अगर अटल बिहारी वाजपेयी नहीं होते तो इन मामलों में पीछे रह जाता भारत

अगर अटल बिहारी वाजपेयी नहीं होते तो इन मामलों में पीछे रह जाता भारत
अटल बिहारी वाजपेयी

2004 में जब वाजपेयी ने मनमोहन सिंह को सत्ता सौंपी तब अर्थव्यवस्था की तस्वीर बेहद मजबूत थी. जीडीपी ग्रोथ रेट 8 फीसदी से अधिक था, महंगाई दर 4 फीसदी से कम थी और विदेशी मुद्रा भंडार भी अपने उच्चतम स्तर पर था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 25, 2018, 3:05 AM IST
  • Share this:
अटल बिहारी वाजपेयी को भारत का सबसे सफल प्रधानमंत्री माना जाता है. 25 दिसंबर साल 1924 को ग्वालियर में उनका जन्म हुआ था. वह 3 बार भारत के प्रधानमंत्री रहे. इस साल 16 अगस्त को दिल्ली के एम्स अस्पताल में उन्होंने आखिरी सांस ली. वाजपेयी लोकप्रिय राजनेता के साथ कुशल प्रशासक भी रहे. आर्थिक मोर्चे पर उन्होंने कई ऐसे कदम उठाए, जिनसे देश की दशा और दिशा बदल गई. आपको बता दें कि 2004 में जब वाजपेयी ने मनमोहन सिंह को सत्ता सौंपी तब अर्थव्यवस्था की तस्वीर बेहद मजबूत थी. जीडीपी ग्रोथ रेट 8 फीसदी से अधिक था, महंगाई दर 4 फीसदी से कम थी और विदेशी मुद्रा भंडार भी अपने उच्चतम स्तर पर था... आइए जानें उनके 4 बड़े कदमों के बारे में...

(1) टेलीकॉम क्रांति-वाजपेयी सरकार की नई टेलिकॉम पॉलिसी में तय लाइसेंस फीस को हटाकर रेवन्यू शेयरिंग की व्यवस्था की गई थी. वाजपेयी सरकार ने ही अंतरराष्ट्रीय टेलिफोन में विदेश संचार निगम लिमिटेड के एकाधिकार को पूरी तरह खत्म कर दिया था. इसके अलावा कई बड़े कदम उठाए गए. इन्हीं का असर आज के टेलीकॉम सेक्टर पर दिख रहा है. अब आम आदमी मुफ्त में फोन पर बात कर पाता है. देशभर के सभी हिस्सों में 4जी सर्विस का इस्तेमाल हो रहा है.

(2) स्वर्णिम चतुर्भुज और ग्राम सड़क योजना-वाजपेयी की सबसे बड़ी उपलब्धियों में उनकी महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं स्वर्णिम चतुर्भुज और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना को सबसे ऊपर रखा जाता है. स्वर्णिम चतुर्भुज योजना ने चेन्नै, कोलकाता, दिल्ली और मुंबई को हाईवे नेटवर्क से कनेक्ट किया, जबकि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के जरिए गांवों को पक्की सड़कों के जरिए शहरों से जोड़ा गया. ये योजनाएं सफल रहीं और देश के आर्थिक विकास में मदद मिली.



(3) राजकोषीय-वाजपेयी सरकार ने राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए राजकोषीय जवाबदेही ऐक्ट बनाया. इससे सार्वजनिक क्षेत्र बचत में मजबूती आई और वित्त वर्ष 2000 में जीडीपी के -0.8 फीसदी से बढ़कर वित्त वर्ष 2005 में 2.3 फीसदी तक पहुंच गई.
(4) सर्व शिक्षा अभियान को सन 2001 में लॉन्च किया गया. इस योजना के तहत 6 से 14 साल के बच्चों को मुफ्त में शिक्षा दी जानी थी.  इस योजना के शुरू होने के बाद तेजी से स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ी. एक अनुमान के मुताबिक, 4 साल में ही स्कूल से बाहर रहने वाले बच्चों की संख्या में 60 फीसदी की गिरवाट देखने को मिली थी.

ये भी पढ़ें: 

80% डिस्काउंट पर मिल रहे हैं यहां कपड़ें, जल्द उठाएं फायदा

50 हजार रुपए में शुरू करें रक्षाबंधन पर ये खास बिजनेस, होगी मोटी कमाई
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज