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क्या तारे भी याद रखते हैं अपना इतिहास, नए शोध दिया जवाब

अब तारों (Stars) का नई क्षमताओं से अध्ययन उनके स्पंदन के जरिए उनके इतिहास की भी जानकारी दे सकेंगे. (प्रतीकात्मक तस्वीर: NASA/ESA)

अब तारों (Stars) का नई क्षमताओं से अध्ययन उनके स्पंदन के जरिए उनके इतिहास की भी जानकारी दे सकेंगे. (प्रतीकात्मक तस्वीर: NASA/ESA)

तारों (Stars) की जटिलता के कारण उनके जीवन चक्र (Life Cycle of Stars) का अध्ययन अभी तक अच्छे से नहीं हो पाता था. लेकिन न ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

तारों का जीवन चक्र कई जटिल प्रक्रियाओं से गुजरता है.
इसलिए उनके शिशुकाल से युवाकाल के प्रतिमान बनाना बहुत मुश्किल था.
तारों के स्पंदन के अध्ययन से अब यह सब आसान हो गया है.

तारों का बचपन ही उनके विकास क्रम को आकार देता है. जिसमें बहुत ही ज्यादा जटिल प्रक्रियाएं होती है. यही वजह है कि उनके विकास के सैद्धांतिक प्रतिमान बनाना बहुत ही मुश्किल काम है. तारों की उम्र, संरचना और निर्माण के बारे में कई तरीकों से जानकारी हासिल की जाती है इनमें से एक तारों का स्पंदन (oscillations of Stars) है. इस आधार पर वैज्ञानिक अब ना केवल तारों के शिशुकाल के जरिए आने वाले विकास के बारे में, बल्कि वर्तमान अवस्था के मुताबिक उनके बचपन के बारे में भी जान सकते हैं जो पहले संभव नहीं माना जाता था.

एस्ट्रोसीज्मोलॉजी का क्षेत्र
ब्रह्माण्ड में अरबों तारे हैं. उनमें से लाखों करोड़ों तारों का हमारे खगलविद कई दशकों से अध्ययन कर रहे हैं. नए एस्ट्रोसीज्मोलॉजी के क्षेत्र के विशेषज्ञ कोन्सटेन्जे ज्विन्ट्ज का कहना है कि जिस तरह पृथ्वी के आंतरिक भागों में जाए बिना भूकंपीय तरंगों के जरिए वहां की प्रक्रियाओं की व्याख्या की जा सकती है उस तरह के स्पंदन के जरिए भी तारों की उम्र आदि की जानकारी मिल सकती है.

नई उन्नत टेलीस्कोपों का सहारा
ज्विन्ट्ज इन्सब्रूक यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूटफॉर एस्ट्रो- पार्टिक फिजिक्स में शोध समूह “स्टेलर इवेल्यूशन एंड एस्ट्रोसीज्मोलॉजी” के प्रमुख हैं . आज जेम्स वेब,  TESS, केप्लर, जैसे स्पेस टेलीस्कोप की बढ़ी हुई सटीक क्षमता के कारण तारों के स्पंदन का अध्ययन पहले से काफी बेहतर हो गया है. इसी वजह से नए अध्ययन दशकों पुरानी तारों के विकास के सिद्धातों पर नया प्रकाश डालने का काम कर रहे हैं.

कब तक रहता है तारों का बचपन
जबतक तारे अपने क्रोड़ में हाइड्रोजन को हीलियम में बदलना शुरू नहीं कर देते हैं, माना जाता है कि उनका बचपन का दौर चल रहा है. इस दौर में वे मेन सीक्वेंस से पहले की स्थिति में माने जाते हैं और उस अवस्था में पहुंचने पर ही व्यस्क की श्रेणी में पहुंच जाते हैं. इस अध्ययन के प्रमुख लेखक थॉमस स्टेंडल का कहना है कि अभी तक तारों के शोध व्यस्क तारों पर ही ज्यादा ध्यान देते रहे हैं.

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तारों (Star) की व्यस्क अवस्था उनके जीवनल में नाभकीय संलयन से शुरू होती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

नजरअंदाज किया गया था बचपन का दौर
स्टेंडल का कहना है कि यह अजीब लगता है कि लेकि नअभी तक क मेन सीक्वेंस के पहले वाली अवस्था पर बहुत कम ध्यान दिया गया है. क्योंकि यह दौर बहुत ही अशांत और उग्र होता है इसलिए इसका प्रतिमान बनाना भी कठिन होता है. यह केवल हाल के सालों में तकनीकी विकास के कारण संभव हो सका है कि जिससे हम तारों के शिशुकाल को नजदीक से देख सके  हैं और और उस क्षण को देख पाए हैं जब हाइड्रोजन का हीलियम में संलयन शुरू होता है.

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व्यस्क काल से पहले के समय के अनुमान
वर्तमान अध्ययन में शोधकर्ताओं  एक नया प्रतिमान पेश किया है जिसे तारों की जीवन के शुरुआती दौर की जानकारी हासिल की जा सकती है जब वे व्यस्क अवस्था में पहुंचने से भी काफी पहले थे. यह प्रतिमान ओपन सोर्स तारकीय विकास कार्यक्रम MESA (मॉड्यूल्स फॉर एक्सपेरिमेंट इन स्टैलर एस्ट्रोफिजिक्स) के पर आधारित है.

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नए उन्नत टेलीस्कोप (Telescope) से तारों के शैशवकाल का अध्ययन संभव हो सका है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

स्पंदन होता है बचपन से निर्धारित
शोधकर्ताओं का कहना है कि उनक आंकड़े दर्शाते हैं कि उनके प्रीमेन सीक्वेंस उदभव काल में बहुत अस्त व्यस्त अवस्था में होते हैं. जटिलता के बाद भी वे इस नए सैद्धांतिक प्रतिमानों का उपयोग कर सकते हैं. खगोलविदों ने दर्शाया है कि जिस तरह से तारों का निर्माण होता है तो नाभकीय संलयन शुरु होने के बाद भी, उसका उनके स्पंदन के बर्ताव पर असर होता है. शिशुकाल का तारों के बाद के स्पंदन या धड़कन पर भी प्रभाव पड़ता है जिस पर पहले संदेह किया जाता था.

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शास्त्रीय सिद्धांत मानता है कि संलयन शुरू होने के पहले का समय मायने नहीं रखता है. लेकिन यह सही नहीं है. शोधकर्ता इस खोज से काफी उत्साहित और आशांवित हैं. वे साबित करने में सफल रहे हैं कि व्यस्क तारों पर उनके शुरुआती विकास का प्रभाव पड़ता है. बेशक यह तारों का जीवनचक्र समझने के दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है.

Tags: Research, Science, Space

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