग्राम उन्हीं की अगुवाई में शुरू हुआ था. जब वो राष्ट्रपति पद से रिटायर हुए तो पठन-पाठन में लग गए. उनका निधन भी शिलांग में एक लेक्चर देने के दौरान ही हुआ.

  • News18Hindi
  • Last Updated: July 27, 2020, 10:04 AM IST
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भारत के पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइल मैन (Missile Man) कहे जाने वाले एपीजे अब्दुल कलाम का 05 साल पहले आज ही के दिन निधन हुआ था. वो ऐसे शख्स थे कितनी ही ऊंचाई पर जरूर पहुंच गए लेकिन सादगी को कभी नहीं छोड़ा. उनका जीवन अभावों के बीच शुरू हुआ था लेकिन प्रतिभा के बल पर कामयाबी की बुलंदिया छुईं. वो भारतीय वायुसेना में जाना चाहते थे. लेकिन उस परीक्षा में उनका सफल नहीं होना देश के लिए अच्छा रहा. क्योंकि उसके बाद वो उन्होंने देश के मिसाइल प्रोजेक्ट्स में सबसे खास योगदान दिया.

एपीजे कलाम (APJ Abdul Kalam) का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु (Tamilnadu) के शहर रामेश्वरम (Rameshwaram) में हुआ था. निधन शिलांग में 27 जुलाई 2015 को तब हुआ, जब वहां वो एक प्रोग्राम में गए हुए थे. मछुआरे के घर में पैदा हुए कलाम का बचपन अभावों में बीता. लेकिन उन्होंने बचपन से ही कुछ करने का हौसला पाल रखा था.

अपनी पढ़ाई का खर्च पूरा करने के लिए कलाम ने घर-घर में अखबार बांटना शुरू किया. वो स्कूल के बाद अपने पिता की आर्थिक मदद के लिए अखबार बांटा करते थे. कलाम साहब मेहनती और प्रतिभाशाली छात्र थे. गणित और भौतिकी उनके पसंदीदा विषय थे. कलाम का सपना इंडियन एयरफोर्स में जाने का था. इसलिए उन्होंने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. लेकिन नियती में कुछ और ही लिखा था.



एयरफोर्स की परीक्षा में फेल होना अच्छा रहा
कलाम साहब इंडियन एयरफोर्स की परीक्षा में बैठे थे. इंडियन एयरफोर्स की परीक्षा में उन्हें मिलाकर कुल 25 उम्मीदवार थे. इसमें से सिर्फ 8 उम्मीदवारों का चयन होना था. एपीजे अबुल कलाम नौवें पोजिशन पर रहे और उनका इंडियन एयरफोर्स में जाने का सपना टूट गया. उस वक्त कौन जानता था कि उनके इस सपने का टूटना सिर्फ उनके लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए अच्छा था. उन्हें और भी बड़ी भूमिका में देश की सेवा करनी थी. इसके बाद कलाम साहब ने जो किया वो इतिहास बन गया.

apj abdul kalam birth anniversary when indias missile man failed in indian airforce exam
एपीजे अब्दुल कलाम बचपन में इंडियन एयरफोर्स में जाना चाहते थे लेकिन उस परीक्षा में सफल नहीं हो पाए. हालांकि ये देश के लिए अच्छा ही रहा. उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की औऱ मिसाइल प्रोजेक्ट से जुड़े.


फिर एयरनॉटिकल साइंस की पढ़ाई की
कलाम साहब ने मद्रास इंजीनियरिंग कॉलेज से एयरनॉटिकल साइंस की पढ़ाई की थी. जब वो इंडियन एयरफोर्स में जाने से नाकाम रहे तो उन्होंने 1962 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो में नौकरी कर ली. उनके नेतृत्व में ही भारत ने अपना पहला स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान यानी पीएसएवी -3 बनाया. 1980 में इसी यान से पहला उपग्रह रोहिणी अंतरिक्ष में स्थापित किया गया.

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 तब भारत के पास मिसाइल तकनीक नहीं थी
कलाम के दौर में पूरी दुनिया में नए रक्षा और अंतरिक्ष अनुसंधान चल रहे थे. नए-नए तरीके के हथियारों का निर्माण हो रहा था. उस दौर में मिसाइल टेक्नोलॉजी को किसी भी देश की रक्षा ताकत के बतौर देखा जाता था. भारत के पास मिसाइल टेक्नोलॉजी नहीं थी. और कोई भी देश भारत के साथ इस टेक्नोलॉजी को साझा करने को तैयार नहीं था.

कलाम को दिया गया ये महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट
कलाम के नेतृत्व में ही देश ने अपने पहले स्वदेशी मिसाइल कार्यक्रम की शुरुआत की. इंटीग्रेटेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम की जिम्मेदारी कलाम साहब को दी गई. कलाम साहब ने अपने नेतृत्व में स्वदेशी मिसाइलों की लाइन लगा दी.

भारत ने उनके निर्देशन में जमीन से जमीन पर मध्यम दूरी तक मार करने वाली मिसाइल पृथ्वी मिसाइल, जमीन से हवा में मार करने वाली त्रिशूल मिसाइल और टैंक भेदी नाग मिसाइल बनाकर पूरी दुनिया में अपनी मौजूदगी दर्ज करवाई. भारत को एक के बाद एक मिसाइल देने की वजह से वो मिसाइल मैन के तौर पर मशहूर हुए.

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एपीजे कलाम ने एक के बाद एक स्वदेशी मिसाइलों की भारत में लाइन लगा दी. तब देश ने उनकी अगुवाई में मध्यम दूरी तक मार करने की कई मिसाइलें देश में ही खुद की तकनीक विकसित करके बनाईं.


अटल सरकार में परमाणु परीक्षण में खास भूमिका
साल 1992 से लेकर 1999 तक एपीजे अब्दुल कलाम रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार रहे. इसी दौरान अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने पोखरण में परमाणु परीक्षण किया. इस परमाणु परीक्षण में कलाम साहब की अहम भूमिका थी.

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साल 2002 में उन्हें भारत का राष्ट्रपति चुना गया. उनके राष्ट्रपति बनने की कहानी भी उतनी ही दिलचस्प है. 2002 में तत्कालीन राष्ट्रपति के आर नारायणन का कार्यकाल खत्म हो रहा था. अटल बिहारी वाजपेयी की एनडीए की सरकार के पास उतना बहुमत नहीं था कि अपनी पसंद का राष्ट्रपति बनवा सके. एनडीए सरकार के लिए ये परीक्षा की घड़ी थी.

मुलायम ने राष्ट्रपति पद के लिए आगे किया था कलाम का नाम
इसी दौरान समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव ने राष्ट्रपति पद के लिए कलाम साहब का नाम आगे कर दिया. वाजपेयी सरकार ने इस प्रस्ताव का समर्थन कर दिया. कांग्रेस पार्टी के सामने मुश्किल स्थिति आ गई. कांग्रेस पार्टी एक मुस्लिम उम्मीदवार की दावेदारी को खारिज करने का जोखिम नहीं उठा सकती थी. लेफ्ट पार्टियों के साथ बाकी दलों ने भी कलाम की दावेदारी का समर्थन कर दिया.

बाद में एक और रोचक वाकया उनके और मुलायम सिंह के बीच जुड़ा. कलाम के प्रेस सचिव एस एम खान ने किताब लिखी 'द पीपल्स प्रेजिडेंट: एपीजे अब्दुल कलाम'. जिसमें बताया गया कि किस तरह कलाम ने हिंदी सीखने के लिए मुलायम को गुरु बनाया था. जब मुलायम केंद्र में रक्षा मंत्री थे, तब कलाम उनके वैज्ञानिक सलाहकार थे.

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फिर शिक्षा और लेखन से जुड़ गए
कलाम इसके बाद सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस समेत सभी पार्टियों के समर्थन से वर्ष 2002 में राष्ट्रपति चुने गए. पांच साल के कार्यकाल के बाद वो शिक्षा, लेखन और सार्वजनिक सेवा में जुट गए.

विजिटिंग प्रोफेसर बने 
राष्ट्रपति का कार्यकाल खत्म होने के बाद वो इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट शिलांग, अहमदाबाद, इंदौर और बेंगलुरु के मानद फैलो और विजिटिंग प्रोफेसर बन गए. साथ ही भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान और प्रोद्योगिकी संस्थान तिरुवनंतपुरम के कुलाधिपति भी बने. कई और जाने-माने शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों से जुड़े. कलाम कर्नाटक भक्ति संगीत हर दिन सुनते थे और हिंदू संस्कृति में विश्वास करते थे. 

शिलांग में व्याख्यान देने के दौरान दिल का दौरा पड़ा और निधन
27 जुलाई 2015 की शाम जब कलाम आईआईएम शिलोंग में व्याख्यान दे रहे थे, तभी उन्हें दिल का दौरा पड़ा पड़ा. वो बेहोश होकर गिर पड़े. गंभीर हालत में शाम को अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन दो घंटे बाद यानि 08.30 बजे रात में उनका निधन हो गया.
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