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...तब रवि शास्त्री करते थे सौरव गांगुली की तारीफ, पैरवी भी की थी

News18Hindi
Updated: October 15, 2019, 5:24 PM IST

पहली बार सौरव गांगुली के छक्के पर अगर कोई प्रभावित हुआ और उनकी पैरवी टाटा ग्रुप की कंपनी की क्रिकेट टीम के लिए पैरवी की थी

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  • Last Updated: October 15, 2019, 5:24 PM IST
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नईदिल्ली. आप इस बात पर विश्वास करें या ना करें लेकिन ये पूरी तरह सच है. एक जमाना था जब सौरव गांगुली (Saurav Ganguly) फर्स्ट क्लास क्रिकेट (First class Cricket)  में अपनी पहचान बना रहे थे और संघर्ष कर रहे थे. तब मदद के लिए उनका हाथ रवि शास्त्री (India cricket team coach Ravi Shastri) ने ही पकड़ा था. उन्होंने तब उनकी पैरवी भी की थी.

भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान (former India Cricket Captain)  सौरव गांगुली बीसीसीआई के अध्यक्ष (President of BCCI) बनने जा रहे हैं. उनकी इस ताजपोशी पर 23 अक्टूबर को आधिकारिक तौर पर मुहर लग जाएगी. जब से ये खबरें आनी शुरू हुईं तो उसके साथ सोशल मीडिया में इन टिप्पणियों की भी बाढ़ आ गई कि सौरव अब भारतीय क्रिकेट टीम के कोच रवि शास्त्री के साथ कैसा व्यवहार करेंगे.

ऐसा माना जाता है कि गांगुली और शास्त्री के संबंध अच्छे नहीं हैं. गांगुली उनको भारतीय टीम का कोच बनाने के पक्ष में नहीं थे. इसे लेकर दोनों के बीच कुछ ऐसी बातें हुईं कि ऐसा लगा कि वो एक दूसरे को पसंद नहीं करते हैं. उसके बाद मीडिया में ये खबरें फैलीं कि सौरव और रवि के संबंधों में खटास है.

हालांकि गांगुली को 90 के दशक के आखिर में भारतीय क्रिकेट के ऐसे कप्तान के रूप में जरूर जाना जाता है, जिन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम के तेवर बदलकर उसे गजब के आत्मविश्वास और विलपॉवर से लैस किया.

सौरव गांगुली 23 अक्टूबर को विधिवत बीसीसीआई के नए अध्यक्ष (BCCI President) बन जाएंगे.
सौरव गांगुली को भारतीय क्रिकेट के तेवरों में बदलाव लाने वाले कप्तान के रूप में जाना जाता है


बड़े भाई को ड्रॉप कर उन्हें मौका मिला
राजदीप सरदेसाई की किताब डेमोक्रेसी इलेवन -द ग्रेट इंडियन क्रिकेट स्टोरी के अनुसार 1989 में सौरव ने बंगाल की ओर से अपना पहला फर्स्ट क्लास मैच दिल्ली के खिलाफ खेला. बंगाल रणजी ट्रॉफी के फाइनल तक पहुंचा. इसमें सौरव के बड़े भाई स्नेहाशीष बंगाल से खेल रहे थे.
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पूरे सीजन रणजी ट्रॉफी में उन्हें खिलाए जाने के बाद फाइनल मैंच में उन्हें ड्रॉप कर दिया गया. उनकी जगह सौरव को मौका दिया गया.
सौरव अभी 17 साल के भी नहीं हुए थे. इसमें सौरव ने 22 रन बनाए. लेकिन लेफ्ट हैंडर सौरव की नेचुरल बैटिंग ने विशेषज्ञों को प्रभावित किया.

रवि शास्त्री की गेंद पर छक्का
एक साल बाद सौरव ने पूर्वी जोन की ओर से वेस्ट जोन के खिलाफ खेलते हुए अपनी पहली फर्स्ट क्लास सेंचुरी लगाई और फिर चार विकेट लिये. इसके बाद विल्स ट्रॉफी वन-डे मैच में जब उन्होंने वेस्ट जोन के खिलाफ रवि शास्त्री की गेंद पर मुंबई के ब्रेबोर्न स्टेडियम में जोरदार छक्का लगाया तो वो शास्त्री उनसे प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके.

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अपना फर्स्ट क्लास मैच खेलते हुए जब सौरव ने रवि शास्त्री की गेंद को छक्के के लिए उड़ाया तो रवि उनकी क्षमता के लिए कायल हो गए और उन्होंने उनकी पैरवी भी की थी


शास्त्री ने उनकी पैरवी भी की
शास्त्री इस कदर प्रभावित हुए कि उन्होंने गांगुली का नाम उस टाटा ग्रुप की टीम के लिए अपनी ओर से रिकमंड किया, जिसे वो खुद भी खेलते थे. बाद में रवि शास्त्री ने सौरव की बैटिंग के बारे में कहा, उन्होंने स्वाभाविक अंदाज में फ्री फ्लो बैट से छक्का लगाया था. बाद के बरसों में गांगुली की बैटिंग लेफ्ट आर्म स्पिनर्स के खिलाफ गजब की होती चली गई. उनकी इस क्षमता को रवि शास्त्री ने तभी पहचान लिया था.

1991-92 में सौरव को भारतीय टीम में चुना गया. लेकिन उनका ये दौरा अच्छा नहीं रहा था. वो चार टेस्ट मैचों में 12वें खिलाड़ी बनकर बाहर ही बैठते रहे. केवल एक वन-डे मैच खेलने का उन्हें मौका मिला. बाद में मैदान पर ड्रिंक्स ले जाने को लेकर सौरव के नाम पर विवाद भी हुआ. ये कहा गया कि उन्होंने मैदान पर ड्रिंक्स ले जाने से मना कर दिया था. हालांकि बाद में गांगुली ने इससे इनकार किया, ऐसा कुछ नहीं हुआ था. ये बातें बेवजह ही फैलाई गईं थीं.

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First published: October 15, 2019, 3:51 PM IST
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