इस रानी पर लगे थे गंदे आरोप, चौराहे पर गला काटकर दी गई थी सजा

पहली बार मैरी फ्रांस की राजधानी पेरिस आईं तो उन्हें देखने के लिए 50 हज़ार से ज्यादा लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. कहा जाता है कि इसी दौरान भीड़ अनियंत्रित हो गई, जिससे मची भगदड़ में 30 लोग मारे गए. आज के ही दिन मैरी की शादी हुई थी.

News18Hindi
Updated: May 16, 2019, 4:53 PM IST
इस रानी पर लगे थे गंदे आरोप, चौराहे पर गला काटकर दी गई थी सजा
एक फिल्म में मैरी एंटोनेट के किरदार में अभिनेत्री राफेल
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Updated: May 16, 2019, 4:53 PM IST
मैरी एंटोनेट फ्रांस की रानी थी, जिसकी शादी फ्रांस के राजा लुई सोलहवें से हुई थी. दुनिया भर में जिन किरदारों के साथ सबसे ज्यादा मिथक जुड़े हैं मैरी एंटोनेट उनमें से एक हैं. साथ ही उनका व्यक्तित्व आज भी रहस्य का विषय है. कुछ इतिहासकार मैरी को इंसान के तौर पर बहुत अच्छा बताते हैं तो कुछ उनकी बुराई करते नहीं अघाते. हालांकि पिछले कुछ सालों में मारी के प्रति इतिहासकारों के विचार बदले हैं और उन्होंने पाया है कि उन्हें शाही खर्चों और तमाम आरोपों में दिया गया मृत्युदंड गलत था. साथ ही उनपर लगाए गए ज्यादातर आरोप साजिशों का हिस्सा थे.

वैसे मृत्युदंड के बाद मैरी एंटोनेट के शरीर को एक ताबूत में रखकर चर्च ऑफ मेडलिन नाम के चर्च के पीछे स्थित कब्रगाह में गाड़ दिया गया. 1815 में फिर से उनके परिवार के वापस आने के बाद राजा लुई 18वां फ्रांस की गद्दी पर बैठा. यह नेपोलियन के फ्रांस से निकाले जाने के बाद हुआ. गद्दी पर बैठने के बाद उसने अपने बड़े भाई लुई 16वें और मैरी एंटोनेट की कब्र को खोदकर उन्हें फिर से बाकायदा फ्रांसीसी राजशाही के दूसरे लोगों के पास दफनाने का आदेश दिया. जिसके बाद उन्हें संत डेनिस के बैसिलिका कैथेड्रल में दफनाया गया. मैरी की शादी 16 मई को ही हुई थी. मैरी के बारे में ऐसी कई अफवाहें हैं जिनका जवाब इतिहासकारों ने खोजा है और आज भी इस काम में जुटे हैं.



बेटे के यौन शोषण का लगा था आरोप
राजा रहे लुई 16वें को मृत्युदंड दिए जाने के नौ महीने बाद फ्रांस की क्रांतिकारी ट्राइब्यूनल ने फ्रांसीसी गणराज्य की ओर से महारानी पर तमाम आरोप लगाए. इसमें धोखा देने, यौन संकरता फैलाने और अपने पुत्र लुईस चार्ल्स के यौन शोषण के आरोप लगाए गए थे. उसके बेटे ने भी अपने साथ यौन शोषण की बात कही थी हालांकि बाद में खुलासा हो गया था कि लुई पर इसके लिए दबाव डाला गया था कि वह मां के खुद पर किए यौन शोषण की बात को स्वीकारे. दो दिनों तक चली इस सुनवाई में न्यायपीठ ने रानी रह चुकी मैरी एंटोनेट को सभी आरोपों में दोषी ठहराया और सर्वसम्मति से उसे मौत की सजा सुना दी.

मैरी एंटोनेट की एक पेंटिंग


कभी नहीं कहा था, "रोटी नहीं है तो केक क्यों नहीं खाते?"
मैरी एंटोनेट का नाम आते ही अक्सर लोगों को एक बयान की याद आ जाती है जिसके अनुसार मैरी ने जब अपनी सेविका से फ्रांस लोगों के आंदोलन का कारण पूछा तो उसने बताया कि इन लोगों के पास रोटी नहीं है. जिस पर रानी ने कहा कि तो वे केक क्यों नहीं खाते? हालांकि इतिहासकारों को इस बात के कोई भी लिखित साक्ष्य आजतक नहीं मिले हैं. इसलिए इस उक्ति को उस दौर में फ्रांस में राजशाही के खिलाफ चल रहे प्रोपेगेंडा का एक हिस्सा माना जाता है क्योंकि मैरी एंटोनेट के फ्रांस आने से सालों पहले यह बात फ्रांसीसी विचारक रूसो ने स्पेन के राजा रहे लुई 14वें की रानी मैरी थेरेसे के लिए लिखी थी. मैरी थेरेसे और लुई 14वें की शादी 1660 में हुई थी. इसके अलावा इस वक्तव्य को लुई 16वें की दो अन्य आंटियों के साथ भी जोड़ा जाता है. इसलिए वर्तमान इतिहासकार मानते हैं कि वक्तव्य सही न होकर फ्रांस में राजशाही के खिलाफ एक प्रोपेगेंडा के तौर पर प्रयोग किया जाता था.
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बचपन में मैरी के लिए बसाया गया था परीकक्षा जैसा शहर
मैरी एंटोनेट इतनी राजसी थी कि उसके बचपन में उसके लिए एक परीकथा जैसा पूरा शहर ही वर्साय में तैयार किया गया था. रानी के तौर पर फ्रांस में रहने से इतर मैरी एंटोनेट को एक दौर में फ्रांसीसियों की बहुत चहेती थी. जब मैरी किशोरावस्था में फ्रांस आई तो फ्रांसीसी युवतियों ने उसके फैशन को लंबे वक्त तक फॉलो किया. लेकिन जब किशोरावस्था में पहली बार मैरी फ्रांस की राजधानी पेरिस आईं तो उन्हें देखने के लिए 50 हज़ार से ज्यादा लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. कहा जाता है कि इसी दौरान भीड़ अनियंत्रित हो गई, जिससे मची भगदड़ में 30 लोग मारे गए.

मैरी एंटोनेट का एक चित्र


मैरी के नाम पर है एक अमेरिकी शहर का नाम
अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने 1788 में जब अपना पहला निवास मुस्किंगम और ओहियो नदियों के किनारे बनाया तो वे अपने सहयोग के लिए फ्रांसीसियों को इज्जत देना चाहते थे. उन्होंने उसी दौरान अपने नए समुदाय का नाम मैरिएट्टा, ओहियो रखा. यह नाम फ्रांसीसी महारानी मैरी एंटोनेट के सम्मान में रखा गया था. यहां तक कि इन स्वतंत्रता सेनानियों ने इस कस्बे में महारानी के नाम से एक चौराहे के नामकरण का भी जिक्र किया था.

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