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जब तबलीगी जमात के प्रभाव के कारण हो गया था पाकिस्तान क्रिकेट का बंटाधार

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: April 3, 2020, 11:48 AM IST
जब तबलीगी जमात के प्रभाव के कारण हो गया था पाकिस्तान क्रिकेट का बंटाधार
ये वर्ष 2003 के वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने वाली पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के खिलाड़ी हैं, जिनके बारे में कहा जाता था कि वो तबलीगी जमात के असर में थे

भारत में तबलीग जमात चर्चाओं में है. ऐसे में ये जानना जरूरी है कि कई सालों तक पाकिस्तान क्रिकेट टीम किस तरह तबलीगी जमात के प्रभाव में थी. ये तब हुआ था जबकि इंजमाम उल हक पाकिस्तान टीम के कप्तान बने थे

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  • Last Updated: April 3, 2020, 11:48 AM IST
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देश में तबलीगी जमात चर्चाओं में है. वजह है निजामुद्दीन के तबलीगी मरकज में आए कई लोगों में कोरोनावायरस पॉजिटिव होने की पुष्टि. बहुत कम लोगों को पता होगा कि एक जमाने में तबलीगी जमात के असर ने बुरी तरह पाकिस्तान क्रिकेट टीम को जकड़ लिया था. इसका प्रभाव उनके खेल पर बहुत बुरा पड़ा था. तब टीम ये मानने लगी थी कि वो नमाज के बल पर कुछ भी कर लेगी.

इसका जिक्र पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के पूर्व चेयरमैन शहरयार खान ने अपनी किताब "द क्रिकेट कालड्रॉन" में भी किया है. उनकी किताब में लिखा है, " वर्ष 2004 में इंजमाम उल हक को कप्तान बनाए जाने के बाद पाकिस्तान क्रिकेट टीम पर तबलीगी जमात का रंग पूरी तरह से चढ़ गया."

किताब इसका काफी विस्तार से जिक्र करती है, " उन दिनों पाकिस्तान क्रिकेट टीम में किस तरह क्रिकेटरों के बीच तबलीगी प्रभाव सिर चढ़कर बोल रहा था. वो सार्वजनिक तौर पर इसका प्रदर्शन करने में भी पीछे नहीं रहते थे."



इस किताब में ये भी लिखा है कि किस तरह से जब पाकिस्तान टीम वर्ष 2007 में वर्ल्ड कप खेलने गई तो वो अपने साथ खासतौर पर तबलीगी जमात के मौलाना भी ले गई, जो ट्रेनिंग की बजाए, उनके दिन में कई बार नमाज पर जोर देती थी. पाकिस्तान टीम के तत्कालीन कोच बॉब वूल्मर की इसे लेकर टीम के कप्तान इंजमाम उल हक और सदस्यों से तकरार भी होती रही लेकिन टीम ने कोच की बजाए मौलानाओं की बात ज्यादा मानी.



तब पाकिस्तानी क्रिकेटर हर मैच के बाद प्रेस कांफ्रेंस में अल्लाह का शुक्रिया अदा करते थे. मैदान पर सार्वजनिक तौर पर नमाज अदा करते थे. ज्यादातर खिलाड़ियों ने अपनी दाढ़ी बढ़ा ली थी. मैच के बाद होटल के कमरों में क्रिकेटर तबलीगी लिबास में रहते थे.

इंजमाम उल हक ने पाक टीम पर चढ़ाया तबलीगी रंग 
यूं तो इंजमाम उल हक के कप्तान बनने से पहले ही पाकिस्तान टीम पर तबलीगी असर नजर आने लगा था, जब सईद अनवर बढ़ी दाढ़ी में नजर आने लगे थे. सईद खुद भी तबलीगी जमात में शामिल थे. वर्ष 2003 में वर्ल्ड कप से पहले उन्होंने पूरी पाकिस्तान टीम को बुलाकर कहा, अल्लाह हमारे साथ है, हम जरूर इसे जीतेंगे. हालांकि पाकिस्तान टीम उस वर्ल्ड कप में मामूली टीमों से हारने के बाद पहले ही राउंड में बाहर हो गई.

माना जाता है कि वर्ष 2004 में जब इंजमाम उल हक पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान बने तो टीम पर तबलीगी रंग चढ़ गया


खिलाड़ियों ने दाढ़ी बढ़ा ली थी, जिम नहीं जाते थे
इसके बाद वर्ष 2004 में इंजमाम कप्तान बने. धीरे धीरे उनकी टीम पर तबलीगी असर नजर आने लगा. टीम के आधे से ज्यादा खिलाड़ि़यों ने दाढ़ी बढ़ा ली थी. वो मैदान पर नमाज अदा करते थे. बात-बार हाथ ऊपर उठाकर पैगंबर का शुक्रिया अदा करते थे. हालांकि वो जिम में जाने से परहेज बरतते थे. क्योंकि उन्हें ये काम तबलीग जमात की शिक्षाओं के खिलाफ लगता था.

योहाना ने धर्म परिवर्तन के पीछे भी तबलीगी असर 
उसी दौर में इंजमाम की टीम में एक प्रतिभाशाली ओपनर बल्लेबाज थे युसुफ योहाना. वो दलित ईसाई थे. बाद में वो मुस्लिम बन गए और तबलीग जमात को मानने लगे. युसुफ योहाना से मोहम्मद युसुफ बनने के बाद उन्होंने कई बार माना कि ऐसा करने से उनका प्रदर्शन सुधर गया है. वो इसका क्रेडिट इंजमाम को देते थे.

ये असर तीन साल तक चला
कहा जाता है कि तब कप्तान इंजमाम धार्मिक तौर पर अपनी टीम के तमाम क्रिकेटरों को अपने असर लिए हुए थे. शहरयार ने लिखा, "उन दिनों ऐसा लगता था मानो पाकिस्तान क्रिकेट में कोई धार्मिक आंदोलन चल रहा हो. ये सब तीन साल तक चला. वर्ष 2007 में ये पाकिस्तानी टीम इंजमाम की अगुवाई में वेस्टइंडीज में वर्ल्ड कप खेलने पहुंची. पहले ही राउंड में हारकर बाहर हो गई."

पाकिस्तान में तबलीगी जमात के एक प्रोग्राम में पूर्व क्रिकेटर सईद अनवर और पाकिस्तान के दिवंगत गायक जुनैद जमशेद


लोगों ने राहत की सांस ली जब टीम तबलीगी असर से निकली
हालांकि पाकिस्तान क्रिकेट में बाद में ये माना गया कि तबलीगी जमात के प्रभाव से निकलने के बाद ही पाकिस्तान क्रिकेट टीम वापस पटरी पर लौट पाई. जब पाकिस्तान टीम ने वर्ष 2017 में चैंपियंस ट्रॉफी जीती तो आमतौर पर मीडिया में यही कहा गया कि टीम की जीत का बहुत बड़ा श्रेय उसके तबलीगी जमात के प्रभाव से अलग होने को भी जाता है.

कई दिग्गज पाक क्रिकेटर रहे हैं तबलीगी
पाकिस्तान के जो दिग्गज क्रिकेटर तबलीगी जमात से जुड़े रहे हैं, उसमें शाहिद आफरिदी, सकलैन मुश्ताक, सईद अनवर जैसे नाम शामिल हैं. इंजमाम उल हक के अलावा ये सभी क्रिकेटर तबलीगी जमात के सक्रिय सदस्य हैं.

भारत से निकले इस असरदार मुस्लिम आंदोलन को आमतौर पर दुनियाभर के सुन्नियों ने अपनाया, जिसमें मूल तौर पर धर्म का अभ्यास उसी तरह करने पर जोर है, जिस तरह की इसकी पद्धतियां पैगंबर द्वारा की जाती थीं. यानि वैसी ही ड्रेस, परंपराएं और व्यक्तिगत आचरण-व्यवहार.

हालांकि पाकिस्तान सेना से लेकर आईएसआई तक में बड़े-बड़े अफसर तबलीगी जमात से जुड़े हैं, जो खुद को गैर राजनीतिक धार्मिक संगठन कहता है. पाकिस्तानी आईएसआई के पूर्व प्रमुख रहे जावेद नासिर अगर इसके सदस्य थे तो पाकिस्तानी आर्मी के पूर्व प्रमुख जनरल मुहम्मद अहमद भी इससे जुड़े रहे हैं. पाकिस्तान के कई राजनीतिज्ञ, गायक और मॉडल भी इससे ताल्लुक रखते रहे हैं.

तबलीगी जमात दुनियाभर के 200 से अधिक देशों में फैला हुआ है. दक्षिण एशियाई मुल्कों में ही इसके 15-20 करोड़ फॉलोअर हैं.

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First published: April 1, 2020, 4:16 PM IST
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