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वो शख्स जिसने कोरोना से निपटने के लिए दिया है दुनिया का सबसे बड़ा दान

News18Hindi
Updated: April 9, 2020, 7:43 PM IST
वो शख्स जिसने कोरोना से निपटने के लिए दिया है दुनिया का सबसे बड़ा दान
डोर्सी ने कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए दुनिया में सबसे बड़ा व्यक्तिगत दान किया है.

ट्विटर (Twitter) के फाउंडर मेंबर जैक डोर्सी (Jack Dorsey) ने कोरोना के खात्मे के लिए अपनी 28 प्रतिशत संपत्ति दान (28 Percent Wealth Donated) में दे दी है. ट्विटर के जरिए सोशल मीडिया की दुनिया बदलने वाले डोर्सी कॉलेज ड्रॉपआउट हैं.

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वैश्विक महामारी कोरोना (Corona Pandemic) के खिलाफ दुनियाभर में लोग दान दे रहे हैं. मंतव्य सिर्फ इतना है कि किसी तरह इस वैश्विक आपदा से धरती को छुटकारा दिलाया जाए. भारत सहित दुनिया के अन्य देशों में कई पूंजीपतियों ने बड़ी रकम दान देने के अलावा कई तरह की मदद के ऑफर सरकारों को दिए हैं. इसी क्रम में ट्विटर के चीफ एक्जिक्यूटिव जैक डोर्सी ने कोरोना वायरस रिसर्च में मदद के लिए 1 बिलियन डॉलर (7630 करोड़) की भारी भरकम राशि दान देने का फैसला किया है.

संपत्ति का 28 प्रतिशत दान दिया
डोर्सी ने साल 2006 में ट्विटर की स्थापना की थी. वो कंपनी के को-फाउंडर हैं. उन्होंने मंगलवार को ट्वीट कर जानकारी दी कि ये रकम उन्होंने स्माल स्टार्ट नाम के चैरिटेबल फंड में दी है जिससे इस वैश्विक महामारी से मुकाबला किया जा सके. 43 साल के डोर्सी ने जानकारी दी है कि ये रकम उनकी संपत्ति का करीब 28 प्रतिशत है. ब्लूमबर्ग बिलियनेयर इंडेक्स के मुताबिक डोर्सी के पास 3.9 बिलियन डॉलर की कुल संपत्ति है.

दुनिया का सबसे बड़ा व्यक्तिगत दान



ये दुनियाभर में कोरोना के खिलाफ दिए गए व्यक्तिगत दानों में सबसे बड़ी धनराशि है. इससे पहले अमेजन के फाउंडर जेफ बेजॉस ने कहा था कि वो अमेरिका की फूड बैंक चैरिटी को 100 मिलियन डॉलर दान करेंगे. गौरतलब है कि जेफ बेजोस इस समय दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति हैं. बेजोस का कहना था कि सामान्य समय में भी अमेरिका घरों में फूड इनसिक्योरिटी एक बड़ा मुद्दा होता है. कोविड19 जैसी महामारी ने इसे और ज्यादा बढ़ा दिया है. हालांकि जेफ बेजोस की कुल संपत्ति 123 बिलियन डॉलर की है और उनका दान किया गया हिस्सा कुल संपत्ति का 0.1 प्रतिशत ही है.





कॉलेज ड्रॉपआउट हैं डोर्सी
19 नवंबर 1976 को अमेरिका के सेंट लुइस में पैदा हुए डोर्सी के पिता स्पेक्ट्रोमीटर्स बनाने वाली कंपनी में काम करते थे. दिलचस्प है कि किशोरावस्था में डोर्सी पार्ट टाइम मॉडलिंग भी किया करते थे. डोर्सी न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के ड्रॉपआउट हैं. 1999 में ग्रेजुएशन पूरा होने के एक सेमेस्टर पहले ही उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी थी. डोर्सी के मुताबिक उन्होंने ग्रेजुएशन के दौरान ही ट्विटर का आइडिया जेनेरेट कर लिया था.

डोर्सी प्रोग्रामर थे और उन्होंने एक लॉजिस्टिक सॉफ्टवेयर भी विकसित किया था. यूनिवर्सिटी छोड़ने के बाद उन्होंने ओकलैंड में एक कंपनी की शुरुआत की जो कूरियर डिस्पैच करती थी. डोर्सी की कूरियर कंपनी में डिस्पैच किए गए सामान को ऑनलाइन ट्रैक किया जा सकता था. इसी दौरान उनके दूसरे प्रोजेक्ट भी चल रहे जिनमें इंटरनेट सेवाओं के जरिए दवाएं पहुंचाना शामिल था. उद्देश्य था कि दवाएं बिना लाइन में लगे भी लोगों तक पहुंचें.

बिज स्टोन के साथ ट्विटर की स्थापना
फिर कुछ सालों बाद बिज स्टोन (ट्विटर के को फाउंडर) के साथ मिलकर डोर्सी ने ट्विटर का प्रोटो टाइप तैयार किया था. बाद में कुछ अन्य लोगों के सहयोग और फंड के साथ ट्विटर की शुरुआत हुई थी. बाद ट्विटर की सफलता दुनिया के सामने है. ट्विटर के अलावा डोर्सी स्वायर नाम की मोबाइल पेमेंट कंपनी के भी सीईओ हैं.

कई और बिजनेसमैन ने भी दिए हैं दान
अगर वैश्विक आंकड़ों की बात की जाए तो माना जा रहा है कि अभी तक कोरोना के खिलाफ करीब 9 लाख करोड़ रुपए दान किए जा चुके हैं. लंबे समय तक दुनिया के सबसे रईस आदमी रहे बिल गेट्स के फाउंडेशन ने कोरोना की वैक्सीन तैयार करने के लिए 100 मिलियन डॉलर दान किए हैं. वहीं डेल कंप्यूटर्स के मालिक माइकल डेल ने भी 100 मिलियन डॉलर दान करने की घोषणा की है.



सिर्फ दवा या वैक्सीन ही कर सकती है कोरोना से मुकाबला
लंदन के एक चैरिटी बेस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर जेरेमी फरार का कहना है कि साइंटिफिक रिसर्च में बड़ा पैसा लगाकर ही कोरोना के संकट से निकला जा सकता है. इस महामारी का इलाज तलाशने के लिए व्यापक रिसर्च की आवश्यकता है. सिर्फ दवा या वैक्सीन ही करोड़ों लोगों की जिंदगी बचा सकती हैं साथ ही डूबती हुई वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी. इसका एक मात्र समाधा जल्द से जल्द वैक्सीन और दवा तैयार करना है. और इस रिसर्च में पैसों की बड़ी आवश्यकता है.

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First published: April 9, 2020, 5:58 PM IST
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