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कोरोना वायरस के खिलाफ महायुद्ध में ये 7 महारथी दिलाएंगे जीत

News18Hindi
Updated: March 28, 2020, 7:15 PM IST
कोरोना वायरस के खिलाफ महायुद्ध में ये 7 महारथी दिलाएंगे जीत
कोरोना वायरस से मुकाबले में डॉक्‍टर्स, पुलिसकर्मी से लेकर डिलिवरी बॉयज तक अपनी परवाह किए बिना योगदान दे रहे हैं. आप घर में रहकर योगदान दीजिए.

कोरोना वायरस (Coronavirus) संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए इस समय देश की 130 करोड़ आबादी लॉकडाउन (Lockdown) के दौर से गुजर रही है. ऐसे में कई ऐसे पेश हैं, जिनसे जुड़े लोग आपके और कोरोना वायरस के बीच दीवार बनकर खड़े हैं. आइए जानते हैं कि इस महायुद्ध के ये महारथी (Worrier) कैसे आपको संक्रमण से बचा रहे हैं...

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  • Last Updated: March 28, 2020, 7:15 PM IST
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भारत इस समय कोरोना वायरस (Coronavirus) के खिलाफ महायुद्ध में डटा हुआ है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने लॉकडाउन का फैसला किया तो कुछ लोगों की जिम्‍मेदारी पहले से बढ गई तो कुछ पहले ही इस वायरस के खिलाफ हथियार उठाए मैदान में डटे थे. इस महायुद्ध में बड़ी संख्‍या में ऐसे लोग हैं, जिनकी जिंदगी सीधे जोखिम में है. लेकिन ये लोग अपनी जान की परवाह किए बिना अपने-अपने मोर्चे को मुस्‍तैदी के साथ संभाले हुए हैं. इनमें अस्‍पतालों में संक्रमितों के सीधे संपर्क में आने वाले हेल्‍थकेयर कर्मी (Healthcare Workers) हैं तो शहरों-कस्‍बों में लॉकडाउन (Lockdown) को सफल बनाने के लिए पुलिस के जवान दिनरात खाने-पीने की परवाह किए बिना जुटे हुए हैं.

इस श्रृंखला में वैज्ञानिक और शोधकर्ता वायरस को हर पहलू से समझकर कारगर इलाज (Treatment) ढूंढने में लगे हें तो डोर टू डोर आपकी जरूरत की चीजों को पहुंचाने वाले डिलिवरी बॉयज की भूमिका को भी संक्रमण फैलने से रोकने में कम मत आंकिए. वहीं, मीडियाकर्मी सही और पूरी जानकारी आप तक पहुंचाने के लिए बाहर निकल रहे हैं. आइए जानते हैं कि ये महारथी (warriors) कैसे आपको संक्रमण से बचा रहे हैं...

डॉक्‍टर्स और हेल्‍थकेयर सिस्‍टम से जुड़ा हर कर्मचारी
दुनियाभर के विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि सोशल डिस्‍टेंसिंग (Social Distancing) का ध्‍यान रखें और एक जगह पर ज्‍यादा लोग इकट्ठे न हों. संक्रमित व्‍यक्ति से दूर ही रहें. ये सुझाव डॉक्‍टरों (Doctors) पर लागू नहीं हो सकता है. उन्‍हें हर संक्रमित मरीज का इलाज ही नहीं पूरा ख्‍याल भी रखना है. डॉक्‍टर्स और नर्सिंग स्‍टॉफ के लोग बिना अपनी जिंदगी की परवाह किए लोगों का इलाज कर रहे हैं. उस पर भी भारत में डॉक्‍टरों की संक्रमण से सुरक्षा की पूरी व्‍यवस्‍था भी उपलब्‍ध नहीं है. इन सब कारणों के चलते संक्रमण का सबसे ज्‍यादा खतरा डॉक्‍टरों और नर्सिंग स्‍टाफ को रहता है.



कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में सबसे पहली कतार में डॉक्‍टर्स और पैरा मेडिकल स्‍टाफ के लोग खडे हैं. ये संक्रमित व्‍यक्ति के सीधे संपर्क में आते हैं. इन्‍हें संक्रमण का सबसे ज्‍यादा खतरा है.




हाल में दिल्‍ली और केरल में संक्रमितों का इलाज करने वाले डॉक्‍टरों के बीमारा होने का मामला सामने आ चुका है. वहीं, हाल में डॉक्‍टरों का एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें वे कह रहे हैं कि हम अस्‍पताल में आपके लिए हैं. प्‍लीज आप अपने घरों में ही रहें. हम आपके लिए अपने घर नहीं जा सकते हैं. अस्‍पतालों में पैरा मेडिकल स्‍टाफ पहले के मुकाबले ज्‍यादा घंटे काम कर रहा है. डॉक्‍टरों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं. डॉक्‍टर्स ही इस महायुद्ध में पहला मोर्चा संभाले हुए हैं.

वैज्ञानिक और शोधकर्ता दिनरात इलाज ढूंढने में जुटे
मुसीबत की तरह अचानक सामने आई इस बीमारी के लिए कोई भी देश तैयार नहीं था. इसलिए इसकी टेस्टिंग किट से लेकर दवाई या वैक्‍सीन के बारे में पहले से सोचने का तो सवाल ही नहीं उठता है. जब ये बीमारी अपने पूरे असर के साथ सामने आई तो भारतीय वैज्ञानिक और शोधकर्ता दिनरात इसका इलाज ढूंढने में जुट गए. इस काम में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की पूरी टीम नेतृत्‍व कर रही है. नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के शोधकर्ताओं ने कुछ दिन पहले ही इसके स्‍ट्रेन को अलग करने में सफलता हासिल की है. वैज्ञानिकों का दावा है कि इससे कोरोना वायरस का इलाज व वैक्‍सीन बनाने में मदद मिलेगी.

आज यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद (UoH) ने दावा किया है कि बायो केमेट्री डिपार्टमेंट के स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज की फैकल्टी मेंबर डॉक्टर सीमा शर्मा ने कोरोना वायरस का वैक्सीन बना लिया है. अब इसे टेस्‍ट के लिए भेज दिया गया है. वहीं, पुणे की माईलैब डिस्कवरी सॉल्‍यूशन ने टेस्टिंग किट बनाने में सफलता हासिल कर ली. इसे आईसीएमआर की मंजूरी भी मिल गई है. कंपनी ने किट का पहला बैच पुणे, मुंबई, ​दिल्ली, गोवा और बेंगलुरु के डायग्नोस्टिक लैब में भेज दिया है. भारत में कोरोना संक्रमण अभी दूसरे चरण में हैं. आईसीएमआर अनुसंधान कर रहा है कि भारत कब तीसरे चरण में प्रवेश करेगा. इसके अलावा कौन सी दवा दी जानी है और कौन सी नहीं, ये सब तय करने की जिम्‍मेदारी इसी संस्‍था पर है.

पुलिस जहां लॉकडाउन को सफल बनाने में जुटी है तो वैज्ञानिक और शोधकर्ता कोरोना वायरस का इलाज व वैक्‍सीन ढूंढने में दिनरात जुटे हैं


नई पीढ़ी को देखने को मिला पुलिस का नया रूप
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लॉकडाउन की घोषणा को लागू कराना पुलिस और प्रशासन का जिम्‍मा है. इस काम को पुलिस अपनी क्षमता के हिसाब से पूरी मुस्‍तैदी से निभाने की भरसक कोशिश कर रही है. इस समय पुलिस की जिम्‍मेदारी इतनी ही भर नहीं रह गई है. पुलिस और प्रशासन लोगों को खाना खिलाने से लेकर घर में कैद लोगों तक जरूरी सामान पहुंचवाने तक का काम करती हुई नजर आ रहा है. पुलिस के जवान दिनरात सड़कों पर रहकर हमारी सुरक्षा के साथ ये भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि कोई घर से बेवजह बाहर नहीं निकले. साथ ही इमरजेंसी सेवा के लिए बाहर निकलने वालों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के सुचारू रखने की जिम्‍मेदारी पुलिस पर ही है. ये सब काम करने के बीच अपनी परवाह के लिए इनके पास वक्‍त नहीं है. घनी आबादी वाले इलाकों में पुलिस लगातार अनाउंसमेंट करके लोगों को घर में रहने के लिए प्रोत्‍साहित कर रही है. जरूरत है अपनी जिम्‍मेदारी समझते हुए उनका सहयोग करने की.

आपके और संक्रमण के बीच दीवार बन गए हैं डिलिवरी बॉयज
देश की 130 करोड आबादी घरों में कैद है. कुछ लोगों ने पहले से ही खाने-पीने की चीजों का इंतजाम कर लिया था तो कुछ नहीं कर पाए. इस हालत में आपको एक ही रास्‍ता सूझता है ऑनलाइन ऑर्डर. जब आप संक्रमण के डर से घरों में है तो ये डिलिवरी बॉयज बाहर निकलकर आप तक जरूरत की हर चीज पहुंचा रहे हैं. छोटे-बड़े शहरों में होम डिलिवरी सिस्‍टम शुरू हुए लंबा अरसा हो चुका है. आज आप सब्‍जी से लेकर दवाई और दूध से लेकर राशन तक अपने घरों में बैठे-बैठे ही मंगा सकते हैं. प्रशासन ने इन्‍हें भी कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में योद्धा माना है. आपके दरवाजे पर दूध पहुंचाने वाले भइया हों या राशन पहुंचाने वाला किसी स्‍टोर का कर्मी, ये सब आज आपके और संक्रमण के बीच दीवार बनकर खड़े हो गए हैं. इस बीच टेलिमीडिया सर्विसेज यानी इंटररनेट सर्विस प्रोबाइडर्स की भूमिका भी कम नहीं है. ज्‍यादातर दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम कर दिया गया है. ऐसे में इंटरनेट से जुड़ी हर समस्‍या से निपटने के लिए इंटरनेट सर्विस प्रोबाइडर्स को भी बाहर निकलने की छूट दी गई है.

रोजमर्रा की जरूरत की दुकानों के साथ ही मेडिकल स्‍टोर्स भी खुल रहे हैं.


सही और पूरी जानकारी पहुंचाने में जुटे हैं मीडियाकर्मी
देश की 130 करोड़ आबादी तक सही और पूरी जानकारी पहुंचाने के लिए मीडियाकर्मी भी घरों से बाहर निकल रहे हैं. इस समय मीडिया की भूमिका काफी अहम हो गई है. मीडिया इस समय सरकार और जनता के बीच अहम कड़ी की भूमिका में है. यही नहीं मीडिया आपको जागरूक करने के साथ ही हर खतरे से सचेत भी कर रह रही है. प्रशासन को कहां-किस चीज की जरूरत है और कौन किस हाल में है, ये बताने की जिम्‍मेदारी भी इस समय मीडिया के कंधों पर ही है. मीडिया बता रही है कि सरकार जनता के लिए क्‍या कर रही है और जनता सरकार से क्‍या चाहती है. मीडिया जहां सरकार को बता रही है कि दिल्‍ली, मुंबई समेत देश के महानगरों से लोग पैदल ही कई-कई सौ किलोमीटर दूर अपने घरों की ओर पैदल निकल पड़े हैं. तो लोगों को बता रही है कि आप जहां हैं वहीं रुके रहिए क्‍योंकि प्रशासन ने आपके लिए पूरे इंतजाम किए हैं. इस महायुद्ध में मीडियाकर्मी महाभारत के संजय से आगे की भूमिका में नजर आ रहे हैं.

दुकानदार इस महायुद्ध में सप्‍लाई कर रहे हैं रसद
किसी भी युद्ध को उसकी फौजी ताकत के साथ ही रसद आपूर्ति के दम पर जीता जाता है. कोरोना वायरस के खिलाफ युद्ध में आपके लिए खाने-पीने की चीजों की कमी नहीं होने देने के लिए किराना की दुकानें खुल रही हैं. सब्‍जी, फल बेचने वाले बिना संक्रमण की परवाह किए घर से बाहर निकल रहे हैं. आपकी सोसायटी या कॉलोनी के बाहर खडा सिक्‍योरिटी गार्ड अपनी भूमिका निभा रहा है. वहीं, मेडिकल स्‍टोर्स को भी लॉकडाउन में इमरजेंसी सर्विस मानते हुए छूट दी गई है. ऐसे में जरूरी है कि आप इन दुकानों पर भीड़ ना लगाएं और सभी दुकानदारों को संक्रमण से सुरक्षित रखें. कई एनजीओ के लोग बाहर निकलकर जरूरतमंदों को चीजें मुहैया करा रहे हैं. इस सब के बीच देश का हर व्‍यक्ति अपने घर में रहकर संक्रमण फैलने के खिलाफ इस युद्ध में योद्धा की ही भूमिका में है. इस महायुद्ध को जीतने के लिए जरूरी है कि हर योद्धा अपने मोर्चे को बिना छोड़े बस डटा रहे.

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First published: March 28, 2020, 4:24 PM IST
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