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आर्मी के ये टॉप 05 कमांडर इस साल होने जा रहे हैं रिटायर

भारतीय सेना के जवानों की फाइल तस्वीर.

भारतीय सेना के जवानों की फाइल तस्वीर.

भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव (India-China Tension) साल 2020 की सबसे बड़ी सुर्खियों में शुमार रहा, तो इस वजह से आर्मी की रणनीति (Army Strategy) और तैनाती भी लगातार खबरों में रही. 2021 में आर्मी में आलाकमान स्तर पर अहम बदलाव देखने को मिलेंगे.

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    इस साल अगले 10 दस महीनों के दरमियान आर्मी के शीर्ष 5 कमांडर (Top 5 Commanders of Indian Army) सेवामुक्त हो जाएंगे. आपको शायद नहीं पता हो कि आर्मी में कमांडर स्तर के कुल 8 ओहदे हैं, जिनमें से फिलहाल दो तो आर्मी के उप प्रमुख के पास हैं और एक और शिमला बेस्ड ट्रेनिंग कमांड (Simla Based Training Command) में है. इनके अलावा, जो बाकी पांच हैं, वहां तैनात 5 लेफ्टिनेंट जनरलों को इस साल विदाई दी जा सकती है क्योंकि उनका सेवा समय पूरा हो रहा है. इन पांचों टॉप कमांडरों के बारे में ऐसा बहुत कुछ है, जिसे देश को जानना चाहिए.

    ज़ाहिर है कि इन पदों पर अफसरों को प्रमोट किया जाएगा, लेकिन दिलचस्प फैक्ट यह है कि प्रमोशन का आधार मेरिट और वरीयता के साथ यह भी है कि कम से कम 18 महीने की सर्विस बाकी हो, तभी किसी अफसर को कमांडर पद पर प्रमोशन मिल सकता है. इन पदों पर कौन दिख सकता है ये भी बताएंगे, पहले आपको बताते हैं कि इस साल विदा होने वाले कमांडर कौन हैं.

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    कौन हैं रिटायर होने वाले 5 कमांडर?
    सबसे पहले 31 जनवरी को आर्मी स्टाफ के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एसके सैनी रिटायर होने वाले हैं. ट्रिब्यून इंडिया की खबर की मानें तो इसके बाद सेंट्रल आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल आईएस घुमन और लेफ्टिनेंट जनरल एएस क्लेर 31 मार्च को और पूर्वी आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल एएस चौहान 31 मई को सेवा से मुक्त होंगे. आखिर में 31 अक्टूबर तक पश्चिमी आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल आरपी सिंह को विदाई दी जाएगी.

    गौरतलब है कि आर्मी चीफ के रिटायरमेंट की उम्र जहां 62 साल है, वहीं आर्मी कमांडरों की सेवानिवृत्ति इससे दो साल पहले यानी 60 की उम्र में ही हो जाती है. बहरहाल, इन पांचों कमांडरों के बारे में सिलसिलेवार दिलचस्प बातें जानिए.

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    लेफ्टिनेंट जनरल एसके सैनी.


    39 साल का शानदार करियर
    सबसे पहले लेफ्टिनेंट जनरल सतिंदर कुमार सैनी की बात करें तो 1981 में जाट रेजिमेंट से सेना में करियर की शुरूआत करने वाले सैनी 2016 में लेफ्टिनेंट जनरल पद तक पहुंचे थे. डिफेंस और रणनीतिक स्टडीज़ में कुल तीन डिग्रियां हासिल करने वाले सैनी को परम विशिष्ट सेवा मेडल, ​अति विशिष्ट सेवा मेडल और युद्ध सेवा मेडल जैसे खास सम्मान मिल चुके हैं. सैनी ने इराक कुवैत यूएन मिशन, मंगोलिया में शांति अभ्यास और ऑस्ट्रेलिया में आतंकवाद निरोधी मिशनों में भी सेवाएं दी हैं.

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    पूर्व से पश्चिम तक की कमांड
    लेफ्टिनेंट जनरल इकरूप सिंह घुमन ने 1981 में सेना में करियर शुरू किया था और ऑपरेशन पराक्रम के दौरान एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल बटालियन की कमान संभाली थी. परम विशिष्ट और अति विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित घुमन ईस्टर्न और वेस्टर्न कमांड समेत कई अहम मोर्चों पर सेवाएं दे चुके हैं. अंगोला के यूएन मिशन में भी घुमन ऑब्ज़र्वर रहे.

    विरासत में मिला सेना का शौर्य
    लेफ्टिनेंट जनरल आलोक सिंह क्लेर के पिता जनरल गुरुदेव सिंह क्लेर 1965 के भारत पाकिस्तान युद्ध में शामिल थे. क्लेर के बड़े भाई जसजीत सिंह भारतीय वायु सेना के अफसर रहे. यही नहीं, क्लेर के ससुर ​भी ब्रिगेडियर रहे हैं. 1982 में सेना में शुरूआत करने वाले क्लेर परम विशिष्ट सेवा मेडल से नवाज़े जा चुके हैं. इसके अलावा खेलो, एडवेंचर और फिटनेस के साथ उनका नाम साइकिलिस्ट और पैरा जंपर के तौर पर सुर्खियों में रहा है.

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    कश्मीर से नॉर्थ ईस्ट तक सेवाएं
    लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान ने सेना में अपना करियर 1981 में गोरखा राइफल्स के साथ शुरू किया था और करीब 39 सालों के करियर में उन्होंने परम विशिष्ट सेवा मेडल के साथ ही उत्तम युद्ध सेवा मेडल और सेना मेडल से भी नवाज़ा गया. घुसपैठ के खिलाफ जम्मू कश्मीर और पूर्वोत्तर के अभियानों के साथ ही अंगोला में यूएन मिशन में भी सेवाएं दे चुके चौहान कई अहम भूमिकाओं में रहे.

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    भारत के आर्मी चीफ एमएम नरवणे.


    38 साल की परम विशिष्ट सेवा
    1982 में सेना में इन्फैंट्री रेजिमेंट से सेवा शुरू करने वाले रवेंद्र पाल सिंह कई रेजिमेंटों में रहे और अफ्रीका में यूएन मिशनों के लिए ऑब्ज़र्वर भी रहे. वेस्टर्न थिएटर में सिंह ने बखूबी कमान संभाली. परम विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित सिंह इस साल अक्टूबर महीने तक रिटायर होने जा रहे हैं.

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    कौन होंगे नए कमांडर
    अप्रैल 2022 में जनरल एमएम नरवणे के रिटायर होने के बाद आर्मी प्रमुख के पद के लिए कई अफसर दौड़ में हैं. खबरों की मानें तो कमांडर पद पर नियुक्ति पाने से आर्मी प्रमुख बनने का रास्ता और आसान हो जाता है. मेरिट प्रमोशन की शर्त होती है, लेकिन सरकार वरीयता का सिद्धांत भी अपना सकती है. ऐसे में कमांडरों के पदों पर इन्फैंट्री और आर्मर्ड कॉर्प्स, दोनों खेमों के अफसरों को हम देख सकेंगे.

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